
सिक्किम के नाथुला दर्रे से भारत और चीन के बीच आधिकारिक व्यापार एक बार फिर शुरू हो गया है. छह साल से अधिक समय तक बंद रहने के बाद ऐतिहासिक सिल्क रूट का यह अहम व्यापारिक मार्ग फिर से खोल दिया गया है. इससे दोनों देशों के बीच सीमावर्ती व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
समुद्र तल से 4,302 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह रणनीतिक पहाड़ी दर्रा भारत और तिब्बत को जोड़ने वाला एक बहुत ही खास ऐतिहासिक व्यापार लिंक माना जाता है. वर्ष 1962 के टकराव के बाद बंद होने के बाद, 2006 में एक समझौते के तहत व्यापार फिर से शुरू हुआ था. लेकिन 2020 में कोविड-19 महामारी और उसके बाद गलवान घाटी में हुए गतिरोध के कारण इसे फिर से रोक दिया गया.

नाथुला दर्रे से व्यापार फिर शुरू होने से करीब 600 पंजीकृत भारतीय व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. ये कारोबारी सीमा पर होने वाले मौसमी व्यापार पर काफी हद तक निर्भर हैं. पहले ही दिन 38 व्यापारियों को व्यापार पास जारी किए गए. इस मौके पर ज़ीरो पॉइंट पर आयोजित समारोह में सिक्किम सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने चीनी अधिकारियों और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के अधिकारियों के साथ मिलकर व्यापार की दोबारा शुरुआत का उद्घाटन किया.

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सिक्किम के वाणिज्य और उद्योग मंत्री टी.टी. भूटिया ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया और कहा कि राज्य प्रशासन ने केंद्र सरकार के साथ इस मामले को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया था.
स्थानीय व्यापारी अनिल कुमार ने भारत सरकार का इस निर्णय के लिए आभार जताया है. उन्होंने कहा, "पिछले 6 सालों में हमें भारी नुकसान हुआ. दोनों तरफ व्यापारियों के बहुत पैसे बकाया है. हम खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि सिल्क रूट का यह पुराना व्यापार जारी रहेगा."

व्यापार दोबारा शुरू होना भारत और चीन के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत का सफल परिणाम माना जा रहा है. साल 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं बैठक में नाथुला (सिक्किम), लिपुलेख (उत्तराखंड) और शिपकी ला (हिमाचल प्रदेश) के व्यापारिक मार्गों को फिर से खोलने पर सहमति बनी थी. इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वांग यी की बातचीत में भी इस फैसले पर सहमति को और मजबूत किया गया.
हालांकि फिलहाल स्थिति सकारात्मक है लेकिन नीति निर्माताओं का कहना है कि सावधानी बरतने की अभी भी जरूरत है.