संसद का मानसून सत्र इस समय चल रहा है. इस बीच चर्चा है कि सरकार इस सत्र में विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन करने के लिए नया बिल ला सकती है. कांग्रेस पार्टी ने इस बिल का पुरजोर विरोध करने का मन बना लिया है.
कांग्रेस का कहना है कि यह बिल 'ईसाई विरोधी' है. इस बिल से देश में काम कर रहे अल्पसंख्यक संगठनों को बहुत नुकसान होगा.
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि एफसीआरए के नए नियमों से देश के दूर-दराज, ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में चल रहे ईसाई संगठनों, स्कूलों और अस्पतालों पर बुरा असर पड़ेगा.
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन का कहना है कि देश के कई मुश्किल इलाकों में ये संगठन शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन, सरकार इन्हें दबाना चाहती है.
उन्होंने आरोप लगाया कि नए बिल के नियमों के तहत जिला मजिस्ट्रेट (DM) या उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) नियमों के उल्लंघन पर किसी भी संस्था की संपत्ति को अपने कब्जे में ले सकते हैं. वे पुराने मामलों में भी जांच कर ऐसा कर सकते हैं.
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी साफ कह दिया है कि अगर सरकार इन दो-तीन दिनों में जल्दबाजी में यह बिल लाना चाहती है, तो उनका यह सपना पूरा नहीं होने दिया जाएगा.
राजनीतिक फायदा उठाने की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इसे सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं मान रही, बल्कि इसके जरिए अल्पसंख्यक वोटर्स को अपने पाले में लाने का बड़ा मौका देख रही है. केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों में ईसाई आबादी अच्छी खासी है. इसके अलावा आंध्र प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी इनकी संख्या है.
विपक्ष को लगता है कि इस मुद्दे के जरिए इन वोटर्स को एकजुट किया जा सकता है. पार्टी को लगता है कि हाल ही में केरल विधानसभा चुनावों के दौरान भी इसी मुद्दे से उन्हें फायदा मिला था.
पहले भी बजट सत्र के दौरान केरल चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस ने इस पर खूब हंगामा किया था. तब भारी विरोध को देखते हुए सरकार ने साफ कर दिया था कि अभी ऐसा कोई बिल लाने का इरादा नहीं है. हालांकि, तब तक इस मुद्दे की चर्चा जनता के बीच पहुंच चुकी थी.
समाजवादी पार्टी भी करेगी बिल का पुरजोर विरोध
सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी (SP) ने भी कड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने अपने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को पत्र जारी कर कहा है कि वे 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में अनिवार्य रूप से मौजूद रहें.
माना जा रहा है कि जब केंद्र सरकार इन तारीखों में एफसीआरए बिल संसद में पेश करेगी, तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर इसका कड़ा विरोध करेगा. इसे देखते हुए सभी विपक्षी दलों ने अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करनी शुरू कर दी है ताकि सदन में सरकार को घेरा जा सके.
क्या है FCRA बिल
फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) एक ऐसा कानून है जो भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), चैरिटेबल ट्रस्टों, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक निकायों द्वारा विदेशी फंडिंग को लेने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है. इसके तहत विदेशी चंदा पाने के लिए गृह मंत्रालय से रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इसे हर पांच साल पर रिन्यू कराना पड़ता है.
प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन बिल में यह प्रावधान किया गया है कि अगर किसी संस्था का लाइसेंस रद्द हो जाता है, सरेंडर कर दिया जाता है या समय पर रिन्यू नहीं होता तो विदेशी फंड से बनाई गई उसकी संपत्तियों और बची हुई राशि के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए सरकार एक 'नामित प्राधिकारी' (Designated Authority) नियुक्त करेगी.
सरकार का तर्क है कि इससे विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता आएगी और नियमों का कड़ाई से पालन होगा. वहीं आलोचकों और विपक्षी दलों का मानना है कि इससे सरकार को संस्थाओं की संपत्तियों पर नियंत्रण करने की अत्यधिक शक्तियां मिल जाएंगी, जिससे दूर-दराज के इलाकों में अल्पसंख्यक समुदायों के चलाए जा रहे स्कूल और अस्पताल प्रभावित हो सकते हैं.
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