इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी में रविवार को कई बार विस्फोट हुए. इससे निकली राख 50 हजार फीट तक पहुंच गई. राख फैलने के कारण 8 एयरपोर्ट बंद करने पड़े और 1,558 फ्लाइट्स रद्द हो गईं. इससे करीब 1.70 लाख यात्री प्रभावित हुए. इनमें राजधानी जकार्ता के दो बड़े एयरपोर्ट भी शामिल हैं.
अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा स्ट्रेट में है. इसमें शुक्रवार से हलचल बढ़ी हुई थी. इंडोनेशिया जियोलॉजिकल एजेंसी के मुताबिक, रविवार सुबह 3:53 बजे करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ. इसके करीब तीन घंटे बाद एक और छोटा विस्फोट हुआ. रविवार रात 8:23 बजे भी विस्फोट दर्ज किया गया. अभी तक किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं है. लोगों को क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने को कहा गया है.
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50 हजार फीट तक पहुंची राख
इंडोनेशिया मीटियोरोलॉजी, क्लाइमेटोलॉजी एंड जियोफिजिकल एजेंसी (बीएमकेजी) के मुताबिक, ज्वालामुखी से राख के दो बड़े गुबार निकले. पहला करीब 20 हजार फीट तक पहुंचा और जकार्ता, बैंटन और वेस्ट जावा की ओर गया. दूसरा गुबार करीब 50 हजार फीट तक पहुंचा और बैंटन, लैम्पुंग और बेंगकुलु की ओर फैल गया.
हवा में मौजूद ज्वालामुखी की राख विमानों के लिए खतरनाक होती है. यह विमान के इंजन में जाकर उसे नुकसान पहुंचा सकती है. इससे उड़ान के दौरान पायलट को सामने देखने में भी दिक्कत हो सकती है. इसी वजह से राख वाले इलाके में विमानों की आवाजाही रोक दी जाती है.
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8 एयरपोर्ट पर रुकी उड़ानें
राख के खतरे को देखते हुए सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हलीम परदानाकुसुमा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और राडिन इंतान II एयरपोर्ट समेत 8 एयरपोर्ट बंद किए गए. शुरुआत में इन्हें सोमवार सुबह 8:59 बजे तक बंद रखने का फैसला किया गया था. बाद में सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट को शाम 6 बजे तक बंद रखने की जानकारी दी गई.
इंडोनेशिया ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर डुडी पुरवागंधी ने कहा कि मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है. इसलिए अभी यह तय करना मुश्किल है कि उड़ानें पूरी तरह कब शुरू होंगी.
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जुलाई से बढ़ी है ज्वालामुखी की गतिविधि
इंडोनेशिया जियोलॉजिकल एजेंसी के मुताबिक, अनाक क्राकाटाउ में जुलाई से गतिविधि बढ़ी हुई है. रविवार का विस्फोट इस दौरान सबसे तेज था. एजेंसी के अनुसार, ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और गैस की सप्लाई बनी हुई है. हालांकि, अभी यह नहीं कहा जा सकता कि आगे इससे बड़ा विस्फोट होगा या नहीं. आने वाले समय में और विस्फोट की संभावना बनी हुई है.

यात्रियों और स्कूलों पर असर
फ्लाइट्स रद्द होने के बाद बड़ी संख्या में यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए. कुछ यात्रियों को अपनी उड़ान दोबारा बुक कराने का इंतजार करना पड़ रहा है. जकार्ता और लैम्पुंग के प्रभावित इलाकों में कुछ स्कूलों ने बच्चों को राख से बचाने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है.
अधिकारियों ने लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है. फिलहाल ज्वालामुखी की गतिविधि, राख की दिशा और मौसम पर लगातार नजर रखी जा रही है. उड़ानों को दोबारा शुरू करने का फैसला इन्हीं हालात को देखकर लिया जाएगा.