scorecardresearch
 

'भीड़ कम होते ही टूटने लगा था CJP नेताओं का हौसला', प्रोटेस्ट पर सोनम वांगचुक का खुलासा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 45 दिनों तक चले आंदोलन को लेकर सोनम वांगचुक ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया है कि भीड़ घटने पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं की हिम्मत टूटने लगी थी. ऐसे में CJP के कुछ नेता आंदोलन को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं थे और कई बार हाथ जोड़कर आंदोलन खत्म करने के लिए कह चुके थे.

Advertisement
X
जंतर-मंतर पर 45 दिनों तक CJP का प्रदर्शन चला था. (Photo- PTI)
जंतर-मंतर पर 45 दिनों तक CJP का प्रदर्शन चला था. (Photo- PTI)

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 45 दिनों तक चले आंदोलन का चेहरा रहे सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया है. 26 दिनों तक आमरण अनशन पर बैठकर आंदोलन की रीढ़ बने 59 साल के वांगचुक ने बताया कि CJP के नेता आंदोलन को खींचने के मूड में नहीं थे.

वांगचुक ने बताया कि CJP के नेता अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे और हाथ जोड़कर आंदोलन से बाहर निकलने का रास्ता मांग रहे थे. यूट्यूबर प्रखर गुप्ता के साथ शनिवार को दिए एक पॉडकास्ट में सोनम वांगचुक ने कई अहम खुलासे किए.

पर्दे के पीछे की कहानी बयां करते हुए वांगचुक ने कहा कि जब अनशन के 8-9 दिनों बाद भीड़ कम होने लगी, तो CJP नेताओं का हौसला डगमगाने लगा था.

'कुछ ने हाथ जोड़कर कहा...'

वांगचुक ने बताया, 'मैं नाम नहीं लूंगा, लेकिन नेतृत्व में शामिल एक-दो लोग हमेशा ये सवाल उठाते थे कि इस आंदोलन से बाहर कैसे निकला जाए. मैंने जब उनसे पूछा कि वो और कितने दिन रुक सकते हैं, तो उनमें से कुछ ने हाथ जोड़कर कहा- सर, हम जाना चाहते हैं. हम इस जगह को छोड़ना चाहते हैं.'

Advertisement

वांगचुक ने आगे कहा, 'CJP का वो जज्बा, जिसके साथ वो बार-बार ऐलान कर रहे थे कि वो आंदोलन वापस नहीं लेंगे, समय-समय पर कई मौकों पर बदलता रहा. मैं कहूंगा कि उनके राजनीतिक दिमाग ने इस बदलते जज्बे में अहम भूमिका निभाई.'

भीड़ घटने के साथ गिरता टूटती गई नेताओं की हिम्मत

सोनम वांगचुक ने बताया कि CJP नेताओं का हौसला पूरी तरह जनता की भीड़ पर निर्भर था. 20 जुलाई को संसद मार्च से ठीक पहले जब वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाया गया था, CJP नेतृत्व को लगता था कि इस आंदोलन का कोई नतीजा नहीं निकलेगा. उनका हौसला टूट चुका था.

जब अनशन खत्म कराने के लिए कई विकल्पों पर विचार हो रहा था. वांगचुक ने पुष्टि की कि अनशन तुड़वाने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम भी सामने लाया गया था, ताकि किसी तरह आंदोलन का सम्मानजनक अंत दिखाया जा सके.

आंदोलन में शामिल होने से पहले वांगचुक ने ली थी परीक्षा

वांगचुक ने बताया कि 20 जून से जब CJP ने आंदोलन की शुरुआत की थी, तब नेताओं ने उनसे समर्थन और अनशन पर बैठने का अनुरोध किया था. उस समय स्विट्जरलैंड में वांगचुक की एक साइंस कॉन्फ्रेंस थी. CJP नेताओं की कमिटमेंट को परखने के लिए उन्होंने कहा कि वो 28 जून को जुड़ेंगे, जबकि पार्टी 20 जून से प्रदर्शन शुरू करें.

Advertisement

CJP नेता इस 8 दिन के इंतजार की बात सुनकर हैरान रह गए थे. हालांकि, जब युवा कार्यकर्ताओं ने 8 दिनों तक मोर्चा संभाले रखा, तब वांगचुक 28 जून को अनशन पर बैठे थे.

यह भी पढ़ें: सोनम वांगचुक ने आमिर खान को कहा 'गजनी', पहली मुलाकात का किया जिक्र, खोली पोल

बता दें कि CJP के उस समय के नेतृत्व में इसके संस्थापक अभिजीत दिपके, को-फाउंडर आशुतोष रांका, सौरव दास और पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया शामिल थे. विजेता दहिया को उनके 'असंवेदनशील आचरण' की वजह से पार्टी से बाहर निकाल दिया गया था. वहीं अब वांगचुक के इन खुलासों ने 45 दिनों के इस बड़े सियासी आंदोलन के पीछे छिपी कहानी को सामने ला दिया है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement