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'बॉर्डर पर प्रॉब्लम है... बहुत सीरियसली लेना चाहिए', अरुणाचल में चीन की हरकतों पर रिजिजू का बड़ा बयान

केंद्रीय मंत्री और अरुणाचल प्रदेश के सांसद किरेन रिजिजू ने कहा है कि भारत-चीन सीमा पर प्रॉब्लम तो है. हालांकि उन्होंने चीनी सैनिकों की ओर से किसी किस्म की घुसपैठ की खबरों को साफ खारिज किया. लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर चाइनीज आर्मी की एक्टिविटी बढ़ी है, इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है.

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अरुणाचल प्रदेश में तवांग और बुम ला दर्रे की तस्वीर. तवांग से चीन की सीमा शुरू होती है. (Photo: getty image)
अरुणाचल प्रदेश में तवांग और बुम ला दर्रे की तस्वीर. तवांग से चीन की सीमा शुरू होती है. (Photo: getty image)

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने माना है कि अरुणचाल प्रदेश में भारत-चीन बॉर्डर पर जरूर कुछ प्रॉब्लम है. उन्होंने कहा है कि हमारे अरुणाचल प्रदेश के कुछ गांवों के लोग बॉर्डर प्रॉब्लम को लेकर जो चिंताएं जाहिर कर रहे हैं वो सही है. लेकिन इसकी वजह यह है कि वहां पर बॉर्डर का सही तरीके से निर्धारण नहीं हुआ है. हालांकि उन्होंने उन खबरों को खारिज कर दिया कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर तक घुसपैठ की है. 

बीजेपी नेता किरेन रिजिजू अरुणाचल पश्चिम लोकसभा सीट से सांसद हैं. अरुणाचल पश्चिम सीट में तवांग, पश्चिम कामेंग, पूर्वी कामेंग, ऊपरी सुबनसिरी समेत कई जिले शामिल हैं. इनमें से तवांग और ऊपरी सुबनसिरी जैसे इलाके भारत-चीन सीमा (LAC) से सटे हुए हैं. 

किरेन रिजिजू ने एक न्यूज एजेंसी में भारत-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद पर विस्तार से बात की है. 

उन्होंने कहा, "अगर कोई कहता है कि चीन 60 किलोमीटर अंदर घुस गया तो ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए, ये गलत है, इससे सेना का मनोबल गिरता है."

'बॉर्डर में प्रॉब्लम है'

इसके बाद उन्होंने भारत-चीन बॉर्डर मुद्दे को समझाया. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "भारत और चीन के बीच में अरुणाचल प्रदेश में बहुत लंबी सीमा है, और इस सीमा को रेखांकित नहीं किया गया है, वहां सीमा का बॉर्डर पिलर नहीं है, जमीन पर बॉर्डर को डिफाइन नहीं किया गया है. लेकिन ये अभी का मुद्दा नहीं है."

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उन्होंने कहा कि जब तिब्बत अलग राष्ट्र था तब भी भारत और तिब्बत के बीच में सीमा का परिसीमन नहीं हुआ था.

इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बॉर्डर में प्रॉब्लम है, हमारे अरुणाचल के गांव के कुछ लोगों ने बॉर्डर प्रॉब्लम को लेकर जो कुछ चिंताएं जाहिर की है वो सही है, क्योंकि वहां बॉर्डर को रेखांकित नहीं किया गया है."

'चीन-भारत के बीच टेंशन होता रहता है'

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के भूगोल को समझाते हुए कहा कि जो टफ टैरेन है, ऊंचाई वाले जगह हैं वहां गांव नहीं होता है, गांव तो नीचे होता है, घाटी में गांव होता है, हमारे अरुणाचल के लोग ऊपर में पारंपरिक रूप से कभी पशुओं को चराने के लिए या फिर शिकार के लिए जाते थे, या व्यापार के लिए अप डाउन करते थे. उतनी ऊंचाई में कोई खेती-बारी भी खास नहीं होता है. बॉर्डर का सीमांकन नहीं होने की वजह से चीन और भारत के बीच टेंशन होते रहता है. 

समस्या क्या है रिजिजू ने बताया

भारत-चीन के विवाद को समझाते हुए केंद्रीय मंत्री ने माना कि चीन ने वहां पहले रास्ता वगैरह बनाना शुरू किया. उन्होंने हाईवे बनाया, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया. और उस समय भारत की सरकार ने फैसला किया था कि भारत यहां रास्ता नहीं बनाएगा, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप नहीं करेगा. उन्होंने कहा, "कांग्रेस के समय में रक्षा मंत्री एंटनी साहब ने संसद में ये बयान दिया कि भारत सरकार की पॉलिसी है कि अरुणाचल प्रदेश में बॉर्डर साइड में रास्ता नहीं बनाना है. लेकिन चीन बनाते आ रहा है."

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उन्होंने कहा कि हमने 2014 के बाद वहां रास्ता वगैरह बनाना शुरू किया है. मोदी जी ने उस नीति को बदल दिया. 

भारत और चीन की सीमा (Photo: getty image)

उन्होंने कहा कि जब हमारा रास्ता नहीं बना, चीन ने रास्ता बना लिया तो ऊपरी जगहों में चीन की सेना ने कुछ कब्जा किया. 

किरेन रिजिजू ने कहा, "अपर एरिया में चाइनीज आर्मी ने पहले कब्जा किया और वहां बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया, उसके जवाब में हमलोग भी वहां बना रहे हैं, तो ऐसा नहीं है कि वो आकर हमारा गांव कब्जा कर लिया, कुछ जमीन पर उन्होंने डोरे डाला हुआ है, क्योंकि डिमार्केशन नहीं है. हमारे लोगों का मानना है कि हमारी जमीन आगे तक है, और उस तरफ यानी कि चाइनीज साइड जो लोग रहते हैं तिब्बतियन और लोकल उनका मानना है कि उनका जमीन यहां अंदर तक है."

उन्होंने आगे कहा, "जिस जगह लोंग जू (Longju) से आगे एक नदी का मिलन होता है, वहां चाइनीज PLA का कुछ स्ट्रक्चर है, कुछ बिल्डिंग वहां बना है, उस जमीन पर 1959 में कब्जा किया गया है, हमारे असम राइफल्स के कुछ जवान शहीद हुए थे. अभी हमारा जो बॉर्डर पॉइंट है वहां हमारा पोस्ट है, वहां 1962 से आना-जाना बंद है. लेकिन जो टॉप रिज है, वहां जरूर चाइनीज आर्मी की एक्टिविटी बढ़ गई है, उसी को लेकर हमारे गांव के लोगों ने चिंता जाहिर की है, वो ठीक है, इसको बहुत सीरियसली लेना चाहिए."

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भारत-चीन का सीमा विवाद

अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत-चीन विवाद मूल रूप से सीमा की वैधता और संप्रभुता का विवाद है. भारत पूरे अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि चीन लगभग पूरे राज्य पर दावा करता है और इसे ‘जंगनान’ (Zangnan) या ‘दक्षिणी तिब्बत’ कहता है. भारत चीन के इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है. 

अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच सीमा करीब 1,126 किलोमीटर लंबी है. यह सीमा अरुणाचल के पश्चिम में भूटान के पास तवांग क्षेत्र से शुरू होकर पूर्व में म्यांमार की सीमा के पास तक जाती है. 

पूरी भारत-चीन सीमा करीब 3,488 किलोमीटर लंबी है और अरुणाचल वाला हिस्सा इसका पूर्वी सेक्टर है. 

मैकमोहन लाइन से शुरू हुआ विवाद

भारत चीन सीमा विवाद की जड़ 1914 की मैकमोहन लाइन है. 

1914 में ब्रिटिश भारत तिब्बत और चीन के प्रतिनिधियों के बीच शिमला सम्मेलन हुआ था. वहां ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच सीमा रेखा तय की गई, जिसे मैकमोहन लाइन कहा गया. भारत इसी रेखा को अरुणाचल की अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है. भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक पूर्वी सेक्टर में सीमा का निर्धारण मैकमोहन लाइन के आधार पर हुआ था. 

