भगवान शिव का प्रिय श्रावण मास चल रहा है. देश के हर कोने में स्थित भगवान शिव के मंदिरों में भक्तों की भीड़ दिख रही है. हरियाणा के करनाल में श्री सनातन धर्म प्राचीन शिव मंदिर में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. इसे उत्तर भारत के सबसे ऊंचे मंदिरों में गिना जाता है. भगवान शिव के इस मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए सावन में दूर-दूर से भक्त पहुंच रहे हैं.
इस मंदिर का निर्माण 1975-76 में हुआ था. इसकी सबसे खास बात यह है कि 125 फीट ऊंचा यह मंदिर सिर्फ 8 फुट जगह के दायरे में बना हुआ है. भगवान शिव का यह मंदिर अपनी अलग अहमियत रखता है. यहां भगवान भोलेनाथ की अष्टधातु की मूर्ति में तीसरी आंख में हीरा जड़ा हुआ है. तंग गलियों में बने इस मंदिर की चौड़ाई भले ही कम हो, लेकिन इस मंदिर की ऊंचाई 125 फीट है और पूरा शहर इस मंदिर से नजर आता है. 9 मंजिला इस मंदिर की हर मंजिल पर भगवान की मूर्ति स्थापित है.
करनाल के सर्राफा बाजार स्थित श्री सतनाम धर्म प्रचीन शिव मंदिर में इन दिनों लोग सुबह 5 बजे ही भगवान शिव को जल अर्पित करने के मंदिर पहुंच जाते हैं. शिवरात्रि और सावन में इस मंदिर में काफी भीड़ होती है. मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि भगवान भोलेनाथ के इस मंदिर में 40 दिन अगर कोई लगातार आकार माथा टेकता है और अपनी मनोकामना भगवान शंकर को बताता है तो वो जरूर पूरी हो जाती है. बस सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आना होगा.
भगवान शंकर की जो मूर्ति इस मंदिर में लगी हुई है वो अष्ट धातु की बनी हुई. अष्टधातु का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व बताया गया है और यह बहुत पवित्र मानी जाती है. यहां भगवान भोलेनाथ हाथ में त्रिशूल और डमरू के साथ विराजमान हैं. मंदिर में एक शिवलिंग भी है, जहां भक्तजन जल और दूध चढ़ाने पहुंचते हैं.
भगवान शंकर की तीसरी आंख में जड़ा है हीरा
इस मंदिर में स्थापित भगवान शंकर की प्रतिमा की तीसरी आंख में हीरा जड़ा हुआ है. ऐसा बताया जाता है कि यह हीरा सांसद रहे अरविंद शर्मा ने लगवाया था. यहां लोग दूर-दूर से आते हैं और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
रिपोर्ट: कमलदीप