सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) एक इंजीनियर और एजुकेशन रिफॉर्मिस्ट हैं. वह स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) के संस्थापक-निदेशक हैं, जिसकी स्थापना 1988 में छात्रों के एक समूह ने की थी.
सोनम वांगचुक ने जून 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और परीक्षा प्रणाली में सुधार शामिल थे. लंबी भूख हड़ताल के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया. इस घटना के बाद प्रदर्शन और तेज हो गया तथा छात्रों और विभिन्न संगठनों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन किए. वांगचुक ने 26 दिनों के बाद 24 जुलाई 2026 को अपनी अनशन खत्म की.
उन्हें SECMOL परिसर को डिजाइन करने के लिए भी जाना जाता है जो सौर ऊर्जा पर चलता है और खाना पकाने, रोशनी या हीटिंग के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग नहीं करता है. 1988 में स्नातक करने के बाद, वांगचुक अपने भाई और पांच साथियों के साथ स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ़ लद्दाख (SECMOL) की शुरुआत की.
बता दें कि सोनम वांगचुक ने 6 मार्च 2024 को '#SAVELADAKH, #SAVEHIMALAYAS' के अभियान के साथ 21 दिनों का आमरण अनशन शुरू किया था. उन्होंने कहा था कि यह अनशन जरूरत पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है. उनके साथ 1500 लोग 18 मार्च 2024 को एक दिवसीय भूख हड़ताल पर थे. उन्होंने एक वीडियो शेयर किया और बताया कि कैसे 250 लोग उनके समर्थन में रात को भूखे सोए. वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, जो प्रदेश के स्थानीय लोगों को आदिवासी इलाके में एडमिनिस्ट्रेशन का अधिकार देगा (Sonam Wangchuk on Fast).
सोनम वांगचुक का दिल्ली आंदोलन लद्दाख से जुड़े संवैधानिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर केंद्रित था. सितंबर 2024 में उन्होंने 'दिल्ली चलो पदयात्रा' शुरू की, जो लेह से दिल्ली तक निकाली गई. इस आंदोलन की प्रमुख मांगों में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत संरक्षण, पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और क्षेत्र के नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा शामिल थी.
वांगचुक ने 1994 में सरकारी स्कूल प्रणाली में सुधार लाने के लिए सरकार, ग्रामीण समुदायों और नागरिक समाज के सहयोग से 'ऑपरेशन न्यू होप' के शुभारंभ में भूमिका निभाई थी.
जून 1993 से अगस्त 2005 तक, वांगचुक ने 2001 में लद्दाख की एकमात्र प्रिंट पत्रिका लाडाग्स मेलोंग की स्थापना की और संपादक के रूप में भी काम किया.
जून 2020 में जब भारत-चीन सीमा पर सैनिकों के बीच झड़प हुआ, उसके जवाब में, सोनम वांगचुक ने भारतीयों से 'वॉलेट पावर' का उपयोग करने और चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की. इस अपील को प्रमुख मीडिया ने कवर किया और विभिन्न मशहूर हस्तियों ने इसका समर्थन भी किया. 15 जून 2020 को गलवान घाटी में झड़प के बाद, पूरे भारत में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया गया था.
Sonam Wangchuk 2.0: देवेंद्र नाथ महतो रांची के Gen-G प्रोटेस्ट का चेहरा बन चुके हैं. संस्कृत और कुरमाली में PG, B.Ed की डिग्री और आंदोलनों का लंबा इतिहास... जानिए कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जिनकी भूख हड़ताल ने झारखंड सरकार की नींद उड़ा दी है.
शिक्षा में सुधार के लिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान आमिर खान को इस एक्टिविस्ट के समर्थन न करने के कारण ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था. अब सोनम वांगचुक की पत्नी ने 'द ओडिसी' पर बात की है.
सोनम वांगचुक कश्मीर से लौटकर सिंधु नदी किनारे अपने गांव पहुंचे और वीडियो संदेश जारी किया. उन्होंने सरकार से अनशन के दौरान किए गए लिखित वादे पूरे करने और प्रदर्शनकारी छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने की मांग की. आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की भी बात कही.
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वंदे भारत ट्रेन से दिल्ली से श्रीनगर तक का सफर किया. उन्होंने भारतीय रेलवे और चिनाब ब्रिज की सराहना की, साथ ही कहा कि अब उन्हें सरकार के वादे पूरे होने पर भी गर्व करने का इंतजार है. वीडियो में देखें सरकार के वादों को लेकर क्या-क्या बात हुई?
