सितंबर 2023 में दिल्ली की एक नई इमारत अचानक पूरी दुनिया की नजरों में आ गई थी. अमेरिका के राष्ट्रपति से लेकर दुनिया के सबसे ताकतवर नेता तक, सभी एक छत के नीचे मौजूद थे. मौका था G20 शिखर सम्मेलन का और मंच था भारत मंडपम. अब तीन साल बाद एक बार फिर इसी भारत मंडपम पर दुनिया की नजरें टिकने वाली हैं.
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सदस्य देशों के साथ कई अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे. सवाल यह है कि आखिर कुछ ही सालों में भारत मंडपम दुनिया के सबसे बड़े और अहम आयोजनों का केंद्र कैसे बन गया.
भारत मंडपम का नाम सबसे ज्यादा 2023 के G20 सम्मेलन के दौरान चर्चा में आया था. उस समय भारत ने सिर्फ एक कामयाब सम्मेलन करके ही नहीं दिखाया, बल्कि यह भी जता दिया कि वह अब दुनिया के सबसे बड़े आयोजनों के लिए आधुनिक ढांचा तैयार कर चुका है. उस सम्मेलन में अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे बड़े देशों के नेता भारत मंडपम पहुंचे थे और इसकी तस्वीरें पूरी दुनिया में गईं.
अब G20 के बाद इसी जगह BRICS सम्मेलन होने जा रहा है, जो अपने आप में खास है क्योंकि दोनों मंचों की प्रकृति अलग है. G20 दुनिया की बड़ी विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जबकि BRICS को उभरती अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साऊथ की आवाज के तौर पर देखा जाता है. यानी G20 ने भारत मंडपम को दुनिया के सामने पेश किया था और अब BRICS यह साबित करने का मौका है कि यह जगह वैश्विक कूटनीति के बड़े और स्थायी केंद्रों में शामिल हो चुकी है.
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भारत मंडपम की कहानी असल में दिल्ली के प्रगति मैदान के बदलते स्वरूप की भी कहानी है. लंबे समय तक प्रगति मैदान की पहचान भारत के सबसे बड़े प्रदर्शनी स्थल के तौर पर रही, जहां व्यापार मेले और किताबों के मेले लगते थे. लेकिन भारत मंडपम बनने के बाद इस जगह की भूमिका पूरी तरह बदल गई. अब यहां सिर्फ प्रदर्शनियां नहीं लगतीं, बल्कि दुनिया भर के नेताओं की बैठकें भी हो सकती हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित हो सकते हैं.
किसी देश की ताकत सिर्फ उसकी सेना या अर्थव्यवस्था से तय नहीं होती. दुनिया के बड़े नेताओं को एक साथ बुलाकर सफलतापूर्वक मेजबानी करने की क्षमता भी उसकी वैश्विक स्थिति मजबूत करती है. भारत मंडपम इसी क्षमता का उदाहरण बन चुका है. एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए सिर्फ बड़ा हॉल काफी नहीं होता, इसके लिए मजबूत सुरक्षा, मीडिया सुविधाएं, हजारों प्रतिनिधियों के लिए इंतजाम, बेहतर कनेक्टिविटी और पास में होटल तथा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क भी चाहिए होता है. दिल्ली में भारत मंडपम इन सभी जरूरतों को पूरा करने वाले अहम केंद्र के रूप में उभरा है.
भारत मंडपम के तेजी से अहम बनने के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण इसका आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो बड़े सम्मेलन और प्रदर्शनी एक साथ आयोजित करने की क्षमता रखता है. दूसरा कारण इसकी लोकेशन है, दिल्ली देश की राजनीतिक राजधानी है जहां सरकार, विदेशी दूतावास, बड़े होटल और एयरपोर्ट सब पास ही मौजूद हैं. तीसरा कारण सुरक्षा है, G20 जैसे आयोजन के बाद भारत मंडपम और उसके आसपास बड़े आयोजनों के लिए सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट का अनुभव भी तैयार हो चुका है. चौथा कारण भारत की ब्रांडिंग है, भारत मंडपम को भारतीय संस्कृति और आधुनिकता के मेल के तौर पर पेश किया गया है, ताकि यहां आने वाला हर विदेशी प्रतिनिधि भारत की एक नई तस्वीर भी देख सके.
G20 के बाद भारत मंडपम की पहचान एक आयोजन तक सीमित नहीं रही. यहां लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, व्यापारिक आयोजन और प्रदर्शनियां हो रही हैं. अगस्त 2026 में भी यहां बड़े व्यापारिक आयोजनों के जरिए भारत की औद्योगिक क्षमता दुनिया के सामने रखी गई. इसके अलावा अगस्त में ही BRICS सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक भी भारत मंडपम में हुई थी, जिसमें पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. इससे साफ है कि भारत मंडपम सिर्फ नेताओं की सालाना बैठकों का मंच नहीं, बल्कि लगातार चलने वाले वैश्विक सहयोग के कार्यक्रमों का भी केंद्र बन चुका है.
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 2026 भारत के लिए खास साल है, क्योंकि यह BRICS के गठन के 20 साल पूरे होने का भी मौका है. भारत की अध्यक्षता की थीम है मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास. इस दौरान देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और बड़े कार्यक्रम हो चुके हैं, यानी भारत BRICS की अध्यक्षता को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखना चाहता. अब इसका सबसे बड़ा पड़ाव भारत मंडपम में होने वाला शिखर सम्मेलन है, जहां व्यापार, वित्त, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों की चिंताओं जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.
भारत मंडपम में G20 और BRICS का आयोजन एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है. G20 के मंच पर भारत ने अमेरिका और यूरोप की बड़ी ताकतों से लेकर एशिया और अफ्रीका के देशों तक को साथ लाने की कोशिश की थी, जिसमें अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाया जाना भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी रही. वहीं BRICS उन देशों का समूह है जो वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहते हैं, और इसे ग्लोबन साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के तौर पर देखा जाता है.
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BRICS सम्मेलन सिर्फ भारत मंडपम के अंदर होने वाला आयोजन नहीं है, इसके लिए पूरी दिल्ली तैयार हो रही है. सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है, वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए कई सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था हुई है और दिल्ली पुलिस मोटरकेड रिहर्सल भी कर चुकी है. नई दिल्ली इलाके में सड़कों की मरम्मत, फुटपाथ सुधारने और शहर को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए तैयार करने का काम भी चल रहा है.
दिल्ली पहले से ही भारत की राजनीतिक राजधानी है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति भवन, संसद और विदेश मंत्रालय मौजूद हैं. लेकिन अब यहां ऐसा आधुनिक आयोजन स्थल भी है जहां दुनिया के शीर्ष नेताओं की बैठक कराई जा सकती है. यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि दिल्ली दुनिया के परंपरागत डिप्लोमैटिक हब्स जैसी पूरी तरह स्थापित हो चुकी है, लेकिन भारत मंडपम ने निश्चित तौर पर दिल्ली को वैश्विक सम्मेलनों की मेजबानी करने वाले बड़े शहरों की सूची में मजबूत जगह दिला दी है. तीन साल पहले G20 के दौरान भारत मंडपम दुनिया के सामने आया था और आज यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का एक नया पावर सेंटर बन चुका है.