नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद सरकार एक्शन मोड में आ गई है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 के पार पहुंच गया है. ऐसे में अब दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया गया है.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के NCR क्षेत्र में GRAP-1 के तहत तय उपायों को लागू करने और संबंधित अधिकारियों को लगातार स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं.
GRAP-1 लागू होने के बाद प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है. होटल, रेस्तरां और खुले में खाने-पीने की दुकानों पर तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है.
कूड़ा, प्लास्टिक और सूखे पत्ते जलाने पर रोक
इसके अलावा सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है. खुले में कूड़ा, प्लास्टिक और सूखे पत्ते जलाने पर भी रोक है. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के नोएडा क्षेत्र अधिकारी रितेश तिवारी ने बताया कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभाग की टीमें लगातार फील्ड में निरीक्षण कर रही हैं.
अक्टूबर और नवंबर के दौरान अब तक करीब 30 साइटों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 17 साइटों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया. इन मामलों में करीब 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है.
रितेश तिवारी के मुताबिक, विभाग की ओर से कार्रवाई की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भी साझा की जा रही है, ताकि लोगों में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जागरूकता बढ़े और निर्माण कार्यों समेत अन्य गतिविधियों में तय नियमों का पालन तय हो सके.
प्रदूषण फैलाने पर सख्त कार्रवाई
क्षेत्र अधिकारी ने बताया कि पुस्ता रोड के आसपास संचालित रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) और हॉट मिक्स प्लांट पर भी सख्ती की जा रही है. इन इकाइयों पर प्रदूषण फैलाने के मामले में करीब 1.28 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. विभाग का कहना है कि प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए नियमित निरीक्षण और कार्रवाई जारी रहेगी.
नोएडा क्षेत्र में खराब सड़कों से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण की समस्या को बढ़ा रही है. रितेश तिवारी ने बताया कि इस संबंध में ऑथोरिटी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से दो-तीन बार व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत की गई है. इसके अलावा विभाग को पत्राचार के जरिए भी सड़क की हालत सुधारने के लिए कहा गया है.
उन्होंने बताया कि संबंधित सड़क के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग को धनराशि दिए जाने की जानकारी मिली है और विभाग की ओर से जल्द सड़क बनाने की बात कही गई है. सड़क की मरम्मत और निर्माण होने से धूल के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है. UPPCB के अधिकारी इस मामले में सिंचाई विभाग के लगातार संपर्क में हैं, ताकि सड़क की समस्या का जल्द समाधान हो सके.
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि GRAP-1 लागू होने के बाद फील्ड निरीक्षण और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा रही है. विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके.