Garuda Purana: मृत्यु जीवन का एक ऐसा सत्य है, जिससे कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता.हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में मृत्यु और उसके बाद आत्मा की यात्रा को लेकर विस्तार से वर्णन मिलता है. इनमें गरुड़ पुराण का विशेष महत्व माना जाता है. इसके प्रेतकल्प में मृत्यु के समय शरीर में होने वाले बदलाव, आत्मा के शरीर से अलग होने और यमदूतों से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं.
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा उसके कर्मों के आधार पर आगे बढ़ती है. ग्रंथ में विशेष रूप से पाप कर्म करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के समय यमदूतों के आने का भयावह वर्णन मिलता है. आइए जानते हैं कि मृत्यु के अंतिम समय में क्या होता है और यमदूत कब आते हैं.
मृत्यु के अंतिम समय में शरीर की हालत कैसी होती है?
गरुड़ पुराण के वर्णन के अनुसार जब व्यक्ति की मृत्यु का समय नजदीक आता है तो उसका शरीर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है.उसकी इंद्रियां ठीक तरह से काम नहीं करतीं.सांस लेने में परेशानी होती है. उस वक्त व्यक्ति बोलने की स्थिति में भी नहीं रह जाता.
बताया गया है कि अंतिम समय में व्यक्ति की सांस भारी हो जाती है, मुंह में झाग और लार आने लगती है. शरीर की सामान्य क्रियाएं कमजोर पड़ने लगती हैं. इसी अवस्था में जीवन के अंतिम क्षण आते हैं.
यमदूत कब आते हैं?
गरुड़ पुराण के एक वर्णन में कहा गया है कि जब इंद्रियां क्षीण होने लगती हैं तो मृत्यु का समय आता है, तब यम के दूत वहां पहुंचते हैं.विशेष रूप से पापी व्यक्ति के संदर्भ में दो यमदूतों का वर्णन किया गया है.
ग्रंथ में इन दूतों को भयावह रूप वाला बताया गया है. उनके हाथों में पाश और दंड होने का उल्लेख मिलता है.उन्हें देखकर मृत्यु के करीब पहुंचा व्यक्ति भयभीत हो जाता है.
यानी गरुड़ पुराण के इस वर्णन के अनुसार यमदूतों का आगमन मृत्यु के बिल्कुल अंतिम चरण से जुड़ा है, न कि मृत्यु के कई दिन बाद पहली बार होने वाली घटना के रूप में.
शरीर से आत्मा कैसे निकलती है?
गरुड़ पुराण में मृत्यु के समय स्थूल शरीर और उससे अलग होने वाली चेतना के संबंध में भी वर्णन मिलता है.पापी व्यक्ति के संदर्भ में कहा गया है कि यमदूत शरीर से आत्मा को बाहर खींचकर ले जाते हैं.
ग्रंथ में आत्मा के आकार को अंगूठे के समान सूक्ष्म रूप में वर्णित किया गया है.यमदूत उसे शरीर से बाहर निकालते हैं, तो आत्मा अपने पीछे छूटे शरीर को देखती है. इसके बाद उसे यम के मार्ग पर ले जाने का वर्णन आता है.
क्या मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा को यमलोक ले जाया जाता है?
यहां गरुड़ पुराण के अलग-अलग प्रसंगों को समझना जरूरी है.मृत्यु के अंतिम क्षण में यमदूतों के आने का वर्णन एक जगह मिलता है, जबकि प्रेतकल्प के आगे के अध्यायों में मृत्यु के बाद के दिनों के अलावा 13वें दिन की यात्रा का अलग वर्णन किया गया है.
प्रेतकल्प के एक प्रसंग में बताया गया है कि 13वें दिन प्रेत को यम के सेवक पकड़कर उसे महान मार्ग पर ले जाया जाता है.इस यात्रा के लिए पिंडों से बने शरीर का भी उल्लेख मिलता है.
इसलिए धार्मिक परंपरा में मृत्यु के बाद होने वाले 10वें, 11वें, 12वें और 13वें दिन के संस्कारों को महत्वपूर्ण माना गया है.गरुड़ पुराण के वर्णन में 11वें और 12वें दिन मृत व्यक्ति के लिए दिए जाने वाले अन्न आदि का उल्लेख है. 13वें दिन उसे यम के मार्ग पर ले जाने की बात कही गई है.
पापी और पुण्यात्मा के लिए यात्रा में अंतर
गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की यात्रा को कर्मों से जोड़कर देखा गया है.पाप कर्म करने वाले व्यक्ति के लिए यमलोक की यात्रा कठिन और भयावह बताई गई है.वहीं धार्मिक व्याख्याओं में पुण्य कर्म करने वाले व्यक्ति की यात्रा अपेक्षाकृत शांत और सुगम बताई जाती है.
प्रेतकल्प के एक श्लोक में पापियों के लिए गर्मी, ठंड, कांटों, अग्नि और अन्य कष्टों से भरे मार्ग का वर्णन मिलता है, जबकि संयमी और धर्मपरायण व्यक्ति के लिए उसी मार्ग को अपेक्षाकृत शांत बताया गया है.
यमदूत आत्मा को कहां लेकर जाते हैं?
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा यम के नगर की ओर होती है. इस मार्ग में कई स्थानों और कठिनाइयों का वर्णन मिलता है.पापी व्यक्ति को रास्ते में भूख-प्यास और अन्य कष्टों का सामना करना पड़ता है. यम के दूत उसे आगे ले जाते हैं.
प्रेतकल्प में यह भी कहा गया है कि यम के पाश में बंधा प्रेत अपने घर को छोड़कर यम के नगर की ओर जाता है.आगे कई मार्गों का वर्णन किया गया है, जिसके बाद यम के नगर तक पहुंचने की बात आती है.
क्या यमदूत हर व्यक्ति को दिखाई देते हैं?
गरुड़ पुराण के मूल वर्णन को देखते हुए यह कहना उचित नहीं होगा कि हर मरने वाले व्यक्ति को बिल्कुल एक जैसे यमदूत दिखाई देते हैं.उपलब्ध वर्णन मुख्य रूप से पापी व्यक्ति की मृत्यु और उसके बाद की यात्रा के संदर्भ में है.
बाद की धार्मिक मान्यताओं में यमदूतों को मृत्यु का संकेत माना गया है.कुछ आधुनिक धार्मिक लेखों में यह भी बताया जाता है कि मृत्यु से पहले व्यक्ति को यमदूत दिखाई दे सकते हैं, लेकिन ऐसी बातों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए.
गरुड़ पुराण का मुख्य संदेश क्या है?
गरुड़ पुराण में मृत्यु का वर्णन केवल डर पैदा करने के लिए नहीं है.इसके पीछे कर्म के सिद्धांत को समझाने का उद्देश्य भी दिखाई देता है.ग्रंथ बार-बार इस बात पर जोर देता है कि व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का फल उसे प्राप्त होता है.
मृत्यु के समय शरीर, धन-दौलत और सांसारिक रिश्ते पीछे छूट जाते हैं.धार्मिक मान्यता के अनुसार व्यक्ति के साथ उसके कर्म ही आगे जाते हैं.इसी वजह से गरुड़ पुराण में जीवन में धर्म, दान, अच्छे कर्मों को महत्व दिया गया है.