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JPSC परीक्षाएं रद्द करने को तैयार सोरेन सरकार, लेकिन CBI जांच से इनकार

झारखंड में परीक्षाओं की गड़बड़ियों को लेकर छात्रों और राज्य सरकार के बीच चल रहा गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है. तीन दौर की बातचीत के बाद भी मुख्य मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है. छात्रों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है और कल सुबह हजारों की संख्या में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है.

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JPSC-JSSC परीक्षा को लेकर सरकार और छात्रों के बीच कई मांगों पर सहमति बन गई है .( File Photo- PTI)
JPSC-JSSC परीक्षा को लेकर सरकार और छात्रों के बीच कई मांगों पर सहमति बन गई है .( File Photo- PTI)

झारखंड में परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों और राज्य सरकार के बीच चल रहा गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार और छात्रों के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत भी पूरी तरह सफल नहीं रही. पांच घंटे चली बैठक के दौरान सरकार ने कई मांगों को मान लिया है, जबकि कई मांगों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है.

अपनी मांगें मनवाने के लिए सोमवार सुबह 10 बजे पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा तक हजारों छात्र मार्च करेंगे. इसको ध्यान में रखते हुए झारखंड विधानसभा परिसर (नई विधानसभा) के 750 मीटर के दायरे में, झारखंड हाईकोर्ट, रांची को छोड़कर, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर रांची ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए BNS की धारा 163 (144 CRPC) लागू कर दी है. चलिए आपको बताते हैं कि सरकार ने किन मांगों को मान लिया है.

इन मांगों पर बनी सहमति

  1. 14वीं JPSC PT (Regular & Backlog) रद्द होगी.
  2. ACF की परीक्षा रद्द होगी.
  3. FRO की जांच होगी. कुछ गलत मिला तो परीक्षा रद्द होगी.
  4. TDPL Agency ने जो भी भर्ती परीक्षा ली है, उसकी जांच होगी और कुछ गलत पाए जाने पर उस परीक्षा को रद्द किया जाएगा.
  5. JSSC CGL की दोबारा जांच होगी और गलत पाए जाने पर कार्रवाई होगी.
  6. JSSC Reforms पर सरकार तैयार है.
  7. CBI जांच पर सहमति नहीं बनी है, लेकिन सरकार CID जांच में वित्तीय घोटाले से जुड़ा कोई मामला सामने आने पर ED से जांच करवाने के लिए तैयार है.

98 प्रतिशत मांगें मान ली है 

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JMM मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि सरकार ने 98 फीसदी मांगें मान ली हैं. हालांकि, छात्र JSSC-CGL परीक्षा को भी रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. मंत्री ने कहा कि सरकार के पास CGL परीक्षा रद्द करने का अधिकार नहीं है. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CGL परीक्षा कराई गई थी, इसलिए सरकार इसे रद्द नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि CGL परीक्षा के जरिए भर्ती हुए लोगों को हटाया नहीं जा सकता. हालांकि, जरूरत पड़ने पर CGL में अनियमितताओं की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी.

वार्ता के बाद छात्रों की मांगें

TDPL से कराई गई सभी परीक्षाओं को सिर्फ जांच तक सीमित न रखा जाए, बल्कि रद्द किया जाए.
JSSC-CGL की न्यायिक जांच नहीं, बल्कि परीक्षा रद्द की जाए.
उपरोक्त परीक्षाओं को रद्द कर CID और न्यायिक जांच के बजाय CBI जांच कराई जाए.

छात्रों ने कहा कि इन तीनों मांगों पर हू-ब-हू निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा. सोमवार को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम भी होगा.

पांच घंटे चली बैठक, लेकिन नहीं बनी बात

जानकारी के मुताबिक, छात्र संगठनों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच पांच घंटे से ज्यादा समय तक बैठक चली. सभी छात्र संगठनों के साथ तीन दौर की बातचीत हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकल सका.

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छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनकी सभी मुख्य मांगें मानने से इनकार कर दिया है. सरकार की ओर से केवल 14वीं परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है, जिससे छात्र बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि अन्य परीक्षाओं और व्यवस्था में सुधार को लेकर जो मांगें रखी गई थीं, उन पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है.

यह भी पढ़ें: रांची: छात्र आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा

    विरोध में कल स्टूडेंट्स निकालेंगे प्रोटेस्ट
    बातचीत विफल होने के बाद आक्रोशित छात्रों ने सड़क पर उतरने का बड़ा फैसला किया है. छात्र संगठनों ने ऐलान किया है कि कल सुबह ठीक 10 बजे हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स पुरानी विधानसभा से लेकर नई विधानसभा तक मार्च निकालेंगे. इस दौरान पूरे रास्ते में जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा, जिसे छात्रों का 'महासंग्राम' नाम दिया गया है.

    छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा. इस हंगामे और बड़े पैमाने पर होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं.

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भी बड़ा बयान सामने आया है. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है और हर समस्या का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सकता है. 

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    सभी को न्याय दिलाऊंगा

    हेमंत सोरेन ने कहा 'मैं ज्यादा उम्र का नहीं हूं, मैं आपकी समस्याओं को समझता हूं और आपको न्याय दिलाऊंगा. उन्होंने आगे कहा कि हम जानते हैं कि गोलियां सीमा पर जरूरी हैं, यहां उनकी जरूरत नहीं है.

    उन्होंने कहा कि देशभर में राजनीतिक दल अलग-अलग तरीकों से युवाओं को अपने निशाने पर ले रहे हैं और उन्हें गुमराह करने की रणनीति बना रहे हैं. इसमें सच और झूठ को मिलाकर युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में बड़े स्तर पर काम हो रहा है और इसमें पढ़े-लिखे और जानकार लोग भी शामिल हैं.

    जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई के कारण ही युवाओं में गलत काम को सामने लाने और अपने हक के लिए आवाज उठाने का साहस आया है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं को न्याय मिलेगा और गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी.

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