लद्दाख में ग्लेशियर से पिघलकर बहने वाला करीब 9 करोड़ लीटर पानी अब खेतों तक पहुंचेगा. लेह के स्टोक गांव के नाले से आने वाले इस पानी को 43 किलोमीटर लंबी इगू-पेह सिंचाई नहर में पहुंचाया गया है. इससे करीब 12 गांवों और 1000 एकड़ से ज्यादा जमीन को सिंचाई का पानी मिलेगा. पहले पानी की कमी के कारण यहां की काफी जमीन सूखी रहती थी.
पहले ग्लेशियर का यह पानी इस्तेमाल नहीं हो पाता था. बहकर सिंधु नदी की तरफ चला जाता था. अब छोटी नालियां बनाकर इस पानी को नहर तक पहुंचाया जा रहा है. 14 अगस्त को ये नालियां बनाई गईं. इसके बाद नहर में पानी का बहाव 1415 लीटर प्रति सेकेंड से बढ़कर 2123 लीटर प्रति सेकेंड या उससे ज्यादा हो गया है.
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12 गांवों को मिलेगा पानी
नहर में पानी बढ़ने से करीब 12 गांवों के किसानों को फायदा होगा. 1000 एकड़ से ज्यादा जमीन में अब पहले के मुकाबले आसानी से सिंचाई हो सकेगी. पानी की कमी के कारण जिन खेतों में खेती करना मुश्किल था, वहां भी पानी पहुंच सकेगा.
पहले नहर में पानी कम होने के कारण किसानों को तय समय के हिसाब से पानी मिलता था. उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था. अब नहर में पानी बढ़ने से इस परेशानी को कम करने में मदद मिलेगी.
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रोज 9 करोड़ लीटर पानी
स्टोक गांव के नाले में ग्लेशियर से पिघलकर पानी आता है. अधिकारियों के मुताबिक, यहां से रोज करीब 9 करोड़ लीटर पानी मिल रहा है. पहले यह पानी सीधे बहकर चला जाता था.
अब इसी पानी को सिंचाई नहर में डाला जा रहा है. इससे खेती के लिए पानी की मात्रा बढ़ गई है. लद्दाख में बारिश कम होती है और मौसम भी काफी ठंडा रहता हैच ऐसे में खेती के लिए पानी का इंतजाम करना बड़ी चुनौती है.

दूसरे इलाकों में भी अपनाया जाएगा तरीका
लद्दाख प्रशासन अब इसी तरह दूसरे इलाकों में भी ग्लेशियर के पानी का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस पहल को पानी बचाने और खेती को बढ़ावा देने वाला तरीका बताया है. प्रशासन दूसरे नालों से बहकर जाने वाले पानी को भी सिंचाई के काम में लाने की तैयारी कर रहा है. इससे आगे और जमीन तक पानी पहुंचाया जा सकता है.
लद्दाख में खेती के लिए पानी की कमी एक बड़ी समस्या है. ऐसे में ग्लेशियर से मिलने वाले पानी को सीधे खेतों तक पहुंचाने से किसानों को राहत मिल सकती है. साथ ही, जो पानी पहले बेकार बह जाता था, उसका इस्तेमाल खेती के लिए किया जा सकेगा.