भगवान शिव की भक्ति का सबसे खास महीना सावन चल रहा है. इस पवित्र महीने में सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है. कहते हैं कि सावन सोमवार का व्रत रखने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं. इसलिए इस दिन शिवजी के बहुत सारे भक्त व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा के महादेव की पूजा करते हैं. कल सावन का पहला सोमवार है.
पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 19 मिनट से 5 बजकर 1 मिनट तक.
प्रातः संध्या: सुबह 4 बजकर 40 मिनट से 5 बजकर 44 मिनट तक.
अभिजीत मुहूर्त (दोपहर की पूजा): दोपहर 12:19 बजे से दोपहर 01:10 बजे तक.
शाम की पूजा का मुहूर्त: शाम 07:13 बजे से रात 08:20 बजे तक.
सावन सोमवार का महत्व
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तप किया था. मान्यता है कि उन्होंने स्वयं सावन के सोमवार का व्रत किया था. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाया. तभी से इस व्रत को रखने का चलन बना हुआ है.
कहते हैं कि अविवाहित लड़कियां सावन सोमवार का व्रत रखें तो उन्हें अच्छा और योग्य जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है. वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं. जो भी स्त्री पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करती हैं, उनकी मनोकामना भगवान जरूर सुनते हैं.
पहले सावन सोमवार की पूजन विधि
सावन के पहले सोमवार सुबह जल्दी उठें और स्नान करें. इसके बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें. संभव हो तो हरे, पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनें. फिर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर या किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. शिवलिंग पर पहले शुद्ध जल चढ़ाएं.
इसके बाद कच्चा दूध, गंगाजल, दही, शहद और घी से पंचामृत अभिषेक करें. अंत में फिर से शुद्ध जल अर्पित करें. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, चंदन, अक्षत, सफेद फूल और भस्म अर्पित करें. पूजा के समय "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. आखिर में शिव जी की आरती करें और फल, मेवे या शक्कर का भोग लगाएं.