अहमदाबाद के एक स्कूल में कुछ दिनों पहले मलाला यूसुफजई की किताब 'आई एम मलाला' पढ़ने को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद 27 तारीख को सिटिजन ऑफ जस्टिस एंड पीस और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता बोडकदेव के सरकारी गार्डन में इस किताब को पढ़ने के लिए एकत्रित हुए.
जैसे ही इसकी जानकारी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को मिली वे भी वहां पहुंचे और इसका विरोध दिया. सिटिजन ऑफ जस्टिस एंड पीस और कांग्रेस ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है.
मामला बढ़ने पर वस्त्रापुर पुलिस मौके पर पहुंची. बजरंग दल नेता ज्वलित मेहता ने कहा कि मलाला की किताब नहीं पढ़नी चाहिए क्योंकि वे कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानती है. उन्होंने कहा, "ऐसे व्यक्ति को देश विरोधी ही कहा जाएगा. इसलिए हम देश-विरोधी व्यक्ति की किताब पढ़ने से लोगों को रोकेंगे." उनका कहना है कि पहले स्कूल में किताब को लेकर विवाद हुआ तो स्कूल ने इसे पढ़ाना बंद कर दिया और अब कांग्रेस और सिटिजन ऑफ जस्टिस एंड पीस इस किताब को लोगों को पढ़ा रही है. इसलिए वे इसे भी रुकवा रहे हैं.
बजरंग दल नेता ज्वलित मेहता का कहना है कि भले ही मलाला को नोबेल शांति पुरस्कार मिला हो और 2017 में वह संयुक्त राष्ट्र की 'मैसेंजर ऑफ पीस' बनीं लेकिन उनकी किताब को वे लोगों को पढ़ने नहीं देंगे.
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बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि भले ही मलाला नोबेल पुरस्कार विजेता हो लेकिन वे हिंदू और भारत-विरोधी ताकतों की किताबों को पढ़ने नहीं देंगे. साथ ही, उन्होंने युवाओं से देश विरोधी ताकतों से दूर रहने की अपील करते हुए यह चेतावनी भी दी कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों को बजरंग दल के गुस्से का सामना करना पड़ेगा. इस कार्यक्रम के आयोजकों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि गले में केसरिया स्कार्फ पहनकर करीब 30-40 लोग वहां आए. उनके व्यवहार से ही ऐसा लग रहा था कि वे मारपीट के इरादे से आए हैं. आयोजकों ने बताया कि उनके पास लोहे की छड़ें, लाठियां और बेसबॉल बैट जैसे हथियार थे.
उनके पास आते ही किताब उठाते हुए बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने कहा, "आप लोग क्या कर रहे हैं, यह देशभक्ति के खिलाफ है." सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध परमार ने बताया कि बजरंग दल के कार्यकर्ता बातचीत के मूड में बिल्कुल नहीं थे. उन्होंने आकर उन्हें धमकियां दी और बद्तमीज़ी की. वहीं, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि आयोजकों ने उन्हें 'आतंकवादी' बताते हुए पोस्ट किए थे. जिसके कारण मामला गरमा गया.
पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों पक्षों की बहस और हाथापाई दिख रही है.