कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच शनिवार (8 अगस्त) को महिला आरक्षण को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिली. दोनों के बीच यह बहस महिला आरक्षण विधेयक को प्रस्तावित परिसीमन से जोड़ने को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच हुई.
बहस की शुरुआत तब हुई जब रिजिजू ने महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर राहुल गांधी के एक वीडियो पर टिप्पणी करते हुए उनसे महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने को कहा. इसके जवाब में राहुल गांधी ने सवाल किया कि महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों है.
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से लगभग ठप है. इसी बीच रिजिजू पिछले एक हफ्ते में राहुल गांधी से कई बार संपर्क कर चुके हैं. महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जबकि NDA के पास अपने दम पर इतने सांसद नहीं हैं.
किरेन रिजिजू और राहुल गांधी में तीखी बहस
रिजिजू ने शनिवार को एक बार फिर राहुल गांधी से महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की अपील की. उन्होंने राहुल गांधी का महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी पर बोलते हुए एक वीडियो साझा किया और कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी के रुख में पॉजिटिव बदलाव दिखाई दे रहा है. उन्होंने कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की अपील की.
इसके करीब दो घंटे बाद राहुल गांधी ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही कांग्रेस के पूरे समर्थन के साथ सर्वसम्मति से पारित हो चुका है. राहुल गांधी ने सवाल किया कि तीन साल बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया और अब इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है. उन्होंने केंद्र से 2023 के कानून को बिना किसी शर्त के लागू करने की मांग की.
महिला आरक्षण और परिसीमन
महिला आरक्षण विधेयक यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था. इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है. हालांकि, 2023 के कानून में इसके लागू होने को भविष्य की जनगणना से जोड़ा गया था. अब सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सके.
वहीं, प्रस्तावित परिसीमन में लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है. इनमें 33 प्रतिशत यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. विपक्ष का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर होने वाला परिसीमन उत्तर भारत को दक्षिणी राज्यों की तुलना में अधिक फायदा पहुंचा सकता है.