प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठक की. दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों के साथ पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए.
वहीं पेजेशकियन ने हालिया युद्ध के दौरान भारत के समर्थन और सहयोग की सराहना की और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए नई दिल्ली से अपनी कूटनीतिक क्षमताओं का इस्तेमाल करने की अपील की.
ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पेजेशकियन ने कहा कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की है. उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करने के बजाय उसने युद्ध और असुरक्षा का रास्ता चुना.
पेजेशकियन ने कहा, 'ईरान ने कभी जंग का समर्थन नहीं किया. हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने लोगों को खतरे और असुरक्षा से बचाएं और उनके लिए शांति तथा सुरक्षा की परिस्थितियां तैयार करें.'
'समझौतों के प्रति ईरान ने अपनी जिम्मेदारी निभाई'
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर पहले हुए समझौतों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौतों के तहत स्वीकार की गई अपनी जिम्मेदारियों का पालन किया है, लेकिन अमेरिकी पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहा. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद ईरान सहमति और आपसी समझ कायम करने की दिशा में काम करता रहेगा. पेजेशकियन के मुताबिक युद्ध जारी रहना न तो ईरान के हित में है, न क्षेत्र के और न ही मानवता के.
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के भीतर कुछ समूह ऐसे हैं, जो युद्ध जारी रहने को अपने हित में देखते हैं और संघर्ष को बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इसके विपरीत शांति के पक्ष में खड़ी ताकतों को मजबूत करके क्षेत्र को स्थिरता और सुरक्षा की ओर ले जाने की जरूरत है.
ईरान ने भारत से मांगी कूटनीतिक मदद
पेजेशकियन ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत की भूमिका का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से विभिन्न पक्षों के साथ नई दिल्ली के संपर्कों का इस्तेमाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारत अपने प्रभाव और व्यापक संपर्कों के जरिए संबंधित पक्षों को युद्ध और रक्तपात के रास्ते से हटाकर बातचीत और समझौते की दिशा में वापस लाने में मदद कर सकता है.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्र और दुनिया के जिम्मेदार पक्ष शांति, सुरक्षा और स्थिरता चाहते हैं. मौजूदा समस्याओं का समाधान बातचीत और सहयोग में है और असुरक्षा तथा संघर्ष को फैलने से रोकने के लिए उपलब्ध सभी क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता
भारत की ओर से जारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन ने द्विपक्षीय संबंधों के अलावा पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष और बदलती परिस्थितियों पर विचार साझा किए.
पीएम मोदी ने क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत लगातार इस बात का समर्थन करता रहा है कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए. उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
प्रधानमंत्री ने समुद्री आवागमन और व्यापार की स्वतंत्रता की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. इसमें वाणिज्यिक जहाज और उन पर काम करने वाले नाविक भी शामिल हैं.
भारत के साथ संबंध बढ़ाने को तैयार ईरान
बैठक में भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. पेजेशकियन ने दोनों देशों के पुराने और मैत्रीपूर्ण रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि तेहरान भारत के साथ सभी क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करने के लिए तैयार है.
उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के पास राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं. दोनों देश द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करके और प्रतिबंधों के प्रभावों को निष्प्रभावी करते हुए संबंधों को नए स्तर तक ले जा सकते हैं.
पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के दूसरे देशों के साथ सहयोग में बाधाएं पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इन दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद तेहरान भारत के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है.
BRICS समिट के लिए पेजेशकियन को भारत आने का न्योता
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर ईरान के साथ मिलकर काम करने की भारत की इच्छा दोहराई. उन्होंने राष्ट्रपति पेजेशकियन से कहा कि वह भारत में होने वाले आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं.
इस तरह दोनों नेताओं की बैठक में जहां भारत-ईरान संबंधों को विस्तार देने पर जोर रहा, वहीं पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को बातचीत तथा कूटनीति के जरिए समाप्त करने की जरूरत प्रमुख मुद्दा रही.