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Ranchi Protest : छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 9 दिन से भूख हड़ताल पर, भूखा रहने से शरीर में क्या होता है?

JPSC-JSSC CGL परीक्षाओं में गड़बड़ी के विरोध में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. झारखंड में छात्रों का विरोध जारी है और वे विधानसभा परिसर तक पहुंच गए हैं. भूख हड़ताल के दौरान शरीर में क्या होता है इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.

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महतो भूख हड़ताल पर हैं. (Photo- ITGD)
महतो भूख हड़ताल पर हैं. (Photo- ITGD)

Jharkhand Student Protest: JPSC-JSSC CGL परीक्षाओं में गड़बड़ियों के विरोध में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं. फिलहाल झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है और छात्र विधानसभा परिसर तक पहुंच गए हैं. छात्रों के प्रदर्शन में महतो ने भी हिस्सा लिया है और उनकी भूख हड़ताल अभी भी जारी है, लेकिन इतने दिनों तक भूखा रहने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है? इस बारे में एक्सपर्ट ने बताया है. 

भूखा रहने के पहले दिन शुरुआत में शरीर बॉडी में मौजूद एनर्जी का यूज करता है. अगर इस दौरान भोजन न मिले तो शरीर लिवर में जमा ग्लाइकोजन को तोड़कर ग्लूकोज बनाता है. इससे एनर्जी मिलती है. करीब 24 घंटे के बाद ग्लाइकोजन का लेवल काफी कम होने लगता है और शरीर एनर्जी के दूसरे सोर्स की ओर बढ़ता है. इसके लिए बॉडी में जमा फैट को यूज करने लगता है. जब फैट टूटने लगता है तो कीटोन बनते हैं, इनको शरीर एनर्जी के लिए इस्तेमाल करने लगता है. इस दौरान शरीर में हल्की सी कमजोरी महसूस होना शुरू हो जाती है. कुछ मामलों में चक्कर आने की शिकायत भी महसूस हो सकती है. भूखे रहने के तीसरे दिन तक ऐसा महसूस होता है. 

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4-10 दिन में क्या खतरा बढ़ता है?

दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि अगर चौथे दिन तक भी खाना ना मिले तो अब शरीर फैट नहीं मसल्स से एनर्जी लेना शुरू कर देता है.  इसका असर मांसपेशियों की ताकत, इम्यून सिस्टम पर पड़ सकता है. कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर कम हो सकता है और शरीर में सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ सकता है.

अगर इस दौरान व्यक्ति ने पानी पी लिया तो कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अगर पानी भी नहीं पिया तो हालत बिगड़ने का रिस्क होता है. इससे पेशाब कम होना, शुगर लेवल गिरना, दिल की धड़कन का नॉर्मल ना होना और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी समस्या हो सकती है. इस दौरान व्यक्ति को सेलाइन लगाना बहुत जरूरी हो जाता है, ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस मेंटेन रह सके. 

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खाना दोबारा शुरू करना भी आसान नहीं

डॉ सुभाष बताते हैं कि कई दिनों तक खाना न खाने के बाद अचानक ज्यादा खाना डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए. बेहतर है कि इस दौरान अस्पताल में एडमिट हो जाएं.ऐसा इसलिए क्योंकि लंबे उपवास के बाद शरीर में रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा रहता है, जिसमें खाना शुरू करने के बाद इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बदल सकते हैं और दिल, सांस तथा दूसरे अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है.

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