
रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का विधानसभा घेराव मार्च तेज हो गया है. प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेड तोड़कर विधानसभा की तरफ बढ़ चले हैं. बैरिकेड लगाकर रोके जाने के बाद छात्र पीछे के रास्त विधानसभा की दीवार तक पहुंच गए. इस दौरान अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो स्ट्रेचर पर प्रदर्शन में पहुंचे और उन्होंने शीबू सोरेन की तस्वीर के साथ कहा कि अगर गुरुजी जीवित होते तो इस आंदोलन में उनके साथ होते.
प्रदर्शन के बीच झारखंड सरकार ने कहा है अभ्यर्थियों को शांतिपूर्ण विरोध की इजाजत दी गई है और उनके खिलाफ पेलेट गन, टियर गैस या लाठीचार्ज का इस्तेमाल नहीं होगा. सरकार का कहना है कि उसकी ताकत के दायरे में आने वाली लगभग सभी मांगों पर सहमति दी जा चुकी है, लेकिन जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला सिर्फ राज्य सरकार अकेले नहीं कर सकती.

'अगर गुरू जी होते तो आज आंदोलन में शामिल होते'
विधानसभा घेराव मार्च के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, "गुरुजी शीबू सोरेन ने पूरी जिंदगी लड़ाई लड़ी, पूरी जिंदगी आंदोलन किया. अगर वह जीवित होते तो हमारे आंदोलन में शामिल होते. गुरुजी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इस प्रदर्शन में उनकी तस्वीर हमारे साथ है. अगर हेमंत सोरेन गुरुजी को अपना आदर्श मानते हैं, तो मैं यहां अपनी जान जोखिम में डालकर आया हूं. मैं चल नहीं सकता. किसी भी समय पुलिस से झड़प हो सकती है. भगदड़ हो सकती है. मैं जानता हूं कि मैं भाग नहीं सकता. टियर गैस के गोले छोड़े जा सकते हैं. जब तक सरकार हमारी बात नहीं सुनेगी, आंदोलन जारी रहेगा."
देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अनशन के दौरान चावल और सूखी रोटी पर टिके हुए हैं और प्रदर्शन के बाद भी ऐसा ही करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लगाए गए कांटेदार तार वाले बैरिकेड से उन्हें उनके जारी अनशन से ज्यादा तकलीफ हुई है. इसी बीच मार्च के तेज होने पर एक प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेड के ऊपर चढ़ गया. छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ नई विधानसभा भवन की ओर बढ़ रहे हैं.

झारखंड सरकार के मंत्री ने छात्रों की डिमांड पर क्या कहा?
झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने देगी और उनके खिलाफ पेलेट गन, टियर गैस या लाठीचार्ज नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि विधानसभा घेराव के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन जरूरी कदम उठा रहा है.
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बातचीत पर उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में घंटों चर्चा हुई है और सरकार ने अपनी शक्तियों के भीतर आने वाली लगभग सभी मांगें मान ली हैं. हालांकि उन्होंने साफ किया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग न्यायिक निर्देशों से जुड़ी है, इसलिए इस पर फैसला सिर्फ राज्य सरकार अपने स्तर पर नहीं ले सकती.

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार ने जांच को खुला रखा है और वह न्यायिक निगरानी में जांच कराने के लिए तैयार है. उन्होंने यह भी कहा कि धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए राज्य ने एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट को भी आमंत्रित किया है. मंत्री के मुताबिक भर्ती व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी भी की जा रही है और इसके प्रस्ताव छात्रों के साथ साझा किए गए हैं.
इनमें आईआईएम, आईआईटी, एक्सएलआरआई और आईएसएम जैसे संस्थानों के प्रतिनिधियों वाली एक विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रस्ताव शामिल है. कुल मिलाकर, रांची में छात्रों का आंदोलन, देवेंद्र नाथ महतो का तीखा संदेश और सरकार की ओर से बातचीत व जांच का आश्वासन, इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं.