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हंतावायरस की वैक्सीन नहीं है, फिर कैसे होगा इलाज, जानें- क्या ये कोरोना की तरह फैलेगा

दुनिया भर में हर साल 60 हजार से 1 लाख लोग हंतावायरस से संक्रमित होते हैं, लेकिन कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है. मॉडर्ना कंपनी वैक्सीन पर काम कर रही है, जो अभी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है.

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हंतावायरस की फिलहाल कोई वैक्सीन नहीं है, जबकि यह बीमारी कोरोना वायरस से भी खतरनाक है. (Photo: ITG)
हंतावायरस की फिलहाल कोई वैक्सीन नहीं है, जबकि यह बीमारी कोरोना वायरस से भी खतरनाक है. (Photo: ITG)

हंतावायरस से प्रभावित लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस की घटना ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी है. कुछ लोग इसे कोविड-19 जैसी नई महामारी समझ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्कुल अलग है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने स्पष्ट कहा है कि यह कोविड-19 नहीं है. वर्तमान में हंतावायरस से पब्लिक हेल्थ का खतरा बहुत कम है.

हंतावायरस चूहों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है. यह मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियां पैदा करता है - एक फेफड़ों पर हमला करता है (Hantavirus Pulmonary Syndrome - HPS) और दूसरा किडनी को प्रभावित करता है. यह वायरस चूहों के मूत्र, लार और मल से फैलता है. जब ये सूखकर हवा में उड़ते हैं तो इंसान उन्हें सांस के साथ अंदर ले लेता है. कोविड-19 की तरह यह हवा में आसानी से नहीं फैलता. 

यह भी पढ़ें: Q&A: हंतावायरस का खौफ क्यों फैल रहा है, इसके लक्षण क्या हैं, आम फ्लू से कितना ज्यादा खतरनाक है?

कोविड-19 से सबसे बड़ा अंतर

कोविड-19 हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता था. एक व्यक्ति से दूसरे में सामान्य बातचीत, खांसने या छींकने से भी संक्रमण हो जाता था. लेकिन हंतावायरस में इंसान से इंसान में संक्रमण बहुत दुर्लभ है. सिर्फ एंडीज स्ट्रेन ही इंसान से इंसान में फैलता है. यह तब होता है जब लंबे समय तक बहुत करीबी संपर्क हो, जैसे घर में साथ रहना या घनिष्ठ संबंध. सामान्य मिलने-जुलने से यह नहीं फैलता.

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Hantavirus Vaccine

वैक्सीन अभी तक क्यों नहीं बना? 

दुनिया भर में हर साल हंतावायरस से लगभग 60 हजार से एक लाख लोग संक्रमित होते हैं, फिर भी यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिका में अभी तक इसका कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इस वायरस के कारण होने वाली बीमारी बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर एंडीज स्ट्रेन जो 40 प्रतिशत तक मौत का कारण बन सकता है. हंतावायरस ने एक बार फिर इस सवाल को उठा दिया है कि क्या हमें महामारी आने से पहले ही टीका तैयार करना चाहिए.

मॉडर्ना की कोशिश और प्रीक्लिनिकल स्टेज

2023 से अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना दक्षिण कोरिया की कोरिया यूनिवर्सिटी वैक्सीन इनोवेशन सेंटर के साथ mRNA Access प्रोग्राम के तहत काम कर रही है. इस साझेदारी की औपचारिक घोषणा 2024 में की गई थी. चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस mRNA वैक्सीन ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं. हालांकि, यह वैक्सीन अब भी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है और ह्यूमन ट्रायल्स शुरू नहीं हुए हैं.  

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विशेष बात यह है कि यह वैक्सीन मुख्य रूप से हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) पैदा करने वाले स्ट्रेन पर काम कर रही है, न कि MV होंडियस क्रूज शिप वाले एंडीज स्ट्रेन पर, जो HPS (हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) का कारण बनता है.

