डॉक्टर ने कहा है कि बच्चेदानी में गांठ है... यह सुनते ही अधिकतर महिलाएं डर जाती है. मन में सबसे पहला सवाल आता है कि कि क्या यह कैंसर तो नहीं है? क्या बच्चेदानी निकलवानी पड़ेगी? क्या अब मां बनना मुश्किल होगा? इन सवालों के जवाब डॉक्टरों ने बताए हैं. बच्चेदानी की गांठ में कब ऑपेशन की जरूरत होती है और कब यह दवाओं से ठीक हो जाती है इस बारे में भी डॉक्टरों ने बताया है.
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार, 50 साल की उम्र तक 70-80% महिलाओं में किसी न किसी समय यूटेरिन फाइब्रॉइड ( बच्चेदानी की गांठ) विकसित हो सकती हैं, हालांकि इनमें से कई महिलाओं को कभी कोई लक्षण महसूस नहीं होता. यही वजह है कि कई बार यह बीमारी अचानक अल्ट्रासाउंड में सामने आती है.
बच्चेदानी में गांठ बनती क्यों है?
दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. मेघा मित्तल बताती हैं कि बच्चेदानी की मांसपेशियों में बनने वाली इन गांठ को आम भाषा में रसौली भी कहा जाता है. ये मटर के दाने जितनी छोटी भी हो सकती है और कई बार इतनी बड़ी भी कि पूरे पेट का आकार बदल जाए. गांठ बनने के पीछे सबसे बड़ा रोल महिला हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का होता है. यह15-50 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है.
डॉ. मेघा बताती हैं कि हार्मोन ही अकेली वजह नहीं हैं. अगर परिवार में मां, बहन या किसी करीबी महिला को फाइब्रॉइड रहा हो तो इसका खतरा बढ़ जाता है, इसके अलावा मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठे रहना, जंक फूड, तनाव और पर्याप्त नींद न लेना भी हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं.
नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) से जुड़ी कई रिसर्च बताती हैं कि अधिक वजन वाली महिलाओं में फाइब्रॉइड का जोखिम सामान्य वजन वाली महिलाओं की तुलना में ज्यादा हो सकता है. हालांकि यह कहना गलत होगा कि सिर्फ मॉडर्न लाइफस्टाइल से ही फाइब्रॉइड होता है, लेकिन खराब लाइफस्टाइल भी इसके खतरे को बढ़ा सकती है.
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क्या हर गांठ का ऑपरेशन करना पड़ता है?
डॉ. मेघा मित्तल कहती हैं कि अगर गांठ छोटी है, महिला को कोई परेशानी नहीं है और उसका आकार तेजी से नहीं बढ़ रहा है, तो केवल नियमित जांच और अल्ट्रासाउंड से निगरानी की जाती है. जरूरत पड़ने पर ब्लीडिंग कम करने, दर्द कम करने या हार्मोन से जुड़े लक्षणों को संभालने के लिए दवाएं दी जाती हैं. डॉ. मेघा बताती हैं कि बच्चेदानी में बनने वाली गांठ बिना कैंसर वाली होती है और अधिकतर मामलों में ये दवाओं से निकल जाती है.
कब पड़ती है सर्जरी की जरूरत?
अगर किसी महिला की गांठ का साइज बढ़ता जा रहा है. इसकी वजह से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही हो, हीमोग्लोबिन का लेवल गिर रहा है, पेट या कमर में लगातार तेज दर्द हो,तब डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह दे सकते हैं. आजकल तो दूरबीन सर्जरी से इसको आसानी से निकाल दिया जाता है. अगर महिला भविष्य में मां बनना चाहती है तो डॉक्टर अक्सर केवल फाइब्रॉइड निकालने की कोशिश करते हैं. वहीं जिन महिलाओं की फैमिली पूरी हो चुकी हो और समस्या बहुत गंभीर हो, उनमें कुछ मामलों में बच्चेदानी निकालने की सलाह दी जा सकती है.
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इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें
पेट में लगातार भारीपन रहे
बार-बार पेशाब आए,
कमर या पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द हो
प्रेग्नेंसी में दिक्कत आना
क्या फाइब्रॉइड से बचाव किया जा सकता है?
फाइब्रॉइड को पूरी तरह रोकने का कोई पक्का तरीका अभी तक नहीं मिला है, लेकिन अच्छी लाइफस्टाइल को अपनाकर इसको आसानी से रोका जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि रोज कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें, वजन कंट्रो में रखें, हरी सब्जियां, फल और फाइबर से भरपूर भोजन लें.