दिल्ली में हल्की ठंड के साथ प्रदूषण की भी एंट्री हो गई है. एक्यूआई 200 से पार पहुंच गया है और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में जीआरएपी के स्टेज-1 को लागू कर दिया गया है. जीआरएपी यानी ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट का प्लान है, जिसमें प्रदूषण को रोकने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं ताकि प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके. इसमें 4 स्टेज में पाबंदियां लगाई जाती हैं और पहले स्टेज की पाबंदियां लग चुकी हैं. ऐसे में जानते हैं कि जीआरएपी स्टेज-1 के नए नियम जो हाल ही में लागू किए गए हैं और स्टेज-1 में क्या-क्या काम नहीं कर सकते. साथ ही जानते हैं कि कैसे पाबंदियां आगे के स्टेज में बढ़ती जाती हैं.
कौन से हैं नए नियम?
बता दें कि 28 सितंबर 2026 को CAQM की बैठक में जीआरएपी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई और 29 सितंबर 2026 को संशोधित जीआरएपी शेड्यूल जारी किया गया. हाल ही में जो बदलाव किए गए हैं, उनमें धूल नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कुछ उपायों को एक-दूसरे के साथ मर्ज कर दिया गया है.
डीजल जनरेटर सेट (डीजी सेट) और एनसीआर के साथ आसपास के राज्यों से आने वाली बीएश-IV या उससे पुराने मानक की बसों के प्रवेश से जुड़े उपायों को स्टेज-2 से हटाकर स्टेज-1 में शामिल किया गया है. इसका मतलब यह है कि पहले ज्यादा प्रदूषण होने पर जो पाबंदियां लगाई जाती थीं, वो अब पहले ही लगा दी जाएंगी.
इसके अलावा स्टेज-3 के कुछ नियमों में थोड़ी राहत दी गई है, जिसमें सड़क के गड्ढों की मरम्मत जैसे काम शामिल हैं. बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV या उससे पुराने मानक वाले चारपहिया हल्के वाहनों पर प्रतिबंध का दायरा बढ़ाकर सोनीपत तक कर दिया गया है. स्टेज-3 और स्टेज-4 में जरूरी सामान ले जाने वाले बीएस-IV और उससे पुराने मानक के मालवाहक वाहनों को मिलने वाली छूट खत्म कर दी गई है.

किन चीजों पर लग गई है रोक?
सबसे पहले जानते हैं कि जीआरएपी स्टेज-1 में क्या पाबंदियां रहेंगी, जो दिल्ली-एनसीआर में लागू भी हो चुकी हैं. एक्यूआई 201 से 300 होने पर इसे लागू किया जाता है. इस स्टेज में धूल, कचरा, गाड़ियों और जनरेटर से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय लागू होते हैं. पॉइंटर्स में जानिए किस स्टेज में क्या-क्या नहीं कर पाएंगे.
पत्तियां, कूड़ा और अन्य कचरा खुले में जलाने पर रोक रहेगी, यानी खुले में कचरा नहीं जला सकते.
जहां कंस्ट्रक्शन हो रहा है, वहां धूल उड़ने नहीं देनी है. निर्माण सामग्री को खुले में रखने, ढकने और धूल रोकने के नियमों का पालन करना होगा. नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है. साथ ही निर्माण मलबा खुले में नहीं फेंका जा सकता.
प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन नहीं चला सकेंगे. वैध पीयूसी प्रमाणपत्र और वाहन प्रदूषण से जुड़े लागू नियमों का पालन करना होगा.
बीएस-IV और उससे पुराने मानक वाली प्रतिबंधित इंटर-सिटी बसों को दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.
डीजल जनरेटर सेट मनमाने तरीके से नहीं चलाए जा सकेंगे और उनके संचालन पर नियमों के अनुसार पाबंदी रहेगी.
धूल नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट से जुड़े निर्धारित उपाय लागू रहेंगे.
मेट्रो पार्किंग को छोड़कर पार्किंग फीस को बढ़ा दिया गया है.
कारों को लेकर क्या नियम हैं?
जीआरएपी स्टेज-1 में आम तौर पर निजी वाहनों पर कोई अलग प्रतिबंध नहीं लगाया जाता. दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-IV निजी वाहन निर्धारित आयु सीमा और लागू नियमों की शर्तों के अधीन चल सकते हैं. हालांकि, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक बीएस-VI से कम मानक वाले दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों पर अलग से प्रतिबंध लग सकता है, जिसमें छूट प्राप्त श्रेणियों के वाहन शामिल नहीं होंगे.


जीआरएपी स्टेज-2 में क्या होता है?
स्टेज-2 में सबसे पहली बात यह है कि स्टेज-1 के उपाय जारी रहते हैं. इसके अलावा प्रदूषण कम करने के लिए निजी वाहनों और ऊर्जा के इस्तेमाल पर अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं. इस स्टेज में गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जा सकता है. सड़कों पर धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है. होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे के ढाबों/भोजनालयों में तंदूर या अन्य कामों के लिए कोयला और लकड़ी जलाने की अनुमति नहीं होती. निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होता है.
जीआरएपी स्टेज-3 में क्या होता है?
इसमें स्टेज-2 और स्टेज-1 की पाबंदियों के साथ ही सभी प्रकार के गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है. मिट्टी का काम, पाइलिंग (नींव के लिए खंभे गाड़ना), खुली खाई खोदना, वेल्डिंग, पेंटिंग, प्लास्टरिंग और टाइल लगाने के काम बंद कर दिए जाते हैं. कच्ची सड़कों और खुले क्षेत्रों में सीमेंट, रेत, बालू, गिट्टी और फ्लाई ऐश जैसी निर्माण सामग्रियों के परिवहन पर पाबंदी होती है. स्टोन क्रशर, ईंट भट्ठे और खनन का काम पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है. बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल वाली चार पहिया हल्की गाड़ियों के चलने पर प्रतिबंध रहता है. स्कूलों में कक्षाएं ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्देश दिया जा सकता है.
जीआरएपी स्टेज-4 में क्या होता है?
यह AQI 450 से अधिक होने पर लागू किया जाता है. इस दौरान हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, पावर ट्रांसमिशन और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं सहित सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है. इसके अलावा वाहनों पर काफी पाबंदियां लगा दी जाती हैं. छोटी कक्षाओं के लिए ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में कक्षाएं संचालित करने का निर्देश दिया जा सकता है. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% क्षमता के साथ काम करने और बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया जा सकता है. साथ ही सरकार कुछ और पाबंदियां भी लगा सकती है.