पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने मई से जुलाई के दौरान लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का आयात तेजी से बढ़ाया. भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता घटाते हुए दूसरे देशों से ज्यादा सप्लाई ली, जिससे उसके पारंपरिक सप्लायर कतर से आई भारी कमी की भरपाई हो सकी. रिपोर्ट के अनुसार मई-जुलाई के दौरान भारत का एलएनजी आयात एक साल पहले के मुकाबले 15.4% बढ़कर 7.08 मिलियन टन पहुंच गया. इससे मार्च-अप्रैल में आई करीब 13% की गिरावट के बाद सुधार दिखा, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के पहले दो महीने थे.
यह सुधार यूएस, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से ज्यादा कार्गो आने की वजह से हुआ. भारत अपनी नैचुरल गैस की करीब आधी जरूरत एलएनजी आयात से पूरी करता है. पहले इन आयातों का करीब 60% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता था, जिसमें कतर और यूएई की बड़ी हिस्सेदारी थी. ईरान और ओमान के बीच यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का अहम मार्ग है और अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से यहां गंभीर रुकावटें देखी गई हैं.
भारत ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, फर्टिलाइजर, इलेक्ट्रिसिटी और सिरेमिक जैसे क्षेत्रों की मांग पूरी करने के लिए सप्लाई सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी. रिपोर्ट के मुताबिक जब ऊंची कीमतों के बीच कई बड़े एलएनजी आयातक देशों ने खरीद कम कर दी, तब भी भारत ने मजबूत खरीदारी जारी रखी.
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US सबसे बड़ा LNG सप्लायर
डेटा एनालिस्ट केप्लर (Kpler) के जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक मई-जुलाई के दौरान यूएस 2.19 मिलियन टन के साथ भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर रहा. इसके बाद नाइजीरिया से 1.31 मिलियन टन, ओमान से 1.22 मिलियन टन और अंगोला से 0.80 मिलियन टन आयात हुआ. यूएस से आयात 252.8% बढ़ा, ओमान से 340.9% की छलांग रही, जबकि नाइजीरिया और अंगोला से आयात क्रमशः 123.8% और 71.3% बढ़ा. ये आंकड़े 2025 के दौरान इन देशों से औसत मासिक आयात के मुकाबले काफी ज्यादा हैं.
कतर और यूएई से सप्लाई घटी
इस दौरान कतर से आयात एक साल पहले के मुकाबले 91.3% गिरकर 0.23 मिलियन टन रह गया. वहीं यूएई से आयात 34.4% घटकर 0.55 मिलियन टन पर आ गया. हालांकि पिछले महीनों की तेज गिरावट के बाद जून और जुलाई में यूएई से शिपमेंट में कुछ सुधार हुआ. होर्मुज की नाकेबंदी के बावजूद यूएई ने समुद्री सुरक्षा आकलन के आधार पर मिले छोटे मौके का इस्तेमाल करके निर्यात जारी रखा. कुछ मामलों में एलएनजी टैंकरों के ट्रांसपोंडर भी बंद किए गए ताकि उनका पता न चल सके. कतर ने भी इसी तरह के तरीके अपनाए, लेकिन कम स्तर पर.
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दोनों निर्यातकों को 17 जून को हुए शुरुआती यूएस-ईरान शांति समझौते के बाद ट्रांजिट में आई आंशिक बहाली का फायदा मिला. हालांकि जुलाई की शुरुआत में यह समझौता टूटने के बाद जहाजों की आवाजाही फिर धीमी पड़ गई. मई से जुलाई के दौरान भारत ने होर्मुज पर दबाव बढ़ने के बीच अपने एलएनजी स्रोतों में बदलाव किया और आयात बढ़ाया. इससे घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिली, जबकि कतर से सप्लाई में बड़ी गिरावट आई और समुद्री रास्ते पर रुकावटें भी बनी रहीं.