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QR कोड बंद होने का खतरा, 15 सितंबर की डेडलाइन, सब्जी से लेकर चाय वाले दुकानदार संकट में!

इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है. करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता इस डेडलाइन से प्रभावित हो सकते हैं.

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आरबीआई से Kyc की आखिरी तारीख बढ़ाने की मांग. (Photo: ITG)
आरबीआई से Kyc की आखिरी तारीख बढ़ाने की मांग. (Photo: ITG)

भारत में डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की दुकान हो, सब्जी मंडी हो या गली-मोहल्ले की किराना दुकान, हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान आम बात है. लेकिन अब एक ऐसी डेडलाइन सामने आई है, जिसने लाखों छोटे कारोबारियों और उनके ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है.

RBI के नियमों के तहत मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. उद्योग जगत का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का सत्यापन तय समय तक पूरा नहीं हो पाया, तो उनके QR कोड आधारित भुगतान प्रभावित हो सकते हैं.

क्या है पूरा मामला?
रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार मर्चेंट्स को समय-समय पर अपनी KYC जानकारी अपडेट करनी होती है. मौजूदा समयसीमा के तहत 15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी करना जरूरी है. पेमेंट एग्रीगेटर और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि लाखों छोटे कारोबारियों का सत्यापन अभी बाकी है. इसी वजह से इंडस्ट्री ने RBI से समयसीमा बढ़ाने की मांग भी की है.

आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर किसी दुकानदार की री-केवाईसी समय पर पूरी नहीं होती और उसका QR कोड प्रभावित होता है, तो ग्राहकों को भुगतान में परेशानी हो सकती है. मान लीजिए आप सब्जी खरीदने पहुंचे और दुकानदार का QR कोड काम नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में UPI से भुगतान संभव नहीं होगा. तब आपको नकद भुगतान करना पड़ सकता है या फिर सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने जैसे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं. हालांकि इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं वाले इलाकों में परेशानी ज्यादा दिखाई दे सकती है.

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कितने कारोबारी हो सकते हैं प्रभावित?
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है. करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता इस डेडलाइन से प्रभावित हो सकते हैं. वहीं लगभग 10 लाख छोटे कारोबारियों को जोखिम के दायरे में माना जा रहा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि तय समय तक करीब 80 फीसदी वेरिफिकेशन ही पूरा हो पाएगा. यही वजह है कि पेमेंट कंपनियां RBI से अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही हैं.

क्या रुक जाएगा डिजिटल पेमेंट सिस्टम?
इस पूरे मामले को लेकर सबसे जरूरी बात है कि इससे देश का डिजिटल पेमेंट सिस्टम बंद नहीं होने वाला है. भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और बड़े कारोबारियों के भुगतान सिस्टम सामान्य रूप से चलते रहेंगे. चिंता मुख्य रूप से उन छोटे व्यापारियों को लेकर है, जिनका कारोबार QR कोड आधारित भुगतान पर काफी हद तक निर्भर है. अगर ऐसे कारोबारियों के QR कोड प्रभावित होते हैं, तो उनकी बिक्री और ग्राहकों की सुविधा दोनों पर असर पड़ सकता है.

क्या ग्राहकों को कैश रखना चाहिए?
फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. इंडस्ट्री लगातार समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही है और बाजार की नजर RBI के अगले कदम पर टिकी हुई है. हालांकि एहतियात के तौर पर अगर आप छोटे बाजारों, मंडियों या रेहड़ी-पटरी वाले इलाकों में खरीदारी करते हैं, तो कुछ नकद राशि साथ रखना उपयोगी हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि RBI 15 सितंबर की समयसीमा को बरकरार रखता है या फिर इंडस्ट्री को कुछ और राहत देता है. लाखों छोटे कारोबारियों की नजर फिलहाल इसी फैसले पर टिकी हुई है.

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