देश में खेती के हालात, फसलों से जुड़ी अच्छी-बुड़ी खबरें और कृषि के स्थिति, कृषि नीति, मशीनरी, फसल, पशुधन, फार्म प्रबंधन और फसल की कीमतों के अपडेट सहित आपको 'आजतक कृषि समाचार' (Aaj Tak Agriculture News) पर मिलेगी सफल खेती, कृषि समाचार और किसान से जुड़े अपडेटेड स्टोरी, एनालिटिकल न्यूज, फोटो गैलरी, विजुअल स्टोरी और वीडियो.
FSSAI ने फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक केमिकल्स के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी है. इसके तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फल मंडियों, गोदामों और थोक विक्रेताओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी.
बढ़ती गर्मी और लगातार घटते भू-जल स्तर को देखते हुए किसानों को सूझ-बूझ के साथ फसल का चयन करना चाहिए.कृषि एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पानी की स्थिति के अनुसार खेती करने से न केवल नुकसान का जोखिम कम होता है, बल्कि उत्पादन भी बढ़िया हो सकता है.
कृषि एक्सपर्ट्स के मुताबिक पानी की स्थिति के अनुसार खेती करने से न केवल नुकसान का जोखिम कम होता है, बल्कि उत्पादन भी लाभकारी हो सकता है.
किसानों के लिए जायद सीजन में करेले की खेती करना फायदे का सौदा साबित हो सकता है. करेले की नट्टू वैरायटी के 25 ग्राम हाइब्रिड बीज सिर्फ 450 रुपये में मिल रहे हैं, जिन्हें घर बैठे ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं. इस वैरायटी के करेले जल्दी बढ़ते हैं और बाजार में इनकी मांग भी अधिक रहती है.
Delhi-Kashmir Parcel Train Service: जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के बीच 17 अप्रैल 2026 से नियमित पार्सल ट्रेन सर्विस शुरू होने जा रही है. यह ट्रेन बड़गाम से अदर्श नगर तक 23-24 घंटे में सफर पूरा करेगी. जिससे सेब, चेरी जैसे ताजे फल और हस्तशिल्प उत्पाद तेजी से पहुंचेंगे. इससे कश्मीर के व्यापारियों और किसानों को फायदा होगा.
अगर आप घर में हरियाली और सकारात्मकता बढ़ाना चाहते हैं, तो अपराजिता का पौधा लगाना एक बेहतरीन विकल्प है.
एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. यह पौधा अपनी मोटी पत्तियों में पानी जमा कर लेता है, इसलिए इसे बार-बार पानी देने से नुकसान हो सकता है.
अगर आपके मिर्च के पौधे में फूल तो आ रहे हैं लेकिन मिर्च कम लग रही हैं, तो एक आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकता है.
Vegetable Farming: तोरई की काशी रक्षिता वैरायटी कम लागत में अधिक उत्पादन और बढ़िया मुनाफा देती है. ऐसे में किसानों की नकदी कमाई के लिए तोरई की खेती करना अच्छा विकल्प है. नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के अनुसार, काशी रक्षिता किस्म 50-60 दिनों में तैयार हो जाती है.
गर्मियों के मौसम में किसान अगर सही फसल और तकनीक का चुनाव करें, तो कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. ऐसी ही एक फायदेमंद फसल है ककड़ी, जो कम समय में तैयार होती है.
Farmer Friend Stick: किसानों की सुरक्षा के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने किसान मित्र छड़ी विकसित की है. यह छड़ी 100 मीटर दूर से ही सांप और जहरीले जीवों का पता लगा सकती है. यह छड़ी वाइब्रेशन अलर्ट और सोलर टॉर्च से लैस है.
घर की बगिया में अच्छी और भरपूर पैदावार पाने के लिए सही समय पर छंटाई करना बेहद जरूरी होता है. टमाटर से लेकर पालक तक, हर सब्जी की छंटाई का अपना सही समय और तरीका होता है, जिसे अपनाकर आप पौधों की ग्रोथ और
अगर आप एप्सम सॉल्ट का सही तरीके से इस्तेमाल करें, तो यह पौधों की ग्रोथ को तेजी से बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है. इसे इस्तेमाल करने के कुछ आसान तरीके हैं.
उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. प्रदेश ने न सिर्फ दुध उत्पादन में 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे दुग्ध उत्पादक राज्यों को पछाड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया है. इसमें ग्रामीण महिलाओं की अहम भूमिका रही है, जो डेयरी बिजनेस में एक्टिव हैं.
Milk dumped outside the milk plant: मंडी में मिल्कफेड प्लांट ने क्षमता का हवाला देकर दूध लेने से इनकार किया तो गुस्साए पशुपालक ने 1200 लीटर दूध सड़क पर बहा दिया. पशुपालक सरकार की नीतियों और दूध खरीद व्यवस्था से नाराज हैं.
गन्ने की खेती में बेहतर पैदावार के लिए सही समय पर सही फैसले और कीट नियंत्रण के घरेलू उपाय जरूरी हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाया जा सके.
अगर आपके पौधों की पत्तियों या तनों पर सफेद रूई जैसा पदार्थ दिख रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह मिलीबग (Mealybug) का संकेत हो सकता है. एक छोटा लेकिन बेहद नुकसानदायक कीट, जो पौधों का रस चूसकर धीरे-धी
कई लोग सब्जियों को तोड़कर सीधे स्टोर कर देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती साबित होती है. कुछ खास सब्जियों को भंडारण से पहले थोड़े समय के लिए गर्म और हवादार जगह पर रखना जरूरी होता है. इस प्रक्रिया को “उपचार
अगर आप अपने घर, आंगन या छत पर पपीता लगाने का सोच रहे हैं, तो सही वैरायटी चुनना बेहद जरूरी है. सही किस्म न सिर्फ जल्दी फल देती है, बल्कि कम जगह में भी ज्यादा उत्पादन देती है.
मधुमक्खी पालन से कम जगह, कम खर्च और कम मेहनत से अच्छा मुनाफा मिल सकता है. मधुमक्खी पालन से शहद, मोम, पराग जैसी चीजें मिलती हैं. साथ ही फसलों का उत्पादन भी बढ़ता है क्योंकि मधुमक्खियां फसलों का परागण (पोलिनेशन) करती हैं. अगर आप भी मधुमक्खी पालन करना चाहते हैं तो आइए जानते हैं इसका पूरा तरीका.
गर्मी बढ़ने के साथ खेतों में फसलों के मुरझाने की समस्या भी बढ़ जाती है. कई बार पौधों की पत्तियां सूखने लगती हैं और फसल की ग्रोथ रुक जाती है. अगर समय रहते इसका ध्यान न रखा जाए... किसानों को भारी नुकसा