प्रशांत महासागर की करीब 6,000 मीटर गहरी तलहटी में वैज्ञानिकों को 11,742 वायरस मिले हैं. इनमें से 11,662 वायरस ऐसे हैं, जिनके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी. चीन की एक रिसर्च टीम ने समुद्र की तलहटी से मिट्टी और मैल के नमूने लेकर उनकी जांच की थी. इसी दौरान इन वायरस का पता चला.
यह इलाका क्लैरियन-क्लिपरटन जोन कहलाता है. यहां निकेल, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसी धातुओं के बड़े भंडार हैं. रिसर्च में पता चला कि यहां मिलने वाले ज्यादातर वायरस पहले से दर्ज वायरस से काफी अलग हैं. वैज्ञानिकों को चिंता है कि समुद्र की गहराई में होने वाले खनन से इन वायरस की दुनिया को नुकसान पहुंच सकता है. यह रिसर्च नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुई है.
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समुद्र की इतनी गहराई में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. यहां भोजन के लिए जरूरी पोषक तत्व भी बहुत कम होते हैं. इसके बावजूद इस जगह पर वायरस और बैक्टीरिया मौजूद हैं. वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि ये वायरस इतने मुश्किल माहौल में कैसे रहते हैं और समुद्र की तलहटी में क्या काम करते हैं. इस खोज से समुद्र की गहराई में मौजूद जीवन के बारे में नई जानकारी मिली है.

11,662 वायरस के बारे में पहली बार चला पता
रिसर्च में कुल 11,742 वायरस मिले. इनमें से 11,662 वायरस ऐसे थे, जिनके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी. यानी इस इलाके में मिले ज्यादातर वायरस विज्ञान के लिए नए हैं. वैज्ञानिकों ने इन वायरस में मौजूद प्रोटीन समूहों की भी जांच की. प्रोटीन वायरस के काम करने के तरीके को समझने में मदद करते हैं. जांच में पता चला कि इन वायरस के प्रोटीन समूहों में से सिर्फ करीब 4 फीसदी का मिलान पुराने डेटा से हुआ. इसका मतलब है कि यहां ऐसे बहुत से वायरस मौजूद हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को अब तक जानकारी नहीं थी.
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ज्यादातर वायरस बैक्टीरिया पर हमला करते हैं
रिसर्च में मिले ज्यादातर वायरस कॉडोविरिसीट्स नाम के समूह से जुड़े हैं. इन वायरस की बनावट में पूंछ जैसी संरचना होती है. ये बैक्टीरिया पर हमला करते हैं और अपना जेनेटिक मटीरियल यानी आनुवंशिक जानकारी उनके अंदर पहुंचाते हैं.
ये वायरस इंसानों को संक्रमित करने वाले वायरस से अलग हैं. रिसर्च में मिले ज्यादातर वायरस बैक्टीरिया को निशाना बनाते हैं. इसलिए इन्हें इंसानों के लिए सीधे खतरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. हालांकि, इन वायरस के बारे में अभी काफी कुछ जानना बाकी है.

समुद्र में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखते हैं
समुद्र की तलहटी में वायरस बैक्टीरिया की संख्या को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. जब वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं, तो बैक्टीरिया के टूटने से जैविक पदार्थ बाहर निकलते हैं. इससे पोषक तत्व दोबारा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो सकते हैं.
ये पोषक तत्व समुद्र में रहने वाले दूसरे छोटे जीवों के लिए भी जरूरी होते हैं. अगर वायरस की संख्या या उनके काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर समुद्र के दूसरे जीवों पर भी पड़ सकता है. इसलिए वैज्ञानिकों के लिए इन वायरस की भूमिका को समझना जरूरी है.
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खनन से बिगड़ सकता है समुद्र का संतुलन
क्लैरियन-क्लिपरटन जोन में निकेल, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसी धातुओं के बड़े भंडार हैं. इन धातुओं का इस्तेमाल बैटरी और दूसरी तकनीकों में होता है. इसी वजह से इस इलाके में समुद्र के नीचे खनन करने में दिलचस्पी बढ़ रही है. लेकिन खनन के दौरान समुद्र की तलहटी से मिट्टी और मैल हटाई जाती है.

इससे वहां रहने वाले छोटे जीवों का माहौल बदल सकता है. इसका असर वायरस और बैक्टीरिया पर भी पड़ सकता है. वैज्ञानिकों को चिंता है कि इस इलाके को पूरी तरह समझने से पहले खनन शुरू होने पर समुद्र के इस अनोखे माहौल को नुकसान पहुंच सकता है.
इस खोज से पता चला है कि समुद्र की गहराई में वायरस की एक बड़ी दुनिया मौजूद है, जिसके बारे में पहले बहुत कम जानकारी थी. ये वायरस समुद्र में पोषक तत्वों के दोबारा इस्तेमाल में मदद करते हैं. इसलिए गहरे समुद्र में खनन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि इससे वहां रहने वाले जीवों पर क्या असर पड़ सकता है.