बिहार में शुक्रवार को MLC चुनाव के लिए वोटिंग होनी है, लेकिन आठ सीटों के मुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा पटना ग्रेजुएट सीट की है. यहां मुकाबला जेडीयू के नीरज कुमार और मोकामा के विधायक अनंत सिंह के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है. एक तरफ नीरज कुमार अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ अनंत सिंह ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.
चुनाव प्रचार के दौरान जेडीयू के इन दोनों नेताओं के बीच ऐसी जुबानी जंग हुई कि मुकाबला ‘नौटंकी’, ‘टोटका’ और ‘पुदीना सिंह’ तक पहुंच गया.
वोटिंग से तीन दिन पहले जब नीरज कुमार की तबीयत खराब हुई और वह अस्पताल में भर्ती हुए तो उसी वक्त अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर निशाना साधते हुए उन पर नौटंकी करने और टोटका करने जैसे तंज कसे. प्रचार प्रसार के दौरान अनंत सिंह का खुद को ‘पुदीना सिंह’ बताने वाला उनका अंदाज भी चर्चा में रहा. दोनों नेताओं के बीच इस बयानबाजी ने पटना ग्रेजुएट सीट के चुनाव को बिहार की सबसे हाई प्रोफाइल लड़ाई बना दिया.
लेकिन इस लड़ाई का इतिहास इन दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों में चली बयानबाजी नहीं है. अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक अदावत पुरानी है. 2015 के मोकामा विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे और उन्होंने जेडीयू के नीरज कुमार को हरा दिया था. इसके बाद भी दोनों नेताओं के बीच तल्खी कई बार सामने आई.
अब एमएलसी चुनाव में जेडीयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है, लेकिन अनंत सिंह उनके समर्थन में नहीं हैं. वह जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं. यानी एक तरफ जेडीयू का आधिकारिक उम्मीदवार है, तो दूसरी तरफ उसी पार्टी के विधायक का विरोध. इसी वजह से यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं रह गया है बल्कि अनंत सिंह और नीरज कुमार की राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई भी बन गया है.
इस पूरे विवाद में जेडीयू नेतृत्व की भूमिका भी अहम है. पार्टी के भीतर सुलह कराने की कोशिशें हुईं मगर सब फेल. जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा से लेकर केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह तक ने दोनों नेताओं के बीच में सुलह सफाई करने की कोशिश की लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला. लल्लन सिंह तो एक तरीके से कह तो अनंत सिंह के ही पक्ष में खड़े नजर आए.
अब सवाल है कि पार्टी का संगठन नीरज कुमार के पक्ष में कितना एकजुट रहता है और अनंत सिंह का समर्थन दूसरे उम्मीदवार को कितना फायदा पहुंचाता है. अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार की इस लड़ाई में अब सबकी नजर वोटिंग पर है और उसके बाद 27 अक्टूबर का इंतजार रहेगा जब चुनाव के नतीजे आएंगे.