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क्रूज संकट के दौरान शेयरों में उछाल

MV होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस के मामले सामने आने के बाद जब मॉडर्ना की इस साझेदारी की खबर आई, तो कंपनी के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर हंतावायरस का खतरा बढ़ा तो मॉडर्ना का mRNA प्लेटफॉर्म काम आ सकता है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अभी तक यह सिर्फ शुरुआती चरण में है.

लक्षण और मौत का खतरा

हंतावायरस के लक्षण शुरू में फ्लू जैसे होते हैं - बुखार, थकान, सिरदर्द. इसके 4-10 दिन बाद सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है. HPS का मौत का दर करीब 40% है, जो कोविड-19 से ज्यादा है. लेकिन क्योंकि यह आसानी से नहीं फैलता, इसलिए बड़े स्तर पर फैलने का खतरा बहुत कम है. कोविड-19 का इनक्यूबेशन पीरियड 2-14 दिन था, जबकि हंतावायरस का 1-8 हफ्ते तक. 

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कोविड-19 से मिला सबक

कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को सिखाया कि टीका बनाने का सबसे सही समय महामारी शुरू होने से पहले होता है. जब कोविड-19 आया तब mRNA टेक्नोलॉजी पहले से तैयार थी, जिसकी वजह से कुछ महीनों में ही वैक्सीन बन गई. हंतावायरस के मामले में भी यही स्थिति है. वैज्ञानिक सालों से इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार फंडिंग और प्राथमिकता न मिलने के कारण प्रगति धीमी रही है.

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दुनिया भर में स्थिति

वर्तमान में कोई भी देश हंतावायरस का स्वीकृत टीका नहीं दे रहा है. कुछ देशों में शोध चल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन और इमरजेंसी उपयोग की मंजूरी अभी दूर है. MV होंडियस वाली घटना ने वैश्विक स्तर पर इस दिशा में ध्यान खींचा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हंतावायरस जैसे जानलेवा वायरस पर गंभीरता से निवेश किया जाए.

मॉडर्ना की यह कोशिश एक अच्छी शुरुआत है. अगर मानव परीक्षण सफल रहे तो mRNA आधारित हंतावायरस वैक्सीन बन सकती है. लेकिन इसमें अभी कई साल लग सकते हैं. 

क्रूज शिप पर क्या हुआ?

एमवी होंडियस क्रूज शिप पर कुल 11 मामले सामने आए हैं. तीन लोगों - एक डच जोड़े और एक जर्मन पर्यटक - की मौत हो चुकी है. शिप पर सवार सभी लोगों को उनके देशों में भेज दिया गया है. उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है. स्पेन, नीदरलैंड, अमेरिका समेत कई देशों में यात्री पहुंच चुके हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ यात्री अर्जेंटीना में शिप पर चढ़ने से पहले ही संक्रमित हो गए थे, क्योंकि वहां यह वायरस पहले से मौजूद है.

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महामारी बनने का खतरा?

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हंतावायरस से महामारी बनना लगभग असंभव है. क्योंकि इंसान से इंसान में फैलाव बहुत कम और सीमित है. WHO, ECDC और अन्य एजेंसियां इसे अच्छी तरह नियंत्रित करने में सक्षम हैं. कोविड-19 पूरी दुनिया में फैल गया था क्योंकि यह हवा में आसानी से घूमता था. हंतावायरस ऐसा नहीं है.

क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों में लक्षण दिखें (बुखार, थकान, सांस लेने में दिक्कत) उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. क्वारंटाइन का समय 6 हफ्ते तक रखा जा रहा है क्योंकि वायरस का इनक्यूबेशन लंबा है. हंतावायरस खतरनाक है, लेकिन इसका फैलाव कोविड-19 जैसा नहीं है. चूहों से बचाव, स्वच्छता और सतर्कता रखने से इसका खतरा बहुत कम किया जा सकता है. WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं. 

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