देश में खेती के हालात, फसलों से जुड़ी अच्छी-बुड़ी खबरें और कृषि के स्थिति, कृषि नीति, मशीनरी, फसल, पशुधन, फार्म प्रबंधन और फसल की कीमतों के अपडेट सहित आपको 'आजतक कृषि समाचार' (Aaj Tak Agriculture News) पर मिलेगी सफल खेती, कृषि समाचार और किसान से जुड़े अपडेटेड स्टोरी, एनालिटिकल न्यूज, फोटो गैलरी, विजुअल स्टोरी और वीडियो.
कृषि मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे 'खेत बचाओ' अभियान का उद्देश्य मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बचाना है. पिछले दशकों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग ने मिट्टी को बंजर कर दिया है. सवाल यह है कि क्या गलत नीतियों की वजह से किसानों के खेत खराब हुए हैं?
अक्सर लोग सोचते हैं कि पौधों के मुरझाने की वजह सिर्फ पानी की कमी होती है लेकिन कई बार नियमित पानी देने के बाद भी पौधे झुके हुए और कमजोर नजर आते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे कई दूसरी वजहें भी ह
जून के महीने में सही सब्जियों का चुनाव और समय पर खेती किसानों को कम लागत में बेहतर पैदावार और बाजार में मजबूत दाम दिलाने का अच्छा मौका दे सकता है, जिससे उनकी आमदनी में लगातार बढ़ोतरी संभव है.
गर्मी के मौसम में तरबूज एक लोकप्रिय फल है, लेकिन इसके छिलके अक्सर कचरे में फेंक दिए जाते हैं. अब यही छिलके आपके घर के पौधों के लिए प्राकृतिक खाद (compost) का बेहतरीन स्रोत बन सकते हैं.
कम लागत और लंबे समय तक लगातार उत्पादन देने वाली यह फसल किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत विकल्प बन सकती है, जिसमें एक बार निवेश के बाद सालों तक मुनाफे का सिलसिला चलता रहता है.
गार्डन में मल्चिंग यानी सूखी पत्तियां, लकड़ी के बुरादे, घास या भूसे की परत बिछाना मिट्टी की नमी बनाए रखने और खरपतवार रोकने के लिए फायदेमंद माना जाता है लेकिन अगर मल्च जरूरत से ज्यादा डाल दी जाए, तो यह
ये पेड़ न सिर्फ सीमित स्पेस के लिए परफेक्ट हैं, बल्कि कम पानी और नियमित प्रूनिंग में भी लंबे समय तक फल देते रहते हैं. घर की बालकनी या छोटे आंगन को भी ये एक मिनी गार्डन में बदल सकते हैं, जहां हर मौसम में ताजगी और स्वाद भरे फल मिलते हैं.
हैंगिंग बास्केट्स जल्दी सूख जाते हैं क्योंकि इनमें मिट्टी कम होती है और ये हवा, धूप व गर्मी के सीधे संपर्क में रहते हैं लेकिन कुछ आसान तरीकों से इन्हें लंबे समय तक हरा-भरा और नमी से भरा रखा जा सकता है
किचन वेस्ट को फेंकने की बजाय अगर सही तरीके से गार्डन में इस्तेमाल किया जाए, तो यह आपकी मिट्टी को प्राकृतिक रूप से मजबूत और उपजाऊ बना सकता है. गर्मियों के मौसम में सब्जियों के छिलके, फलों के बचे हिस्से और अन्य जैविक कचरा धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में जरूरी पोषक तत्व जोड़ता है, जिससे पौधों की ग्रोथ तेज होती है और वे ज्यादा हरे-भरे दिखते हैं.
सांप घनी झाड़ियों, नमी और छिपने की जगहों वाले वातावरण में रहते हैं. कनेर के पौधे की घनी बनावट ऐसी है कि इसके नीचे छायादार जगह बन जाती है, जो सांपों के लिए अनुकूल हो सकती है.
लहसुन (Garlic) बागवानी में एक असरदार प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
अगर आपके बगीचे में पौधों पर कीड़े लग रहे हैं, तो संतरे के छिलके एक आसान और प्राकृतिक उपाय बन सकते हैं.
Litchi Production Down: बिहार के मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची इस बार मौसम की मार झेल रही है. जिले में बदलते मौसम, भीषण गर्मी और बढ़ते पारे का सीधा असर लीची की फसल पर देखने को मिल रहा है. हालत ऐसे हैं कि लीची की फसल को 70 फीसदी तक नुकसान हो रहा है.
घर में छोटी जगह हो या बालकनी, हरी मिर्च (Green Chilli) का पौधा आसानी से गमले में उगाया जा सकता है. यह पौधा कम देखभाल में भी अच्छी पैदावार देता है और ताज़ी मिर्च हर समय आपके किचन में उपलब्ध रहती है.
खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान धान की नर्सरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन तेज गर्मी और लू ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अगर इस समय सही तरीके से नर्सरी तैयार नहीं की गई, तो इसका असर पूरे खरीफ सीजन के उत्पादन पर पड़ सकता है. आइए जानते हैं धान की नर्सरी और बुवाई को लेकर एक्सपर्ट्स की सलाह.
अगर आपके पौधों की पत्तियों पर छोटे-छोटे कीड़े लग गए हैं और पत्ते खराब हो रहे हैं तो यह देसी तरीका आपके काम आ सकता है.
गुजरात के अमरेली जिले के एक किसान ने एक ही आम के पेड़ पर 14 तरह के आम उगाकर सबको हैरान कर दिया है. ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से उगाए गए इन आमों में कई पुरानी और खास किस्में शामिल हैं. किसान उकाभाई भट्टी की यह अनोखी खेती अब लोगों और दूसरे किसानों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बन गई है.
अगर आपके पौधे बढ़ नहीं रहे हैं या उनमें फूल-फल नहीं आ रहे हैं, तो इसका कारण अक्सर मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होता है. ऐसे में बाजार के केमिकल फर्टिलाइज़र की जगह घर पर बना प्राकृतिक फीड काफी असरदार
तेज गर्मी के इस मौसम में जहां लोग राहत के लिए शाम के समय बागवानी करते हैं, वहीं पौधों को पानी देने का यही समय कभी-कभी नुकसानदायक भी साबित हो सकता है.
धान की खेती के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है. राष्ट्रीय बीज निगम किसानों के लिए धान एक ऐसी किस्म उपलब्ध करवा रही जो कम पानी में भी बंपर उपज देगी.
पौधों की हेल्दी ग्रोथ के लिए सिर्फ पानी और खाद ही नहीं बल्कि सही पॉट का चुनाव भी बहुत जरूरी होता है. हर पौधे की जरूरत अलग होती है, इसलिए पॉट का सही चयन उसकी सेहत पर सीधा असर डालता है.