पंजाब में 454 फार्मेसी अफसरों की भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं को झटका लगा है. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है. परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर इसे रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अगली सुनवाई तक चयन प्रक्रिया रोक दी. इस फैसले के बाद बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने भी पंजाब सरकार पर निशाना साधा है.
बता दें कि बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने 19 जुलाई को फार्मेसी ऑफिसर की परीक्षा कराई थी. परीक्षा के बाद इसमें नकल के आरोप लगे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया. कार्रवाई के बावजूद अभ्यर्थियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ. छात्र केशव कांबोज ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर पूरी परीक्षा को ही रद्द करने की मांग कर की, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्टे का आदेश जारी किया.
अब इस भर्ती से जुड़े अगले कदम फिलहाल नहीं उठाए जा सकेंगे. मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी.
बीजेपी और अकाली दल ने सरकार को घेरा
पंजाब में फार्मेसी अफसरों की भर्ती पर हाई कोर्ट की रोक के बाद सियासत भी तेज हो गई है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट कर पंजाब सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि आम आदमी पार्टी अब तक पेपर लीक से इनकार करती रही है, तो क्या हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद भी वह अपने रुख पर कायम रहेगी?
उन्होंने ट्वीट में उन छात्र संगठनों पर भी सवाल उठाए, जो दूसरे राज्यों में छात्र मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं. मालवीय ने पूछा कि पंजाब में फार्मेसी अफसर भर्ती को लेकर चल रहे विवाद पर ये संगठन चुप क्यों हैं.
वहीं शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने भी सरकार को घेरा. उन्होंने हाई कोर्ट की रोक का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामूली नकल का मामला नहीं, बल्कि पेपर लीक का मामला है. उन्होंने सरकार से इस मामले में कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे.