20 अगस्त 1976 को पहली बार कोई स्पेस क्राफ्ट मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा था. यह अमेरिकी मानवरहित ग्रह अन्वेषण यान वाइकिंग 1 था. इसे मंगल ग्रह के मिशन पर फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से लॉन्च किया गया था. किसी दूसरे ग्रह पर पृथ्वी से भेजा गया यह पहला मिशन था, जिसने सफलतापूर्वक दूसरे ग्रह की सतह पर लैंडिंग की.
19 जून, 1976 को अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर गया था. अगले एक महीने तक पूरा समय मंगल की सतह की तस्वीरें लेने में लगाया. ताकि लैंडर के लिए उसे सटीक स्थान का पता मिल सके. 20 जुलाई को अपोलो 11 के चंद्रयान उतरने की सातवीं वर्षगांठ पर वाइकिंग 1 लैंडर ऑर्बिटर से अलग होकर मंगल के क्राइसे प्लैनिटिया क्षेत्र में उतरा.
मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया. उसी दिन, वाइकिंग 1 ने लाल रंग के इस ग्रह के सतह की पहली तस्वीर ली. जंग लगे रंग जैसी दिखने वाली मंगल की सतह की पहली नज़दीकी तस्वीरें भेजने का श्रेय भी वाइकिंग 1 को ही जाती है.
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सितंबर 1976 में, वाइकिंग 1 के मात्र तीन सप्ताह बाद लॉन्च किया गया. वाइकिंग 2 मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर गया, जहां इसने वाइकिंग 1 को सतह की तस्वीरें लेने में सहायता की और एक लैंडर भी भेजा. वाइकिंग के दोहरे मिशन के दौरान, दोनों ऑर्बिटरों ने 150 से 300 मीटर के रिज़ॉल्यूशन पर मंगल की पूरी सतह की तस्वीरें लीं. दोनों लैंडरों ने ग्रह की सतह की 1,400 से अधिक फोटोग्राफ्स वापस भेजीं.