राजस्थान में छोटी सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है. आजतक पर यह मुद्दा उठने के बाद PMO ने राजस्थान सरकार से रिपोर्ट मांगी. इसके जवाब में राज्य सरकार ने रिपोर्ट भेजी. सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप छोटी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म किया जाएगा.
दरअसल, आजतक ने 31 तारीख को अपनी खास रिपोर्ट में दिखाया था कि कैसे छोटी भर्तियों में इंटरव्यू खत्म न होने से युवाओं को परेशानी हो रही है. मुद्दा उठते ही केंद्र और राज्य सरकार के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ. आखिरकार व्यवस्था को झुकना पड़ा और युवाओं के हित में यह बड़ा फैसला सामने आया.
राजस्थान सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कम स्तर की सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसका मकसद भर्ती को ज्यादा पारदर्शी बनाना है. इससे उम्मीदवारों को भी राहत मिलेगी.
आजतक की पड़ताल में यह भी सामने आया कि राजस्थान के कई आयोग, बोर्ड और प्राधिकरण लंबे समय से खाली पड़े हैं. राजस्थान लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सचिव के पद खाली हैं. दस सदस्यों में सिर्फ पांच सदस्य काम कर रहे हैं. ऐसे में कई भर्तियों का काम प्रभावित हो रहा है. इसके अलावा, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में भी सभी पद भरे नहीं हैं. दूसरी तरफ महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्य नहीं होने से कामकाज लगभग ठप पड़ा है. पहले यहां रोज बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई होती थी.
हजारों मामले अटके
कर्मचारियों के मामलों की सुनवाई करने वाले राजस्थान सिविल सेवा अपील प्राधिकरण में भी लंबे समय से पद खाली पड़े हैं. यहां लगभग दो हजार मामले अटके हुए हैं, जिसकी वजह से राजस्थान हाईकोर्ट को राज्य सरकार को अल्टीमेटम देना पड़ा. जयपुर स्थित लोकायुक्त दफ्तर का हाल भी ऐसा ही है. मार्च से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है, जिससे शिकायतों की जांच का काम पूरी तरह रुक गया है. इसके अलावा खादी निगम, पर्यटन निगम, हाउसिंग बोर्ड और समाज कल्याण बोर्ड जैसी कई संस्थाओं में भी अध्यक्ष और सदस्यों की तैनाती नहीं हो सकी है.
रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के बोर्ड, निगम, आयोग और प्राधिकरण में 100 से ज्यादा पद खाली हैं. इससे सरकारी कामकाज पर असर पड़ रहा है. कई मामलों की सुनवाई रुकी हुई है. लोगों को अपनी शिकायत लेकर भटकना पड़ रहा है.
राजस्थान सरकार ने PMO को भरोसा दिया है कि छोटी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. अब नजर इस बात पर रहेगी कि फैसला कब लागू होता है और खाली पड़े आयोगों व बोर्डों में नियुक्तियां कब तक होती हैं.