जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित अधिकारियों को धमकी भरा पत्र मिला है. भारतीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक, प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के लिए काम करने वाले संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) ने यह धमकी दी है. पत्र में दावा किया गया है कि संगठन के पास कश्मीरी पंडित अधिकारियों के परिवार, उनके ठिकाने और काम करने की जगह की जानकारी है. संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर वे जम्मू चले भी गए तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा.
7 अगस्त की तारीख वाले इस पत्र में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, पुलिस महानिदेशक और नई दिल्ली के अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है. इसमें आतंकियों के समर्थकों और लड़ाकों की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने और उनके रिश्तेदारों को परेशान करने का आरोप लगाया गया है.
श्रीनगर के एक वरिष्ठ पत्रकार ने इंडिया टुडे डिजिटल से पत्र की पुष्टि की है. पत्रकार ने कहा कि इस तरह के धमकी भरे पत्रों से कश्मीरी पंडित समुदाय में डर पैदा होता है, खासकर जम्मू में. पनुन कश्मीर के मीडिया सचिव एमके धर ने इन धमकियों को नामंजूर बताया. उन्होंने सवाल किया कि कश्मीरी हिंदुओं को आखिर कब तक छिपकर रहना पड़ेगा.
कश्मीर घाटी से करना पड़ा था पलायन
1990 के दशक में आतंकवाद, टागरेट किलिंग और धमकियों के बढ़ने के कारण कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी से पलायन करना पड़ा था. आतंकियों ने स्थानीय मस्जिदों के जरिए चेतावनी जारी कर कश्मीरी हिंदुओं से इस्लाम कबूल करने, घाटी छोड़ने या मौत का सामना करने को कहा था. इस दौर को कश्मीरी पंडितों के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है. बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित जम्मू में जाकर बस गए.
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ने पंडितों और पुलिस को दी धमकी
यूएलसी ने अपने पत्र में बदले की कार्रवाई की चेतावनी दी और राजस्व विभाग समेत कुछ प्रशासनिक विभागों का खास तौर पर जिक्र किया. संगठन ने दावा किया कि इन विभागों में कई कश्मीरी पंडित अधिकारी काम करते हैं. पत्र में दावा किया गया कि संगठन के पास इन अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों की जानकारी है और उन्हें जम्मू जाने के बाद भी निशाना बनाया जा सकता है. पत्र में कश्मीरी पंडित समुदाय के छह सरकारी कर्मचारियों का जिक्र किया गया है. इंडिया टुडे डिजिटल ने पत्र में बताए गए कर्मचारियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
पत्र में पुलिसकर्मियों को भी धमकी दी गई. इसमें दावा किया गया कि पुलिस बल में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग हैं और इससे वे हमलों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं. पत्र पर अहमद बिलाल नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर हैं. इस धमकी की कश्मीरी लोगों ने भी निंदा की है. ईएफएसएएस के निदेशक जुनैद कुरैशी ने कश्मीरी पंडितों को दी गई धमकी की निंदा करते हुए कहा कि कश्मीरी मुसलमान पहले समुदाय के साथ नाकाम रहे, लेकिन अब ऐसा दोबारा नहीं होने दिया जाएगा.ॉ
जांच कराने की मांग
पनुन कश्मीर ने भी 8 अगस्त को जारी बयान में इस धमकी को गंभीर चिंता का विषय बताया. संगठन के संयोजक अग्निशेखर ने कहा कि पत्र में लोगों के नाम और निजी संपर्क जानकारी जारी करना और उनके परिवार, ठिकाने और काम की जगहों की जानकारी होने का दावा करना गंभीर मामला है. पनुन कश्मीर ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से पत्र में नामित सभी लोगों और उनके परिवार के सदस्यों की तत्काल और व्यापक सुरक्षा जांच कराने की मांग की है.