देश में खेती के हालात, फसलों से जुड़ी अच्छी-बुड़ी खबरें और कृषि के स्थिति, कृषि नीति, मशीनरी, फसल, पशुधन, फार्म प्रबंधन और फसल की कीमतों के अपडेट सहित आपको 'आजतक कृषि समाचार' (Aaj Tak Agriculture News) पर मिलेगी सफल खेती, कृषि समाचार और किसान से जुड़े अपडेटेड स्टोरी, एनालिटिकल न्यूज, फोटो गैलरी, विजुअल स्टोरी और वीडियो.
केंद्रीय कैबिनेट ने ₹23,731 करोड़ की गोबरधन स्कीम को मंजूरी दी है. योजना के तहत पराली, गोबर, कृषि अवशेष और नगर निकायों के जैविक कचरे से कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार की जाएगी. सरकार का लक्ष्य 2036 तक घरेलू CBG उत्पादन को करीब 10 गुना बढ़ाना है. योजना में CBG की अनिवार्य ब्लेंडिंग, उत्पादकों के लिए तय कीमत और प्रोजेक्ट्स को पूंजी सहायता का प्रावधान है.
सहजन की खेती से एक किसान आज के समय में 80 लाख रुपये सालाना की कमाई कर रहा है. यह एक तरह की ऐसी खेती है, जो 5 महीने में ही तैयार हो जाती है और लागत भी कम लगती है.
गुजरात सरकार ने किसानों की मदद के लिए बड़ा फैसला किया है. 7 जुलाई से राज्य में जायद (गर्मी की) मूंग की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर शुरू की जाएगी. जिसके लिए किसानों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और राज्य में बने खरीद केंद्र पर जाकर उपज बेचनी होगी.
केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सीजन से 160 रुपये अधिक है. बिहार, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में खरीद के लिए मंडियां पूरी तरह तैयार हैं.
उत्तर प्रदेश में 30 मार्च से 15 जून तक MSP पर गेहूं की खरीद चलेगी. इसके लिए 3574 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं. गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है. इसके लिए किसानों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने दालों के आयात और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम मिलने के मुद्दे पर अहम निर्देश दिए हैं. अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर स्थिति स्पष्ट करे और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करे.
केंद्र सरकार ने एमएसपी पर 3.47 लाख करोड़ रुपये खर्च कर नया रिकॉर्ड बनाया है. खरीद की मात्रा और लाभार्थी किसानों की संख्या भी बढ़ी है. फिर भी किसान संगठन MSP की कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े हैं. A2+FL और C2 फार्मूले को लेकर विवाद जारी है.
गुजरात सरकार ने 2026-27 के लिए चना और सरसों की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने का फैसला किया है. इसके लिए किसान 13 फरवरी से 5 मार्च तक ई-समृद्धि पोर्टल पर मुफ्त ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. कृषि मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि चने के लिए MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों के लिए 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है.
बिहार के वैशाली में जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने किसानों के साथ खेत में उतरकर धान की रोपाई की और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संदेश दिया. उन्होंने किसानों से बातचीत कर खेती की जानकारी ली और अधिकारियों को अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के निर्देश दिए. इस पहल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं.
अगर आप कम समय में खेती से ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सही फसल, सही मौसम और सही तकनीक की पहचान करना जरूरी है. आप मोटे अनाज की खेती करके कम लागत में मोटा मुनाफा भी कमा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे आप मोटे अनाज की खेती से बेहतर उत्पादन और मुनाफा पा सकते हैं.
MIDH Scheme यानी 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ़ हॉर्टिकल्चर' योजना के तहत किसानों को न सिर्फ आर्थिक, बल्कि तकनीकी मदद भी दी जाती है, जिससे वे अपने प्रोडक्शन को बेहतर बना सकते हैं.
Succulent पौधे कम पानी में भी आसानी से बढ़ जाते हैं, लेकिन ज्यादा पानी इनके लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है. अगर आपका पौधा मुरझा रहा है तो उसे बार-बार पानी देने के बजाय सही कारण पहचानना जरूरी है, ताकि वह फिर से स्वस्थ होकर बढ़ सके.
पौधों की धीमी ग्रोथ या बार-बार मुरझाना हमेशा पानी या खाद की कमी की वजह से नहीं होता. कई बार गमले में जगह खत्म होने के कारण जड़ें दबने लगती हैं और पौधे का विकास रुक जाता है. ऐसे में सही समय पर गमला बदलना पौधे की सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है.
गर्मी और बदलते मौसम के कारण गेंदा (Marigold) के पौधे अक्सर मुरझाने लगते हैं और उनमें फूलों की संख्या भी कम हो जाती है लेकिन कुछ आसान उपायों से सूखते हुए पौधे को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है और सीजन खत्म होने तक इसमें दोबारा ढेर सारे फूल खिलाए जा सकते हैं.
अगर आपको पौधे लगाने का शौक है लेकिन रोजाना उनकी देखभाल के लिए समय नहीं मिल पाता, तो ऐसे कई पौधे हैं जो कम पानी, कम रोशनी और कम मेहनत में भी लंबे समय तक हरे-भरे रहते हैं.
अगर आपकी गाय या भैंस का दूध पतला आ रहा है और उसमें मलाई कम है, तो इसका सीधा संबंध उनके खान-पान और देखभाल से होता है. सही आहार, संतुलित चारा और नियमित मैनेजमेंट से दूध की गुणवत्ता को आसानी से बेहतर किया जा सकता है.
किचन गार्डन में अक्सर एक समय पर सब्जियों की भरमार हो जाती है और फिर कुछ हफ्तों तक ताजी सब्जियां नहीं मिलतीं लेकिन अगर सही प्लानिंग के साथ बीज बोए जाएं तो छोटे से गार्डन से भी पूरे साल लगातार ताजी सब्जियां हासिल की जा सकती हैं. Succession Gardening की मदद से फसल खत्म होते ही नई सब्जियां तैयार होने लगती हैं.
घर के गार्डन में प्याज़ उगाना आसान है, लेकिन अच्छी और बड़ी प्याज़ तैयार करने के लिए सही समय और देखभाल जरूरी होती है. प्याज़ को तैयार होने में कितना समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसे ब
घर के गार्डन में पौधों पर लगने वाले छोटे-छोटे कीड़े जैसे एफिड्स (माहू), सफेद मक्खी और कुछ अन्य चबाने वाले कीट पौधों को कमजोर कर देते हैं. इनसे बचने के लिए बाजार के केमिकल स्प्रे की जगह आप घर पर ही गर्म मिर्च से बना प्राकृतिक स्प्रे तैयार कर सकते हैं.
फलों और सब्जियों की हाइब्रिड वैरायटी की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. पपीते की खेती के लिए बरसात का मौसम आदर्श माना जाता है, क्योंकि नमी पौधों की शुरुआती ग्रोथ में मदद करती है. अगर आप अपने घर-बगीचे या खेत में पपीते उगाना चाहते हैं तो रेड ग्लो वैरायटी बेहतरीन ऑप्शन है. आइए जानते हैं पपीते की इस उन्नत किस्म की खासियत.
तुलसी किचन गार्डन का सबसे पसंदीदा पौधा है, लेकिन इसके आसपास हर पौधा लगाना फायदेमंद नहीं होता. कुछ पौधों की जरूरतें अलग होती हैं, जिससे वे तुलसी के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकत