बारिश के मौसम में पुराने हो चुके घर की छत का टपकना सबसे बड़ी प्रॉब्लम बन जाती है.छत टपकने के साथ ही बारिश का पानी रिस कर दीवार तक भी पहुंच जाता है. इससे पूरे घर में छत और दीवार में सीलन आ जाती है. इस बड़ी समस्या से छुटकारा पाने का एक ही हल है. वो है छत की वाटर प्रूफिंग. छत की वाटर प्रूफिंग भी कई तरीके से होती है. कुछ की लागत ज्यादा होती है, तो कुछ सस्ते में निपट जाते हैं.
वैसे छत की वाटर प्रूफिंग का नॉर्मल खर्च 40 से 180 रुपये प्रति वर्ग फुट तक आता है. यदि आपकी छत का आकार 1000 वर्ग फुट है, तो कुल लागत लगभग 40,000 से 1,80,000 के बीच हो सकती है. खर्चा वाटर प्रूफिंग में इस्तेमाल की जाने वाली मटेरियल की क्वालिटी और प्रोसेस पर डिपेंड करता है.
छतों की सबसे पॉपुलर वाटर प्रूफिंग का प्रोसेस लिक्विड पॉलीमर कोटिंग है. इसे कराने में 40 से 70 रुपये प्रति स्क्वायर फुट का खर्चा होता है. इसमें क्रैक फिलर, फाइबर मैश और वाटरप्रूफ लिक्विड कोटिंग के 3 कोट लगाए जाते हैं. यह छतों में आने वाली हल्की-फुल्की दरार और थोड़ी बहुत सीलन की समस्या से निपटने के लिए कारगर उपाय है.
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दूसरा है मेम्ब्रेन वाटरप्रूफिंग. यह थोड़ा खर्चीला होता है. छत में अगर ज्यादा क्रैक्स और सीलन है, तो यह सटीक काम करता है. इसे करवाने में 100 – 180 रुपये प्रति स्क्वायर फुट खर्च होता है. इसमें प्लास्टिक या बिटुमिन की बनी विशेष शीट को गैस टॉर्च से गर्म करके छत पर चिपकाया जाता है. यह काफी टिकाऊ और स्थायी होता है. इस तरह की वाटर प्रूफिंग भारी बारिश वाले इलाके में सबसे प्रभावी मानी जाती है.
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वाटर प्रूफिंग का एक और तरीका है सीमेंटेशियस वाटरप्रूफिंग. यह सबसे सस्ता और पॉपुलर प्रोसेस है. इसमें छत पर व्हाइट सीमेंट और फेविकॉल या फिर सीमेंट और पॉलीमर के घोल को ब्रश से छत पर एक कोट कर देने से यह छत को वाटरप्रूफ बना देता है. यह सबसे बजट फ्रेंडली और किफायती तरीका है. इसमें 30 से 50 रुपये प्रति स्क्वायर फुट का खर्चा आता है.