कैंसर कि पहचान के लिए डॉक्टर बायोप्सी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इसको कराने से कैंसर का ट्यूमर पूरे शरीर में फैल सकता है. देश में आयुर्वेद के कई बड़े डॉक्टर भी ये कहते हैं. इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर भी आते रहते हैं. कई मामलों में इसी डर की वजह से कुछ लोग बायोप्सी कराने में हफ्तों और कभी-कभी महीनों की देरी भी कर देते हैं, लेकिन सवाल है कि क्या बायोप्सी सच में कैंसर को शरीर में फैला देती है?
बायोप्सी एक ऐसा टेस्ट है, जिसमें शरीर के किसी संदिग्ध हिस्से से टिश्यू या ट्यूमर का छोटा सा सैंपल लिया जाता है. इसके बाद उस सैंपल को लैब में माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है. इससे ये पता करने कि कोशिश की जाती है कि ट्यूमर कैंसर वाला है या नहीं .ये भी पता चलता है कि कैंसर किस प्रकार का है और आगे किस तरह का इलाज बेहतर रहेगा. हालांकि सिर्फ बायोप्सी से ही कैंसर की पहचान नहीं होती है. डॉक्टर पीईटी- स्कैन भी कराते हैं.
क्या बायोप्सी कराने से कैंसर फैल जाता है?
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में हैड डॉ. वेदांत काबरा ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि यह बात सही नहीं है कि बायोप्सी कराने से कैंसर फैल जाता है. मेडिकल साइंस में इस बात को कोई प्रमाण नहीं है. कैंसर की पहचान के लिए बायोप्सी सबसे जरूरी टेस्ट में से एक है. अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, बायोप्सी के दौरान कैंसर फैलने की आशंका नहीं होती है और इससे सही इलाज की जानकारी मिलती है.
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फिर लोगों को क्यों लगता है कि बायोप्सी से कैंसर फैलता है?
डॉ वेदांत बताते हैं कि ये लोगों के मन में एक मिथक है, जो लंबे समय से लोगों के बीच मौजूद है. जिसको दूर करने की जरूरत है. अगर डॉक्टर ने किसी मरीज को बायोप्सी लिखी है तो उसे जल्द से जल्द करा लेना चाहिए. इससे कैंसर की समय पर पहचान और इलाज हो सकता है.
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क्या हर गांठ की बायोप्सी जरूरी है?
नहीं, शरीर में होने वाली हर गांठ की बायोप्सी जरूरी नहीं होती. कई गांठें सामान्य होती है. इससे डॉक्टर पहले अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन कराने की सलाह दे सकते हैं.