Sonam Wangchuk Video: सोनम वांगचुक ने वीडियो में भारतीय रेलवे और उसके इंजीनियरिंग की खुलकर प्रशंसा की है. वो पहली बार वंदे भारत ट्रेन से सफर कर रहे थे. वांगचुक ने कहा कि ट्रेन उनका हमेशा से पसंदीदा यात्रा का माध्यम रहा है.
Solar Cooking Hack: सोनम वांगचुक के SECMOL का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सिर्फ एल्यूमीनियम फॉयल, कांच और सूरज की रोशनी की मदद से बिना गैस और बिजली के खाना पकाया जा रहा है. जानिए कैसे 35 साल पुरानी ये सोलर कुकिंग तकनीक आज भी 150 लोगों का खाना तैयार कर रही है.
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार दोपहर मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. वांगचुक ने सभी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और देशभर से दुआएं भेजने वाले लोगों का आभार जताते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के युवाओं और व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग का आंदोलन है.
सीजेपी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जश्न मनाया था, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस पर अब सोनम वांगचुक ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हमने जीत के साथ विनम्रता होनी चाहिए.
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों की राजनीति की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों के झंडे अलग होने के बावजूद काम करने का तरीका एक जैसा है. गीतांजलि के मुताबिक, जहां असहमति का जवाब बातचीत से दिया जाए और देशभक्ति को पार्टी से जुड़ाव से नहीं मापा जाना चाहिए.
मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सोनम वांगचुक राजघाट पहुंचे. जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी. सोनम वांगचुक ने कहा कि गांधी की सिखाई बातें आज भी कारगर हैं. उन्होंने अहिंसा को सबसे प्रभावी रास्ता बताते हुए कहा कि शासक जनता की आज भी सुनता है. देखें वीडियो.
राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक ने महात्मा गांधी के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी अहिंसा सबसे प्रभावी रास्ता है. उनका मानना है कि सरकारों को जनता की आवाज सुननी चाहिए और संवाद से ही समाधान निकलता है.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि पार्टी कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेगी. वहीं, अभिजीत दिपके ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
Sonam Wangchuk 26 दिन के आमरण अनशन के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं। उन्हें 24 जुलाई को Medanta Hospital में भर्ती कराया गया था।अब हालत में सुधार के बाद उन्होंने बताया कि लद्दाख लौटने से पहले वे Rajghat जाकर Mahatma Gandhi को श्रद्धांजलि देंगे।
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहे हैं. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए बताया कि अपने घर लद्दाख जाने से पहले वे राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.
पिछले बीस घंटे में बहुत कुछ छात्र आंदोलन को लेकर हुआ है. अगले 24 घंटे भी बहुत अहम हैं. लगातार सरकार फैसले ले रही है गुरुवार रात ग्यारह बजकर बावन मिनट पर वीडियो संदेश जारी किया. पीएम ने कहा कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला कानून लाने जा रही है. इसके कुछ ही देर बाद रात में ही साढे बारह बजेे केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के अस्पताल में 26 दिन से अनशन करते सोनम वांगचुक से मिलते हैं. देखें खबरदार.
अभिजीत दिपके इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे. 28 जून को जब सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे तो इससे आंदोलन को नैतिक ताकत मिली. देशभर में इसकी चर्चा शुरू हुई. जब वांगचुक की तबीयत बिगड़ी तो दिपके ने जंतर-मंतर की पूरी कमान संभाल ली.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को धन्यवाद दिया. कारण, सीजेआई के एक तंज से ही इस पूरे आंदोलन की नींव रखी गई. सोशल मीडिया से शुरू होकर कॉकरोच क्रांति देश की सड़कों तक उतर आई.
नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का जो आंदोलन 36 दिन पहले शुरू हुआ था, वो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हो गया. जंतर-मंतर पर जब प्रदर्शनकारी जश्न मना रहे थे तो उसमें लोकतंत्र की ताकत दिखाई दी. आखिर ये घटना भारतीय लोकतंत्र के लिए क्यों एक टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है? देखें ब्लैक एंड व्हाइट.
Cockroach Janta Party Protest Live Updates: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र आंदोलन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की रक्षा और आंदोलन को राष्ट्रविरोधी ताकतों से बचाने के लिए लिया गया है. वहीं, केंद्र सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी. जंतर-मंतर पर आंदोलन और वार्ता का दौर जारी है.
NEET-UG विवाद से शुरू हुआ आंदोलन करीब दो महीने तक देशभर में चर्चा का विषय बना रहा. CJI की टिप्पणी, CJP के गठन, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के समर्थन के बाद यह आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंचा.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के मंच से जीत की घोषणा की. लेकिन, इसमें एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का कोई जिक्र नहीं था. वांगचुक के 26 दिन के अनशन ने इस विरोध प्रदर्शन को एक आंदोलन में बदल दिया था.