आजकल बच्चों का रात में देर तक जागना, बार-बार नींद खुलना या सुबह स्कूल के लिए उठने में परेशानी होना अब कई परिवारों की रोजाना की परेशानी बनती जा रही है. जिस तरह बच्चों का मोबाइल देखना एक बड़ी समस्या बन रहा है, उसी तरह बड़ों की तरह ही बच्चों का भी लेट नाइट तक जगना एक परेशानी बन चुका है. कई बार माता-पिता इसका कारण सिर्फ मोबाइल या बच्चे की जिद को मान लेते हैं, लेकिन असल वजह शाम की छोटी-छोटी आदतें भी हो सकती हैं.
गुरुग्राम स्थित पारस हेल्थ के हेड ऑफ़ पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी डॉ. (मेजर) मनीष मन्नन ने बच्चों की नींद से जुड़ी ऐसी ही आदतों पर ध्यान देने की सलाह दी है.
बच्चों के लिए कितनी नींद जरूरी?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (AASM) ने लगभग 864 पब्लिश रिसर्च आर्टिकल्स की समीक्षा के बाद बच्चों की नींद को लेकर यह अहम निष्कर्ष निकाला है. इस रिसर्च के अनुसार, 6 से 12 साल के बच्चों को अपने बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए रोजाना 9 से 12 घंटे की नींद लेनी चाहिए.
वहीं 13 से 18 साल के किशोरों के लिए 8 से 10 घंटे सोना बेहद जरूरी है. साइंटिफिक एविडेंस से साबित होता है कि पर्याप्त नींद बच्चों के दिमाग को दुरुस्त रखती है, जिससे उनके ध्यान फोकस, व्यवहार को बैलेंस रखने, नई चीजें सीखने और याददाश्त को मजबूत बनाने में सीधा फायदा मिलता है.
ये 5 आदतें बदलें माता-पिता
सोने से ठीक पहले स्क्रीन न दें
मोबाइल, टैबलेट, गेमिंग और टीवी बच्चे के दिमाग को एक्टिव रखते हैं. सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले स्क्रीन बंद करने की कोशिश करें और डिवाइस को बेडरूम से बाहर रखें.
वीकेंड पर टाइमिंग पूरी तरह न बदलें
अगर बच्चा स्कूल के दिनों में रात 10 बजे सोता है और छुट्टी में आधी रात तक जागता है, तो उसकी बॉडी क्लॉक बिगड़ सकती है. सप्ताहांत में भी सोने और उठने का समय लगभग एक जैसा रखें.
बेड को पढ़ाई और गेमिंग की जगह न बनाएं
बिस्तर पर पढ़ाई, वीडियो देखना या गेम खेलने से बच्चे के दिमाग में बेड का संबंध नींद के बजाय एक्टिविटी से बनने लगता है. बेडरूम को शांत और कम रोशनी वाला रखें.
बच्चे को थकाने के लिए पूरा दिन न भरें
ट्यूशन, होमवर्क, खेल और स्क्रीन से भरी शाम का मतलब यह नहीं कि बच्चा अच्छी नींद लेगा. सोने से पहले थोड़ा शांत समय दें. किताब पढ़ना या बच्चे से आराम से बात करना बेहतर विकल्प हो सकता है.
रात में कैफीन और भारी स्नैक पर नजर रखें
कोला, ज्यादा कैफीन और तेज चाय खासकर किशोरों की नींद में बाधा डाल सकती है. इसलिए रात के खाने और स्नैक्स का समय भी सोने की दिनचर्या के हिसाब से रखें.
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बच्चा लगातार खर्राटे लेता है, नींद में सांस रुकती दिखती है, बार-बार जागता है, बहुत बेचैन होकर सोता है, सुबह सिरदर्द रहता है या दिनभर अत्यधिक नींद आती है, तो इसे सिर्फ एक नॉर्मल आदत मानकर नजरअंदाज न करें. ऐसे लक्षणों में चाइल्ड एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी हो सकता है.
डॉ. मन्नन के अनुसार अच्छी नींद की तैयारी बिस्तर पर जाने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले शुरू होती है. बच्चों के लिए बहुत सख्त नियम बनाने के बजाय एक तय और शांत बेडटाइम रूटीन बनाना ज्यादा मददगार हो सकता है.
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी बच्चे में लगातार नींद की समस्या, सांस से जुड़ी परेशानी या दिन में अत्यधिक नींद हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें.