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NIA मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को जल्द NIA कोर्ट बनाने के निर्देश

विशेष NIA अदालतों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को जल्द से जल्द NIA अदालतों की स्थापना का निर्देश दे दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो: ITG)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो: ITG)

विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों से जल्द विशेष अदालतें शुरू करने को कहा, ताकि NIA के मामलों में सुनवाई में देरी न हो.

एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को बताया कि कई राज्यों ने इस संबंध में अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है. मतलब इन राज्यों ने अब तक बताया ही नहीं है कि उनके यहां विशेष NIA अदालतें स्थापित की गई हैं या नहीं. 

सुनवाई के दौरान कर्नाटक के वकील ने बताया कि बेंगलुरु में तीन विशेष अदालतें हैं. और चिकमंगलूर में भी जल्द अदालत शुरू होने वाली है. केरल सरकार के वकील ने बताया कि उन्होंने विशेष अदालतों के लिए जगहों की पहचान कर ली है. राज्य में दो अदालतें स्थापित होनी है. उन्होंने अदालत से दो-तीन महीने का समय मांगा लेकिन CJI ने एक महीने में ही अदालतें शुरू करने को कहा. तमिलनाडु सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में 2 विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि एक तो कार्यरत भी हैं. 

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तेलंगाना सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में सिर्फ एक विशेष NIA अदालत की जरूरत है. तेलंगाना में NIA के 13 मामले हैं. CJI ने तेलंगाना सरकार को तीन हफ्ते में अदालतें शुरू करने का निर्देश दिया. असम में NIA के 26 मामले हैं. राज्य में एक विशेष अदालत काम कर रही है और दो और अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है.

यह भी पढ़ें: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर विवाद, मान कैबिनेट ने शपथ रोकने की मांग की

CJI ने असम से इस संबंध में चार हफ्ते में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. जम्मू कश्मीर में NIA के 46 मामले हैं और यहां सिर्फ एक विशेष अदालत है. सुरक्षा कारणों से अदालतें जम्मू में बनाने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर में तीन और अदालतों की जरूरत बताई गई. 

मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि विशेष NIA अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई नहीं होनी चाहिए. ताकि NIA के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हो सके. 

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