भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े छह सालों में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार के पूरे कार्यकाल में हुई सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. साथ ही मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए पीटी परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की भी बात कही.
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार का साढ़े छह वर्षों का कार्यकाल युवाओं के सपनों की हत्या, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता और भर्ती घोटालों के आरोपों से जुड़ा रहा है. उनका आरोप है कि जिस सरकार ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, उसी के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार अविश्वास, भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप सामने आए.
उन्होंने कहा कि भाजपा की मांग है कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई से जांच कराई जाए. उनका कहना है कि राज्य के शिक्षा मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. साथ ही उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग के सभी सदस्यों को बर्खास्त कर पारदर्शी तरीके से नई नियुक्तियां करने की मांग भी उठाई.
मुख्यमंत्री के इस्तीफे और पीटी परीक्षा रद्द करने की मांग
प्रतुल शाहदेव ने पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ गंभीर तथ्य सामने आने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि इससे ऐसा लगता है कि सीआईडी केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर रही है. भाजपा का कहना है कि आयोग के शीर्ष पदों पर रहे लोगों से रिमांड पर पूछताछ किए बिना पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ सकती.
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने तत्कालीन सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का स्थानांतरण होने के बाद भी उन्हें विधिवत कार्यमुक्त नहीं किया. इसके अलावा उन्होंने अकेले परीक्षा परिणाम पर हस्ताक्षर किए और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का चयन किया.
भाजपा नेता ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग प्रक्रिया नियमावली 2002 तथा संविधान के अनुच्छेद 315, 316 और विशेष रूप से अनुच्छेद 320 के अनुसार निजी एजेंसियों को केवल तकनीकी और सहायक कार्यों के लिए सीमित रूप से लगाया जा सकता है. उनका कहना है कि परीक्षा का संचालन, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, मूल्यांकन, मेरिट सूची तैयार करना और अंतिम चयन करना आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है. इन अधिकारों को किसी निजी एजेंसी को सौंपना कानून और संविधान की भावना के विपरीत है.
उन्होंने कहा कि यदि निजी एजेंसियों को आयोग के मूल अधिकारों में हस्तक्षेप करने दिया गया है, तो यह केवल प्रक्रिया की त्रुटि नहीं बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है. ऐसे मामलों में केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी और पूरे मामले की गहराई से जांच जरूरी है.
प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कथित मामलों पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में युवाओं के मुद्दों पर राजनीति करने वाली कांग्रेस झारखंड में युवाओं के भविष्य से जुड़े आरोपों पर मौन है.
कांग्रेस की चुप्पी पर भाजपा ने उठाए सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि जेपीएससी से जुड़े कथित मामलों पर उसका रुख क्या है. प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता भी जेपीएससी के सदस्य रहे हैं, जिन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहा. भाजपा ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पीटी परीक्षा रद्द की जाए, जेपीएससी के सभी सदस्यों को हटाकर नई नियुक्तियां की जाएं और पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.