DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है. पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के जरिए सही मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार से वंचित किया जा रहा है. पार्टी ने इस मामले में ज्ञानेश कुमार की भूमिका की जांच कराने की मांग भी उठाई है.
DMK ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए. इसके साथ ही DMK ने SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन किया है. पार्टी ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज है. विपक्षी दल चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.
इसी बीच DMK के सासंद अंदिमुथु राजा ने SIR को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में सत्ता में है या सरकार में उसकी भागीदारी है. ऐसे में पार्टी को साफ करना चाहिए कि इन राज्यों में SIR के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं हुई है या नहीं.
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बयान में कहा गया कि CJP का रुख चुनाव आयोग और SIR की प्रक्रिया के खिलाफ है, लेकिन कांग्रेस का रुख अलग-अलग राज्यों में अलग दिखाई देता है. इसे दोहरा मापदंड बताते हुए DMK ने सवाल किया कि कांग्रेस इन तीनों राज्यों को लेकर चुप्पी क्यों साधे हुए है.
DMK की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सीमावर्ती राज्यों में पाकिस्तान और बांग्लादेश से अवैध रूप से लोगों के आने का मुद्दा अलग है, इसलिए वहां की आबादी की संख्या और हालात की तुलना दूसरे राज्यों से नहीं की जा सकती.
SIR पर सियासी टकराव बढ़ा
DMK के प्रस्ताव और छात्र प्रदर्शनों के समर्थन से साफ है कि SIR अब सिर्फ मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा नहीं रह गया है. यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता, वोट देने के अधिकार और राजनीतिक दलों के रुख को लेकर बड़े विवाद का रूप ले चुका है.