ज्वालामुखी
एक ज्वालामुखी (Volcano) का निर्माण एक प्लैनेटरी-मास ऑबजेक्ट की परत में टूटने से होता है. ज्वालामुखीय प्रक्रिया में गर्म लावा, ज्वालामुखीय राख और गैसें सतह के नीचे स्थित मैग्मा कक्ष से पृथ्वी की सतह से बाहर निलकती है (Volcano Composition).
पृथ्वी पर, जहां टेक्टोनिक प्लेट्स विचलन या अभिसरण करते हैं, ज्वालामुखी सबसे ज्यादा पाए जाते हैं. अधिकांश ज्वालामुखी पानी के नीचे पाए जाते हैं. किसी मध्य-महासागर रिज, जैसे कि मिड-अटलांटिक रिज, में अलग-अलग टेक्टोनिक प्लेटों के कारण कई ज्वालामुखी हैं जबकि पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में अभिसरण टेक्टोनिक प्लेटों के कारण बड़ी संख्या में ज्वालामुखी हैं (Divergent Plate Boundaries). क्रस्ट की प्लेटों में खिंचाव और पतलापन होने की वजह से भी कई ज्वालामुखियों का निर्माण होता है, पूर्वी अफ्रीकी दरार और वेल्स ग्रे-क्लियरवाटर ज्वालामुखी क्षेत्र और उत्तरी अमेरिका में रियो ग्रांड दरार इसके सबूत हैं (Convergent Plate Boundaries). ज्वालामुखी प्लेट की सीमाओं से दूर पृथ्वी में 3,000 किलोमीटर की गहराई में कोर-मेंटल सीमा से जुड़ा होता है. इसे हॉटस्पॉट ज्वालामुखी कहते हैं, इसका एक उदाहरण हवाई हॉटस्पॉट है (Hotspot Volcano). आमतौर पर दो टेक्टोनिक प्लेटों के एक दूसरे से टकराने पर ज्वालामुखी का निर्माण नहीं होता है.
बड़े ज्वालामुखी विस्फोट वायुमंडलीय तापमान को प्रभावित कर सकते हैं. विस्फोट से निकलने वाली राख और सल्फ्यूरिक एसिड की बूंदें सूर्य की किरणों को वातावरण से दूर रखती हैं, जिससे पृथ्वी का क्षोभमंडल ठंडा हो जाता है. ऐतिहासिक रूप से, बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों के बाद ज्वालामुखीय सर्दियां आती हैं, जो भयावह अकालों का कारण बनी हैं (Volcano Hazards).
कीलाउए के उत्तरी वेंट से 17 अक्टूबर को 700 फुट ऊंचे लावा फव्वारे निकले. छह घंटे चले एपिसोड 55 के बाद अलर्ट घटाया गया, लेकिन गैस खतरा जारी है.
रूस और अमेरिका जुड़ सकते हैं. पृथ्वी के दो महाद्वीप धीरे-धीरे एक नए सुपर कॉन्टीनेंट की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसा अटलांटिक महासागर सिकुड़ने से संभव होगा. यूरेशिया बैकल झील के पास टूट सकता है.
करीब 500 साल तक समुद्र के किनारे खड़ी रही हवाई की मशहूर चट्टान आखिरकार गायब हो गई. तेज लहरों, भूकंप और दरारों से कमजोर हो चुकी यह चट्टान तूफान के दौरान टूटकर प्रशांत महासागर में समा गई.
नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने चंद्रमा पर 2024 में बने 222 मीटर चौड़े और 43 मीटर गहरे मैकगेटचिन क्रेटर की खोज की. यह सौर मंडल का सबसे बड़ा नया इम्पैक्ट क्रेटर है, जो 132 साल में एक बार बनता है.
ज्वालामुखी फटा तो राख आसमान में 50 हजार फीट तक पहुंच गई. इसका असर इतना बड़ा हुआ कि 1558 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं और करीब 1.70 लाख यात्री फंस गए.
इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी में कई विस्फोटों के बाद राख 50 हजार फीट तक पहुंच गई. इसके चलते 8 एयरपोर्ट बंद और 1,558 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं. करीब 1.70 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, मौसम और ज्वालामुखी की गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है. आगे और विस्फोट की संभावना से इनकार नहीं किया गया है.
इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से 50 हजार फीट ऊंचा राख का गुबार उठा. हवा में राख फैलने से जकार्ता एयरपोर्ट पर उड़ानें थमीं और 22,800 मुसाफिर फंस गए.
चांद को अब तक शांत और ठंडी दुनिया माना जाता रहा है, लेकिन नई खोज उसके पुराने इतिहास की अलग तस्वीर दिखाती है. वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर दो विशाल ज्वालामुखीय ढांचे खोजे हैं, जो अरबों साल पहले की ज्वालामुखीय गतिविधि के सबूत देते हैं.
अरबों साल पुरानी चट्टान ने खोला धरती के शुरुआती जीवन का राज! झारखंड के सिंहभूम में मिली चट्टान में वैज्ञानिकों को सूक्ष्म जीवों से जुड़े संकेत मिले हैं. यह खोज जीवन की शुरुआत को समझने में मदद कर सकती है.
तीन ज्वालामुखी, कुछ घंटे और अलग-अलग इलाके… पहली नजर में यह किसी बड़ी जियोलॉजिकल हलचल का संकेत लग सकता है. समझिए इन विस्फोटों के पीछे की वजह क्या है, कहीं भूकंप तो नहीं.
इटली का माउंट एटना इन दिनों लावा उगल रहा है, लेकिन खतरे के बीच भी हजारों पर्यटक इसे देखने पहुंच रहे हैं. हर शाम 2000 लोग ज्वालामुखी पर चढ़ रहे हैं, जिससे स्थानीय गाइडों की चिंता बढ़ गई है.
एक नहीं, कई देशों में एक साथ ज्वालामुखियों ने हलचल बढ़ा दी है. 48 घंटे में मैक्सिको, कोलंबिया, इटली, जापान, ग्वाटेमाला और इंडोनेशिया से राख, विस्फोट और लावे की खबरें सामने आईं.
फुएगो ज्वालामुखी में बढ़ती हलचल ने ग्वाटेमाला में सतर्कता बढ़ा दी है. राख और लावा निकलने के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं.
इटली के सिसिली में माउंट एटना ज्वालामुखी एक बार फिर एक्टिव हो गया है और इससे लगातार लावा निकल रहा है. इस वजह से आसपास के इलाके और आसमान में लाल चमक दिखाई दे रही है.
दक्षिणी फिलीपींस में आए 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप में 41 लोगों की मौत हो गई और 450 से अधिक घायल हैं. मलबे के कारण कई इलाके कट गए हैं. सुनामी लहरों का वीडियो वायरल हो रहा है.
सिटी ऑफ वोल्केनो के लोगों के मन में पिछली ज्वालामुखी विस्फोट की कड़वी यादें अब भी ताजा हैं जब लावा की एक विशाल नदी तेजी से उनकी ओर बढ़ चली थी. ताजा सैटेलाइट इमेजरी चेतावनी दे रही है कि पहाड़ के क्रेटर में लावा का स्तर फिर से खतरनाक ऊंचाई तक पहुंच गया है. इस शहर को दो ओर से खतरा है. एक तरफ ज्वालामुखी से दहकता पहाड़ तो दूसरी ओर खतरनाक गैस से भरी झील.
पृथ्वी अपने महाद्वीपों को नीचे से धीरे-धीरे छील रही है. छीलने से निकला पदार्थ पृथ्वी की दूसरी लेयर में पहुंचकर लाखों साल तक ज्वालामुखी द्वीपों में विस्फोट करती रहती है. क्या सभी महाद्वीप एकदिन प्याज की तरह छिल जाएंगे.
इटली के माउंट एटना ज्वालामुखी ने 2026 की शुरुआत जोरदार विस्फोट से की. 1 जनवरी की शाम को वैले डेल बोवे घाटी में 2100 मीटर ऊंचाई पर नई दरार खुल गई. लावा कई सौ मीटर बहा. हालांकि, कोई बसा इलाका खतरे में नहीं है. शिखर पर राख निकल रही है, लेकिन बहाव धीमा हो गया.
ईरान के तफ्तान ज्वालामुखी में 7 लाख साल बाद हलचल देखने को मिली है. सैटेलाइट डेटा से पता चला है कि शिखर पर जमीन 9 सेमी ऊपर उठी है. यानी नीचे गैस जमा हो रही है. स्थानीय लोगों को सल्फर की बदबू आ रही है. अभी फटने का तत्काल खतरा नहीं, लेकिन वैज्ञानिकों ने निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है.
इथियोपिया के हायली गुब्बी ज्वालामुखी विस्फोट से जोड़कर वायरल हो रहा सड़क पर बहते लावा वाला वीडियो असली नहीं, बल्कि AI से बनाया गया है. गूगल लेंस और Hive Moderation जांच में इसकी 99% AI जनरेटेड होने की पुष्टि हुई.
दुनिया का मौसम इस समय पूरी तरह बेकाबू हो चुका है. जमीन से 20-30 km ऊपर बहने वाली हवा यानी QBO नवंबर में ही पलट गई, जो आमतौर पर जनवरी-फरवरी में बदलती है. भारत समेत पूरी दुनिया पर 2025-26 में इसका भयंकर असर पड़ेगा. यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब भी बाढ़, ठंड और सूखे की दोहरी मार झेल रहे हैं. यह कोई स्थानीय मौसम नहीं, पूरा ग्लोबल सिस्टम टूटने की शुरुआत है.