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द्वारका एक्सप्रेसवे बना प्रॉपर्टी का हॉटस्पॉट, 5 साल में 135% बढ़े दाम

दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट बाजार में द्वारका एक्सप्रेसवे तेजी से प्रीमियम हाउसिंग के बड़े ठिकाने के तौर पर उभर रहा है. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और लग्जरी घरों की बढ़ती मांग ने इस इलाके को निवेशकों और हाई-नेट-वर्थ खरीदारों के लिए खासा आकर्षक बना दिया.

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द्वारका एक्सप्रेसवे पर घरों की कीमतों में बंपर उछाल
द्वारका एक्सप्रेसवे पर घरों की कीमतों में बंपर उछाल

ANAROCK की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2026 की पहली छमाही के बीच द्वारका एक्सप्रेसवे माइक्रो-मार्केट में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतें 135 फीसदी बढ़ गई हैं. इन 5 साल में 6,032 प्रति वर्ग फीट से बढ़कर औसत कीमत 14,180 प्रति वर्ग फीट पहुंच गई है.

दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट बाजार में द्वारका एक्सप्रेसवे तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह बेहतर कनेक्टिविटी, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और लगातार बढ़ती प्रीमियम हाउसिंग की मांग है. ANAROCK की रिपोर्ट में इस माइक्रो-मार्केट की तेजी की पूरी तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब पांच साल में यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में 135% की बढ़ोतरी हुई है.

द्वारका एक्सप्रेसवे 29 किलोमीटर लंबा सिग्नल-फ्री कॉरिडोर है, जो दिल्ली के महिपालपुर को गुरुग्राम के खेड़की दौला से जोड़ता है. ये UER-II, NH-48 और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी कनेक्टिविटी देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, IGI एयरपोर्ट तक करीब 8 से 15 मिनट में पहुंच की कनेक्टिविटी इस कॉरिडोर की बड़ी ताकत है. इसके अलावा साइबर सिटी और उद्योग विहार जैसे प्रमुख रोजगार केंद्र भी करीब 20 मिनट की दूरी पर बताए गए हैं. यही कनेक्टिविटी इसे वरिष्ठ प्रोफेशनल्स, CXOs और NRI खरीदारों के लिए आकर्षक बना रही है. आने वाले समय में गुरुग्राम की ग्लोबल सिटी भी इस पूरे इलाके की डिमांड को और बढ़ा सकती है.

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इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली इलाके की तस्वीर

द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. ANAROCK की रिपोर्ट के मुताबिक NCR में इस कॉरिडोर से जुड़े और आसपास के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में 2.20 लाख करोड़ से ज्यादा का इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल शामिल है. इसमें UER-II, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी, मेट्रो प्रोजेक्ट्स, यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर और गुरुग्राम की प्रस्तावित 1,000 एकड़ की ग्लोबल सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. रिपोर्ट में ग्लोबल सिटी की अनुमानित परियोजना लागत ₹70,000 करोड़ बताई गई है.

6,032 से 14,180 प्रति वर्ग फीट पहुंचे दाम

द्वारका एक्सप्रेसवे की रियल एस्टेट ग्रोथ का सबसे बड़ा आंकड़ा इसकी कीमतों में हुई बढ़ोतरी है. ANAROCK के मुताबिक, 2021 में यहां रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की औसत कीमत ₹6,032 प्रति वर्ग फीट थी. H1 2026 तक यह बढ़कर 14,180 प्रति वर्ग फीट हो गई यानी करीब 5 साल में कीमतों में 135% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिपोर्ट के मुताबिक H1 2026 में द्वारका एक्सप्रेसवे की औसत कीमत गुरुग्राम के 13,350 प्रति वर्ग फीट के औसत से भी ऊपर थी. 2027 तक द्वारका एक्सप्रेसवे पर कीमत 14,800 प्रति वर्ग फीट तक पहुंचने का अनुमान है.

अब प्रीमियम घरों की बढ़ रही मांग

इस कॉरिडोर में सिर्फ कीमतें ही नहीं बढ़ रही हैं, बल्कि खरीदारों की पसंद भी बदल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से H1 2026 के बीच लॉन्च हुई कुल 38,680 यूनिट्स में 3-BHK की हिस्सेदारी 39% रही. वहीं 4-BHK और उससे बड़े घरों की हिस्सेदारी 28% और 2-BHK की हिस्सेदारी 27% रही. बजट के लिहाज से ₹2.5 करोड़ से ऊपर का सेगमेंट प्रमुख बनकर उभरा है. इससे संकेत मिलता है कि द्वारका एक्सप्रेसवे का बाजार तेजी से प्रीमियम और हाई-नेट-वर्थ खरीदारों की तरफ बढ़ रहा है.

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डिमांड मजबूत, लेकिन हर सेगमेंट में नहीं

तेजी के बावजूद रिपोर्ट बाजार के कुछ जोखिमों की तरफ भी इशारा करती है. H1 2026 तक यहां कुल 10,770 यूनिट्स की उपलब्ध इन्वेंट्री थी और मौजूदा बिक्री रफ्तार के आधार पर इसे बिकने में करीब 18 महीने लगने का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 95% उपलब्ध इन्वेंट्री अंडर-कंस्ट्रक्शन है, जबकि सिर्फ 5% रेडी-टू-मूव-इन है. हालांकि ₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़ के मिड-सेगमेंट में संभावित ओवरसप्लाई का जोखिम भी बताया गया है.

आगे भी तेजी की उम्मीद

ANAROCK की रिपोर्ट के मुताबिक UER-II का पूरा होना, प्रस्तावित गुरुग्राम मेट्रो कनेक्टिविटी और ग्लोबल सिटी का विकास आने वाले समय में इस कॉरिडोर की कनेक्टिविटी और रोजगार क्षमता को और मजबूत कर सकता है. साथ ही बड़े घरों और बेहतर सुविधाओं वाली कम्युनिटीज की बढ़ती मांग भी बाजार को सपोर्ट कर रही है. यानी द्वारका एक्सप्रेसवे की कहानी सिर्फ बढ़ती कीमतों की नहीं है. कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़े डेवलपर्स की मौजूदगी और प्रीमियम घरों की मांग ने मिलकर इसे NCR के सबसे तेजी से उभरते रियल एस्टेट कॉरिडोर में शामिल कर दिया है. हालांकि कीमतों में तेज उछाल के बाद affordability और कुछ सेगमेंट में oversupply जैसे जोखिमों पर भी नजर रखना जरूरी होगा.

यह भी पढ़ें: नोएडा बना देश का नंबर-1 रियल एस्टेट मार्केट, 7 सालों में 111% तक बढ़ीं घरों की कीमतें

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