scorecardresearch
 

'हीट आइलैंड बनने का खतरा...', Amazon डेटा सेंटर के खिलाफ क्यों सड़कों पर उतरे ठाणे के लोग

महाराष्ट्र के ठाणे में प्रस्तावित Amazon Web Services (AWS) के डेटा सेंटर के खिलाफ स्थानीय लोगों का विरोध जारी है। वेक अप ठाणेकर (WUT) के बैनर तले लोग बालकुम इलाके में इस सेंटर के निर्माण को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं.

Advertisement
X
मुंबई के ठाणे में अमेजन डेटा सेंटर का विरोध हो रहा है
मुंबई के ठाणे में अमेजन डेटा सेंटर का विरोध हो रहा है

महाराष्ट्र के ठाणे में प्रस्तावित Amazon Web Services (AWS) के डेटा सेंटर को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध जारी है. 'वेक अप ठाणेकर' (WUT) के बैनर तले लोग बालकुम इलाके में बनाए जा रहे डेटा सेंटर की लोकेशन पर सवाल उठा रहे हैं. Amazon Data Services India करीब 53 एकड़ जमीन पर इस सेंटर को विकसित कर रही है. करीब 47 हजार करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के सबसे बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में से एक हो सकता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे डेटा सेंटर के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि घनी आबादी के बीच इसे बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं. स्थानीय निवासी अनुराधा रोडे ने कहा कि प्रस्तावित जगह के आसपास ऊंची आवासीय इमारतों के साथ तीन गांव भी हैं. इसके अलावा स्कूल, अस्पताल और मेट्रो जैसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस भी नजदीक हैं. उनका दावा है कि ऐसे में डेटा सेंटर के लिए यह जगह सही नहीं है.

18 जुलाई को बनाई थी ह्यूमन चेन, किया था विरोध

WUT के सदस्यों ने 18 जुलाई को डेटा सेंटर के विरोध में मानव श्रृंखला बनाई थी. स्थानीय लोगों ने Amazon के अफसरों के साथ मीटिंग भी की, लेकिन उनका कहना है कि इसमें उनकी प्रमुख तकनीकी और पर्यावरण संबंधी चिंताओं का संतोषजनक जवाब नहीं मिला. स्थानीय निवासी मेघा शेट्टी ने कहा कि उन्होंने विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद बैठक में अपने सवाल रखे थे. उनकी सबसे बड़ी चिंता घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र के बीच इतने बड़े डेटा सेंटर के निर्माण को लेकर है.

Advertisement

लोगों ने डेटा सेंटर से निकलने वाली गर्मी, करीब 190 डीजल जनरेटर सेट से होने वाले शोर, उत्सर्जन और दूसरे पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

पानी के इस्तेमाल पर Amazon ने क्या कहा?

Amazon ने इन चिंताओं पर अपनी वेबसाइट पर विस्तृत जवाब जारी किया है. कंपनी के मुताबिक, ठाणे डेटा सेंटर में कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. कंपनी ने कहा कि भारत में उसके किसी भी डेटा सेंटर में फिलहाल कूलिंग के लिए पीने योग्य पानी का इस्तेमाल नहीं होता.

ठाणे डेटा सेंटर के लिए स्वीकृत पानी की आपूर्ति 0.01 मिलियन लीटर प्रतिदिन है, जिसका इस्तेमाल कर्मचारियों के पीने के पानी और टॉयलेट जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए होगा. कंपनी के मुताबिक, सेंटर में एयर-कूल्ड चिलर्स और क्लोज्ड-लूप कूलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.

स्थानीय लोगों को 'हीट आइलैंड' बनने का डर

स्थानीय निवासी गुरासिस सिंह का दावा है कि मशीनों को ठंडा रखने के लिए बड़े पैमाने पर एयर कंडीशनिंग सिस्टम का इस्तेमाल होगा, जिससे बालकुम, ढोकाली और माजीवाड़ा इलाकों में 'हीट आइलैंड' जैसी स्थिति बन सकती है.

Amazon ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा कि सर्वर से निकलने वाली गर्मी को कूलिंग और एयर हैंडलिंग सिस्टम के जरिए प्रभावी तरीके से बाहर निकाला जाएगा और इससे आसपास के समुदायों के हवा के तापमान पर असर नहीं पड़ेगा.

Advertisement

बिजली और शोर को लेकर भी सवाल

निवासियों ने डेटा सेंटर की भारी बिजली खपत को लेकर भी चिंता जताई है. स्थानीय निवासी जतिन कोठारे के मुताबिक, हाइपरस्केल डेटा सेंटर को करीब 420 मेगावाट की लगातार बिजली की जरूरत होगी और इलाके में पहले भी बिजली कटौती हुई है.

इस पर Amazon का कहना है कि डेटा सेंटर के लिए अलग एक्स्ट्रा हाई-वोल्टेज सबस्टेशन होगा और स्थानीय निवासियों तथा व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बिजली देने वाले डिस्ट्रीब्यूशन ग्रिड से बिजली डायवर्ट नहीं की जाएगी.

शोर को लेकर कंपनी ने कहा कि डेटा सेंटर का निर्माण Noise Pollution Rules, 2000 के तहत तय सीमा के अनुसार किया जाएगा. इसके लिए साउंड-डैम्पनिंग मटेरियल, इंसुलेशन, अकॉस्टिक एनक्लोजर और मफलर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा.

वहीं, प्रदर्शनकारी स्थानीय लोगों ने प्रोजेक्ट को मिली सरकारी मंजूरियों पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को अनुमति देने से पहले आसपास रहने वाले हजारों लोगों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का पर्याप्त आकलन किया जाना चाहिए था.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement