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बैलेट पेपर से वोटिंग के बाद भी कांग्रेस का हाथ खाली, जानें 4 राज्यों में MLC चुनाव के नतीजे

देश के चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के चुनावी नतीजे सामने आ गए हैं. इनमें बीजेपी ने दबदबा बनाया है जबकि कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई. बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस का खाली हाथ रह जाना पार्टी के लिए करारा झटका लगा है.

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MLC चुनावों में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई. (Photo- PTI)
MLC चुनावों में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई. (Photo- PTI)

देश के चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों के लिए हुए चुनावों के नतीजे अब सामने आने लगे हैं. इन परिणामों ने एक बार फिर देश की सियासत को गर्मा दिया है. बैलेट पेपर से हुए इस चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिल रहा है, जबकि विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस के हाथ पूरी तरह खाली रहे हैं.

कांग्रेस का इन चुनावों में खाता तक नहीं खुला है, जिसके बाद सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष पर  हमले शुरू कर दिए हैं. चुनावी नतीजों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर कर कांग्रेस पार्टी पर जमकर चुटकी ली.

पीएम मोदी ने सवालिया लहजे में लिखा कि चार राज्यों की 28 एमएलसी सीटों पर बैलेट पेपर से वोटिंग हुई है और क्या कोई अंदाजा लगा सकता है कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं? उनके इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई, क्योंकि ईवीएम पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पार्टी बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई.

वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी तंज कसते हुए कहा कि अब तो बैलट बॉक्स को भी इस्तीफा दे देना चाहिए.

कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र में कांग्रेस को झटका

कांग्रेस के लिए ये नतीजा किसी बड़े झटके से कम नहीं है. पार्टी ने कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कुल 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी राज्य में उसे जीत नहीं मिली. कर्नाटक में तो कांग्रेस की अपनी सरकार है, वहां पार्टी ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा और चारों पर उसे हार का सामना करना पड़ा.

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विपक्षी दल अक्सर चुनावों में EVM पर गड़बड़ी के आरोप लगाते हैं और मतपत्र से चुनाव कराने की मांग करते हैं, लेकिन बैलेट पेपर से हुए इन एमएलसी चुनावों में मिली शून्य सफलता ने उनके तर्कों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

क्या होती है विधान परिषद और कैसे होते हैं चुनाव?

भारत के छह राज्यों- उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में द्विसदनीय व्यवस्था है, यानी विधानसभा के साथ विधान परिषद भी है. इसे राज्य का 'उच्च सदन' कहा जाता है, हालांकि इसके अधिकार राज्यसभा की तरह सीमित होते हैं. विधान परिषद का मकसद समाज के बुद्धिजीवी वर्ग और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रतिनिधित्व देना है.

एमएलसी का कार्यकाल 6 साल का होता है और हर दो साल पर एक तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं. इन चुनावों की प्रक्रिया आम चुनावों से काफी अलग होती है. उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में कुल 100 सीटें हैं, जिनमें से विधायक, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि, और शिक्षक और ग्रेजुएट मतदाता अपने वोट डालते हैं.

इस बार जिन 28 सीटों पर चुनाव हुए हैं, उनमें मुख्य रूप से ग्रेजुएट और शिक्षकों ने मतदान किया है. इन चुनावों में वही मतदाता हिस्सा ले सकते हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज होता है और जो तय शैक्षणिक योग्यताओं को पूरा करते हैं.

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कई राज्यों में क्या रहा सीटों का हाल?

फिलहाल सभी 28 सीटों के नतीजे और रुझान साफ होने लगे हैं:

  • उत्तर प्रदेश (11 सीटें): यहां बीजेपी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर कब्जा जमाया है. साल 2020 के पिछले चुनावों की तुलना में सपा ने इस बार अपनी स्थिति मजबूत की है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं.
  • बिहार (8 सीटें): यहां एनडीए और दूसरे दलों के बीच मुकाबला रहा, जिसमें बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी, जनसुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.
  • कर्नाटक (4 सीटों): कांग्रेस शासित इस राज्य में बीजेपी ने 3 सीटों पर और जेडीएस ने 1 सीट पर जीत हासिल की है.
  • महाराष्ट्र (5 सीटों): यहां भी एनडीए के घटक दलों और एनसीपी (शरद पवार गुट) के बीच मुकाबला देखने को मिला है, जहां कुछ सीटों पर नतीजे आ चुके हैं और कुछ पर मतगणना जारी है.
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