कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले में घिरे कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. घोटाले के आरोपों और विपक्षी बीजेपी के जुबानी हमलों के बीच उन्होंने कहा कि वो अपना त्यागपत्र सौंप रहे हैं.
इस्तीफे की घोषणा के दौरान बी. नागेंद्र ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने रोते हुए कहा, 'क्या वाल्मीकि निगम के किसी लेनदेन में कहीं भी मेरे दस्तखत है? मुझे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि मैं एक दलित वर्ग से आता हूं.'
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मेरे खिलाफ रोजाना 1000 झूठ फैलाए जा रहे हैं. नागेंद्र ने बैंकों पर सवाल खड़े करते हुए कहा, 'इस पूरे मामले में बैंक शामिल थे. अगर बैंकों की संलिप्तता है, तो क्या इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्री जिम्मेदार नहीं हैं? कर्नाटक की जनता सब देख रही है.'
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मई 2024 में निगम के लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखरन की आत्महत्या के बाद 89.63 करोड़ रुपये के अनधिकृत ट्रांजैक्शन का मामला सामने आया था. उस समय जनजातीय कल्याण मंत्री रहे नागेंद्र ने जून 2024 में पद छोड़ दिया था.
हालांकि, 3 अगस्त 2026 को उन्हें योजना और सांख्यिकी विभाग देकर दोबारा कैबिनेट में शामिल किया गया था. इसके बाद बीजेपी और जेडी(एस) ने उनका इस्तीफा मांगते हुए सदन से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दोनों विपक्षी दलों ने 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पदयात्रा निकालने की भी घोषणा की.
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अब नागेंद्र ने हालात को समझते हुए खुद ही इस्ताफा देने का ऐलान कर दिया. नागेंद्र ने बताया कि वो मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात करेंगे और उनके साथ चर्चा करने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना इस्तीफा सौंपेंगे.