दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने के 24 घंटे बाद भी बचाव कार्य जारी है. इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई है. घटनास्थल पर अभी भी मलबे के नीचे दबे लोगों को बचाने के प्रयास जारी हैं. NDRF और दमकल विभाग की टीमें अब भी बचाव कार्य में लगी हैं. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एमसीडी के पांच अधिकारियों- डिप्टी कमिश्नर, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
गली छात्रों, स्थानीय लोगों, बचावकर्मियों और इमरजेंसी गाड़ियों से भरी हुई है. गली इतनी संकरी है कि एक गाड़ी के आने पर भी रास्ता जाम हो सकता है. इसके कारण बचाव कार्य और मुश्किल हो गया है. यहां सिर्फ गिरी हुई इमारत से ही खतरा नहीं है. आज तक की रिपोर्टर ने वहां पहुंचकर देखा कि भीड़-भाड़ वाली इन गलियों में इमारतें कितनी पास-पास बनी हैं. कुछ जगहों पर तो दो बालकनी के बीच की दूरी बस एक हाथ जितनी ही है.
बिजली के खंभे और उलझे और हुए तार बालकनियों के पास बहुत ही खतरनाक ढंग से लटके हुए हैं.
गिरी हुई इमारत से महज कदम की दूरी पर आज तक की टीम घर नंबर 111-112 में गई. यहां दो इमारतों के लिए एक ही सीढ़ी है, और वहां तकरीबन 60-70 छात्र रहते हैं. यहां टूटी और टपकती छतें हैं, बिना खिड़की वाली कमरे हैं और एक खंभे की नींव के पास दरारें हैं. इन इमारतों में 18 बिजली के मीटर और छह पानी के मीटर भी लगे हैं. इन सबके बावजूद, इन इमारतों में लोग रह रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, यहां एक बेड का किराया 15 हजार तक है.
बिहार से दिल्ली आई ऋत्विका वेंकटेश्वर (बदला हुआ नाम) फर्स्ट ईयर कॉलेज की छात्रा हैं. वे करीब दो महीने पहले ही दिल्ली आईं और फिलहाल सत्य निकेतन में एक PG में रह रही हैं. कल दोपहर करीब 1.30 बजे हुई सत्य निकेतन में घटना के बाद वह बहुत डरी हुई हैं. उनका कहना है कि घटना के बाद पूरी रात वह ठीक से सो नहीं पाईं.
यह भी पढ़ें: सत्य निकेतन हादसे पर HC की फटकार, कहा- बिल्डिंग मालिक ही नहीं MCD भी जिम्मेदार
ऋत्विका के मुताबिक, रात में कई छात्र मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में इधर-उधर जगह तलाशते रहे. उनके लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि जिस इमारत में वे रह रहे हैं, वहां खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करें. वह आगे बताती हैं कि इमारत के बाहर तारों का जाल भी है, जिसे देखकर उन्हें लगातार डर लगा रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए.
जब आजतक की रिपोर्टर ऋत्विका की कहानी जानने के लिए उनके पास पहुंची तो, उन्होंने देखा की जो बिल्डिंग गिरी है, उसके एक हाथ की दूरी पर ही ऋत्विका का पीजी था. इसके साथ ही उन्होंने वहां के तारों के जाल को भी दिखाया तो वहां केवल न सही से सिमेंटिंग, पतली गलियां और खतरनाक तारों का जाल दिखता है.
ऋत्विका बताती हैं कि उनकी रूममेट की परीक्षा थी. घटना और उसके बाद पैदा हुए डर के कारण वह पूरी रात सो नहीं पाईं. उन्होंने ये भी बताया कि इतने पैसे देने के बाद भी उन्हें बेसिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. लाइट की सुविधा तक नहीं मिलती है. उन्होंने बताया कि उनके रूममेट की SSC की परीक्षा थी लेकिन सुबह से गई लाइट पूरी दिन नहीं आई. वह बहुत परेशान थी कि वह कैसे पढ़े.
जब सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरी तो मैत्रेयी कॉलेज के छात्र भी मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने वहां मौजूद लोगों को पानी और बिस्कुट बांटे.
सत्य निकेतन इलाके में बहुज ज्यादा भीड़-भाड़ वाले PG हैं. इमारतें एक-दूसरे से सटी हुई हैं, गलियां बहुत संकरी हैं. बचाव अभियान तो खत्म हो जाएगा लेकिन यह खतरा तब तक बना रहेगा जब तक हर जोखिम वाली इमारत की जांच नहीं होती और असुरक्षित इमारतों को खाली नहीं कराया जाता.