चीन इस सीमा को मान्यता नहीं देता. उसका तर्क है कि 1914 में तिब्बत को स्वतंत्र रूप से ऐसा समझौता करने का अधिकार नहीं था.  इसलिए चीन मैकमोहन लाइन को अवैध मानता है. बता दें कि चीन ने तिब्बत पर सैन्य कब्जा 1950 में शुरू किया और औपचारिक रूप से 1951 में इसे अपने नियंत्रण में ले लिया. 

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मैकमोहन रेखा और LAC एक ही चीज नहीं है

LAC यानी Line of Actual Control वह वास्तविक नियंत्रण रेखा है, जहां तक दोनों देशों की सेनाएं जमीन पर नियंत्रण रखती हैं. दोनों देशों के बीच पूरी सीमा का अंतिम और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य सीमांकन अभी नहीं हुआ है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी यह बात कही है.

यही वजह है कि कई जगह दोनों देशों की सेनाएं यह मानती हैं कि LAC उनकी अपनी धारणा के मुताबिक अलग जगह है. इसी का नतीजा है पेट्रोलिंग के दौरान कई बार दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे से टकरा जाती है. इसी दौरान झड़पें भी होती है. 

ताकसिंग का ताजा विवाद इसी बड़ी कहानी का हिस्सा है

ताकसिंग अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले का दुर्गम सीमावर्ती इलाका है. यह भारत-चीन LAC के बेहद करीब है.

मवेशियों के चारागाह चीन के कब्जे में 

द अरुणाचल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 के आखिर में स्थानीय संगठन Nah Welfare Society (NWS) ने आरोप लगाया कि चीन की PLA ताकसिंग के आसपास भारतीय क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है.

इस संगठन ने कहा, "उन्होंने हमारी पुश्तैनी ज़मीन पर बॉर्डर के पास कई जगहों पर सड़कें और पुल बनाए हैं और मिलिट्री कैंप लगाए हैं. ये वही इलाके थे जहां हम शिकार करते थे और कुछ साल पहले तक आज़ादी से घूमते-फिरते और जंगल से उपज इकट्ठा करते थे. हमारे मवेशियों के चरागाह अब चीनी PLA के कब्ज़े में हैं."

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PPA के दावे से सनसनी

एक क्षेत्रीय दल पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने PLA द्वारा घुसपैठ और पहुंच रोकने के आरोप लगाए. इस पार्टी ने कहा कि चीनी सैनिक कुछ इंडियन पॉइंट तक लोगों को पहुंचने से रोक रहे हैं. 

PPA के इस दावे से चिढ़े चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस पार्टी का नाम लेकर कहा कि भारतीय मीडिया और क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां चीन-भारत सीमा पर कथित झड़प के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि सीमा से जुड़े दावों को सनसनीखेज बनाने से दोनों देशों के संबंधों में गिरावट आ सकती है. 

द अरुणाचल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा कि NWS के अनुसार पिछले 10 से 15 सालों में ताकसिंग सर्कल के बॉर्डर इलाकों में PLA की गतिविधियां कई गुना बढ़ गई हैं, और ऐसा "ज़्यादा से ज़्यादा भारतीय इलाक़े पर कब्ज़ा करने के इरादे से" किया जा रहा है. 

सोसाइटी ने यह भी आरोप लगाया कि ताकसिंग के पास मौजूद ओयिंग, पानियार, मारपान, पोर्ट्रांग और टिंगडिंगटांग जैसे इलाकों पर PLA ने कब्ज़ा कर लिया है और वहां मिलिट्री कैंप बना लिया है. उसने दावा किया कि इनमें से कुछ इलाके 2020 से पहले भारत के कंट्रोल में थे. 

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चीनी घुसपैठ के दावों को भारत ने बताया झूठ

 भारतीय सेना ने चीन के नए कैंप या हालिया अतिक्रमण के आरोपों को आधारहीन बताया है. विदेश मंत्रालय ने 11 अगस्त, 2026 को कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना "अत्यंत महत्वपूर्ण" है. साथ ही यह भी कहा कि भारत ने द्विपक्षीय वार्ता में हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय क्षेत्रों में चीनी सैनिकों का घुसपैठ कुछ "सबसे गंभीर" मुद्दों में से एक है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का असर भारत-चीन के व्यापक संबंधों पर पड़ेगा.

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