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डेटा सेंटर से 20 लाख नौकरियों तक, नारा लोकेश ने बताया आंध्र सरकार का एजेंडा

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026' में बोलते हुए, आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि युवा पीढ़ी, खासकर तेज़ी से बदलाव की मांग कर रही है और सरकार अपने कार्यकाल के दौरान ठोस नतीजे दिखाना चाहती है.

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026 में आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश (Photo-ITG)
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026 में आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश (Photo-ITG)

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026' में आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि सरकार तेजी से विशाल डेटा सेंटर इकोसिस्टम तैयार कर रही है, उन्होंने जोर देकर कहा कि 5 साल के कार्यकाल में नतीजे देना ही प्राथमिकता है और तुरंत बदलाव चाहने वाले युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कार्य की गति ही सरकार की मुख्य पहचान होगी.

लोकेश ने कहा कि सरकार की यह जल्दबाजी Gen Z की अपेक्षाओं से भी प्रेरित है, जो कल ही बदलाव देखना चाहते हैं और तेजी से दृश्यमान परिणामों की मांग कर रहे हैं.

लोकेश ने कहा कि भारत के युवाओं के बीच एक नया आंदोलन उभर रहा है, जो पारंपरिक पहचानों के बजाय मौजूदा व्यवस्था को बदलने की इच्छा से संचालित है, उन्होंने कहा, हम भारत में एक नया आंदोलन देख रहे हैं जिसका जाति, धर्म या क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है, इसका संबंध जनसांख्यिकी से है, युवाओं का एक ऐसा समूह जो मानता है कि व्यवस्था को बदलने की जरूरत है.

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उन्होंने कहा कि सरकारों को भी अपनी कमियों को स्वीकार करने की जरूरत है, ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है. हमारी सरकार में भी, हमें लगता है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हम बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. लोकेश के लिए, भारत की युवा आबादी के लिए रोजगार ही केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है, उन्होंने कहा कि समस्याओं की पहचान करने के बाद समाधान खोजने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए.

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उन्होंने आगे कहा, भारत का युवा सिर्फ नौकरियां चाहता है, अधिक रोजगार पैदा करना, यही एकमात्र एजेंडा है, जिसके साथ मेरी सरकार काम कर रही है, वहीं से 20 लाख नौकरियां पैदा करने का विचार आया.

SIR विवाद पर लोकेश ने कांग्रेस पर साधा निशाना

लोकेश ने विपक्ष के उन आरोपों पर सवाल उठाए जिनमें चुनावी हेरफेर और SIR को चुनावी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा था. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी संगठनात्मक तैयारियों की भी जांच करनी चाहिए. उन्होंने कहा, "आप केरल, कर्नाटक, तेलंगाना में चुनाव जीते, तो वहां एसआईआर (SIR) की कोई भूमिका नहीं थी? अगर आप हार जाते हैं, तो एसआईआर की भूमिका आ जाती है? वोटों पर नजर रखने के लिए आपका संगठन कहां है? वोट कहां जोड़े जा रहे हैं? क्या आपने कोई होमवर्क किया है, आपका बूथ-स्तरीय संगठन कहां है, इसकी अनुपस्थिति में, आप चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं.

टीडीपी (TDP) नेता ने आगे उन दावों पर सवाल उठाया कि चुनावी प्रणाली में अपने सहयोगी दल, भाजपा (BJP) के पक्ष में हेरफेर किया गया था, उन्होंने पूछा, "यदि उन्होंने प्रणाली में हेरफेर किया और इसे सेट किया, तो वे केरल और तेलंगाना में क्यों हार गए? आरोप लगाना राजनीतिक सुविधा है, लेकिन क्या आपके पास यह सुनिश्चित करने के लिए ज़मीन पर कोई संस्थागत ढांचा है कि मतदान का मैपिंग किया जाए.

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चुनाव आयोग के एसआईआर अभ्यास पर लोकेश ने कहा कि राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे चिंताएं उठाने के साथ-साथ प्रक्रिया में सुधार के सुझाव भी दें, उन्होंने बताया कि टीडीपी ने विपक्ष में रहते हुए और 2024 में सत्ता में लौटने के बाद भी एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा था, उन्होंने कहा, "वास्तव में, लगभग एक साल पहले ही, हमने कई स्पष्टीकरण मांगे थे क्योंकि हम खुद भी अपनी एसआईआर प्रक्रिया से गुजरे थे."

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लोकेश ने कहा कि किसी भी अन्य प्रणाली की तरह, चुनावी प्रणाली में भी सुधार के गुंजाइश है, किसी भी प्रणाली की तरह इसमें भी सुधार के क्षेत्र हैं, लेकिन क्या इसे बेहतर बनाने और जिन मुद्दों के समाधान की आवश्यकता है उन्हें सुलझाने की मंशा मौजूद है.

चंद्रबाबू नायडू की 'अधिक बच्चे पैदा करने' की अपील पर लोकेश

अपने पिता और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की बड़े परिवार रखने की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए, लोकेश ने भारत के बदलते जनसांख्यिकीय प्रोफाइल की ओर ध्यान आकर्षित किया और जनसंख्या प्रबंधन को एक प्रमुख दीर्घकालिक चुनौती बताया. उन्होंने कहा, जनसांख्यिकीय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है. जापान और सिंगापुर जैसे देश पहले से ही इसका सामना कर रहे हैं.

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टीडीपी नेता ने भारत को एक ही जनसांख्यिकीय इकाई के रूप में देखने के खिलाफ चेतावनी देते हुए, उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच और दक्षिण के भीतर भी राज्यों के बीच के अंतर को रेखांकित किया, उन्होंने कहा, "भारत को एक भारत के रूप में मत देखिए, उत्तर भारत रिप्लेसमेंट रेट के मामले में एक निश्चित गति से आगे बढ़ रहा है, दक्षिण भारत एक अलग स्थिति में है, दक्षिण में भी, राज्य अलग-अलग स्तरों पर हैं.

उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश की रिप्लेसमेंट दर 1.5 है, जो कि 2.1 के मानक रिप्लेसमेंट स्तर से नीचे है, और कहा कि चंद्रबाबू नायडू कई वर्षों से इस मुद्दे को उठा रहे हैं.

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