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5 लाख तक में बिक रहे बकरे, बकरीद पर दिल्ली से कराची और ढाका तक सजीं मंडियां

बकरीद से पहले भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की पशु मंडियों में बकरों-बैलों के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. महंगाई, ईंधन और चारे की लागत भी बढ़ी है.

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महंगाई और हीटवेव के बीच लाखों में हो रहे बकरों के सौदे (Photo: PTI)
महंगाई और हीटवेव के बीच लाखों में हो रहे बकरों के सौदे (Photo: PTI)

मुसलमानों के सबसे बड़े त्योहारों में से एक ईद-उल-अजहा यानी बकरीद इस साल 28 मई को मनाया जाएगा. फेस्टिवल में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की पशु मंडियां पूरी तरह गुलजार हो चुकी हैं. इस बार सिर्फ बकरे ही नहीं बल्कि बैलों के दाम भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. 

दिल्ली, मुंबई, कराची और ढाका जैसी बड़ी मंडियों में खरीदार कीमत सुनकर हैरान नजर आ रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि महंगाई, ट्रांसपोर्टेशन खर्च, महंगा चारा और वेस्ट एशिया संकट की वजह से इस साल पशुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर साउथ एशिया की पशु मंडियों पर पड़ा है. डीजल-पेट्रोल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ गया है. वहीं, आयात होने वाला पशु चारा और दूसरे सामान भी महंगे हो गए हैं. इसका असर सीधे बकरों और बैलों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

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(Photo: PTI)

दिल्ली से कराची तक मंडियों में खरीदारों का हुजूम!

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बड़ी मंडियों में इस समय सबसे ज्यादा रौनक दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद और राजस्थान में देखने को मिल रही है. दिल्ली की जामा मस्जिद, जाफराबाद और ओखला मंडी में छोटे बकरों की कीमत 25 हजार रुपये से शुरू होकर 2 लाख रुपये तक पहुंच रही है. वहीं सोजत, जमनापारी और तोतापारी जैसी खास नस्लों के भारी बकरे 5 लाख रुपये तक बिक रहे हैं.

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दिल्ली और यूपी की मंडियों में कुर्बानी के लिए लाए गए बैलों की कीमत भी तेजी से बढ़ी है. अच्छे कद-काठी और भारी वजन वाले बैल 1 लाख रुपये से लेकर 8 लाख रुपये तक में बिक रहे हैं. कुछ खास नस्लों के बैलों की कीमत इससे भी ज्यादा बताई जा रही है.

मुंबई की मशहूर देवनार मंडी में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से बड़ी तादाद में बकरे और बैल लाए गए हैं. यहां सामान्य बकरे 30 हजार से 80 हजार रुपये तक बिक रहे हैं, जबकि प्रीमियम बकरे 7 लाख से 10 लाख रुपये तक पहुंच गए हैं. वहीं, भारी-भरकम बैलों की कीमत 2 लाख से 12 लाख रुपये तक बताई जा रही है.

लखनऊ की दुबग्गा मंडी में लंबे कद और ज्यादा वजन वाले बकरों की सबसे ज्यादा मांग है. यहां कीमतें 20 हजार रुपये से शुरू होकर करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच रही हैं. वहीं, कुर्बानी के लिए तैयार बड़े बैल 2 लाख रुपये से ज्यादा में बिक रहे हैं.

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(Photo: PTI)

हैदराबाद की मरेडपल्ली और चारमीनार मंडियों में तेलंगाना और कर्नाटक से आए बकरे 40 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक बिक रहे हैं. राजस्थान की जयपुर और जोधपुर मंडियों में सिरोही, सोजत और जमनापारी नस्लों की सबसे ज्यादा डिमांड है.

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कश्मीर में भी बकरीद को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनगर के ईदगाह इलाके की पशु मंडियों में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं. मंडियों में दूर-दराज इलाकों से व्यापारी बकरे और बैल लेकर आ रहे हैं. 

हालांकि, वहां भी महंगाई और बढ़ती लागत का असर साफ दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर में इस बार अच्छे और भारी बकरों की कीमत पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है. कई खरीदारों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार कुर्बानी के जानवर खरीदना काफी महंगा हो गया है. वहीं, व्यापारियों का कहना है कि चारा, ट्रांसपोर्ट और पशुओं की देखभाल पर खर्च बढ़ने से कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं.

पड़ोसी मुल्कों में भी महंगाई की मार

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश की मंडियों में इस बार महंगाई और चारे की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है. कराची और लाहौर की मंडियों में बकरे 90 हजार से 1 लाख 25 हजार पाकिस्तानी रुपये तक बिक रहे हैं. वहीं, प्रीमियम नस्लों के बकरे और बड़े बैल कई लाख रुपये तक पहुंच गए हैं. पाकिस्तान में इस बार कई लोग छोटे जानवरों की बजाय बड़े जानवरों में हिस्सेदारी लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

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द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका की गबतली मंडी में भी पशुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं. व्यापारियों का कहना है कि महंगा चारा और बढ़ती ईंधन कीमतों ने लागत काफी बढ़ा दी है. यहां मशहूर ब्लैक बंगाल नस्ल के छोटे बकरे 11 हजार से 17 हजार रुपये तक बिक रहे हैं, जबकि भारी बकरे और बैल 40 हजार रुपये से ऊपर पहुंच चुके हैं.

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(Photo: PTI)

इस बार मंडियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी बनी हुई है. तेज गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान की वजह से कई पशु बीमार पड़ रहे हैं. व्यापारियों को लगातार पानी का छिड़काव करना पड़ रहा है. इसके साथ ही ग्लूकोज, इलेक्ट्रोलाइट्स, कूलर और पंखों का इंतजाम भी करना पड़ रहा है. इससे व्यापारियों की लागत और बढ़ गई है. दोपहर के समय मंडियों में सन्नाटा छाया रहता है और ज्यादातर जगहों पर खरीदारी अब देर शाम या रात में हो रही है.

कैसे तय होती है बकरों और बैलों की कीमत?

पशुओं की कीमत सिर्फ वजन से तय नहीं होती. मंडियों में उनकी नस्ल, लंबाई, ऊंचाई, रंग, सींग, चाल, शरीर की बनावट और खूबसूरती भी रेट फिक्स करने में बड़ा रोल निभाती है. जो बकरे और बैल ज्यादा लंबे, मजबूत और देखने में आकर्षक होते हैं, उनकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है.

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इसके अलावा, पशु कितना स्वस्थ है, उसका वजन कितना है, दांत सही हैं या नहीं और उसे किस तरह की डाइट दी गई है, इन सभी बातों पर कीमत तय की जाती है. खास नस्ल जैसे सोजत, जमनापारी, राजनपुरी, कामोरी और सिरोही नस्ल के बकरे सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं. वहीं, बड़े और भारी बैलों की डिमांड भी इस बार काफी ज्यादा देखने को मिल रही है.

व्यापारियों का कहना है कि बकरीद से ठीक 3 से 4 दिन पहले डिमांड सबसे ज्यादा बढ़ जाती है. हालांकि, इस साल महंगाई, ट्रांसपोर्टेशन खर्च, महंगे चारे और गर्मी की वजह से पशुओं की कीमतों में 15 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद, लोग बकरीद के मौके पर बजट के हिसाब से जमकर खरीदारी कर रहे हैं.

(Report: Shivanshi Shukla)

 
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