scorecardresearch
 

किसान बोले- कल 3 बजे तक करेंगे चक्का जाम, मंच पर किसी पार्टी के नेता को परमिशन नहीं

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे किसान मंगलवार को भारत बंद करेंगे. किसानों का कहना है कि 8 दिसंबर को पूरे दिन का बंद रहेगा. किसानों ने यह भी ऐलान किया है कि आंदोलन के दौरान उनके मंच पर किसी राजनीतिक दल के नेता को आने की अनुमति नहीं होगी.

Advertisement
X
आठ दिसंबर को किसानों का भारत बंद का आह्वान (फोटो-PTI)
आठ दिसंबर को किसानों का भारत बंद का आह्वान (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आठ दिसंबर को पूरे देश में भारत बंद
  • राजनीतिक दलों के नेताओं को एंट्री नहीं
  • तीन बजे तक किसानों का रहेगा चक्का जाम

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे किसान मंगलवार को भारत बंद करेंगे. किसानों का कहना है कि 8 दिसंबर को पूरे दिन बंद रहेगा. किसानों ने यह भी ऐलान किया है कि आंदोलन के दौरान उनके मंच पर किसी राजनीतिक दल के नेता को आने की अनुमति नहीं होगी. 

किसानों ने सिंधु बॉर्डर पर सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और भारत बंद के कार्यक्रम के बारे में बताया. किसान नेता निर्भय सिंह धुडिके ने कहा, 'हमारा विरोध केवल पंजाब तक सीमित नहीं है. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जैसे दुनिया भर के नेता भी हमें समर्थन दे रहे हैं. हमारा विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण है.' वहीं किसान नेता डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि मंगलवार को पूरे दिन बंद रहेगा. दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम होगा. यह एक शांतिपूर्ण बंद होगा. हम अपने मंच पर किसी भी राजनीतिक नेता को अनुमति नहीं देंगे. 

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार पंजाब ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष चरणजीत सिंह ने ऐलान किया है कि वो किसानों के बंद का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने किसानों के समर्थन में 8 दिसंबर को चक्का जाम करने का फैसला किया है. परिवहन संघ, ट्रक यूनियन, टेंपो यूनियन सभी ने बंद को सफल बनाने का फैसला किया है. यह बंद पूरे भारत में होगा. 

Advertisement

क्या बोले किसान संगठन

बहरहाल, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की है. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप ने कहा कि तीन कानूनों को वापस न लेने की घोषणा करना सरकार के जिद्दी रवैये को उजागर करता है. सरकार कोई आलोचना सुनने या सुझाव मानने को तैयार नहीं है.

किसान संगठन ने कहा कि सरकार के पास अपने रुख को सही ठहराने के लिए कोई तर्क नहीं है और यह स्पष्ट रूप से कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों के सामने झुक हुआ दिख रहा है. पूरा देश बीजेपी के “आत्मानिर्भर विकास” और आरएसएस के “स्वदेशी” नारे के ढोंग और दोहरे चरित्र को देख सकता है. यहां तक कि बीकेएस जैसे आरएसएस के संगठन भी किसानों की मांगों के खिलाफ सामने आए हैं.

देखें: आजतक LIVE TV

सरकार के दावे को खोखला बताया

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने फिर से उस आधार पर सवाल उठाया है, जिसके आधार पर सरकार दावा कर रही है कि वह कानूनों में सुधार करेगी और एमएसपी और खरीद पर आश्वासन देगी. समिति ने कहा कि सरकार के विशेषज्ञ खुले तौर पर दावा करते रहे हैं कि सरकारी खरीद को रोकना होगा, क्योंकि देश में अनाज का सरप्लस उत्पादन खाद्य भंडार की आवश्यकता से 2.5 गुना है. वे यह भी कहते हैं कि एमएसपी को कानून में नहीं बदला जा सकता है. तब खरीद और एमएसपी के किसी भी आश्वासन की विश्वसनीयता क्या है? तीनों कृषि अधिनियम कहते हैं कि वे निजी बड़े कॉर्पोरेट द्वारा मंडियों की स्थापना को बढ़ावा देते हैं. मंडी को अन्य सभी क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, बीमा, बैंकिंग इत्यादि में डी-प्रमोट किया जाएगा, यह इस बात को प्रमाणित करता है कि सरकार का एमएसपी पर खरीद को बंद करने का इरादा है.

Advertisement

 

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement