भारत में राम मंदिर निर्माण और धारा 370 हटाने जैसे ऐतिहासिक फैसलों के बाद भी शांति बनी रही, लेकिन एफसीआरए संशोधन बिल के आते ही देश विरोधी ताकतें सक्रिय हो गईं. आंकड़ों के अनुसार एफसीआरए के जरिए देश में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी पैसा आता था. इस धन का इस्तेमाल देश में धार्मिक धर्मांतरण, दंगे और हिंसक विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता था. विदेशी ताकतें नहीं चाहतीं कि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बने और विश्व गुरु का दर्जा हासिल करे. इसलिए वे केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं का विरोध कर रही हैं.