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महिलाओं से जुड़ी इस बीमारी का बदला गया नाम, 14 साल तक हेल्थ एक्सपर्ट ने क्यों की लड़ाई

महिलाओं में हार्मोनल समस्या माना जाने वाले PCOS का नया नाम बदलकर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) रखा गया, जिससे इस बीमारी की सही पहचान और इलाज में मदद मिलेगी.

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अब PCOS नहीं, PMOS कहलाएगी यह बीमारी
अब PCOS नहीं, PMOS कहलाएगी यह बीमारी

महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या PCOS को अब नए नाम से जाना जाएगा. अब इसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) (PMOS) कहा जाएगा. दुनिया भर के डॉक्टरों और रिसर्चर्स का मानना है कि पुराना नाम इस बीमारी को सही तरीके से समझाने में मदद नहीं करता था. यही वजह है कि इसका नाम बदलने का फैसला लिया गया है.

दरअसल, PCOS का पूरा नाम पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) था. इस नाम से ऐसा लगता था कि यह सिर्फ ओवरी में सिस्ट बनने से जुड़ी बीमारी है, जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता. कई महिलाओं में PCOS होने के बावजूद ओवरी में सिस्ट नहीं पाए जाते. यह बीमारी सिर्फ पीरियड्स या ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है.

नए नाम PMOS की क्या खासियत है?

डॉक्टरों के मुताबिक नया नाम इस बीमारी को बेहतर तरीके से समझाने में मदद करता है. पॉलीएंडोक्राइन (Polyendocrine) का मतलब यह शरीर के कई हार्मोन्स को प्रभावित करती है. मेटाबॉलिक (Metabolic) का मतलब है कि इसका असर वजन, ब्लड शुगर और इंसुलिन पर भी पड़ता है. ओवेरियन (Ovarian) बताता है कि यह रिप्रोडक्टिव हेल्थ और ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या है. वहीं, सिंड्रोम (Syndrome) है कई लक्षणों का एक साथ दिखाई देना. आम भाषा में कहें तो PMOS एक ऐसी हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या है जो महिलाओं की पीरियड्स, फर्टिलिटी, वजन, स्किन और मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर सकती है.

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PMOS के लक्षण क्या है?
PMOS के लक्षणों से जूझ रही महिलाओं में पीरियड साइकिल बिगड़ सकते हैं, चेहरे पर ज्यादा बाल आने लगते हैं और मुंहासे की समस्या बढ़ सकती है. इसके अलावा तेजी से वजन बढ़ना, प्रेग्नेंसी में दिक्कत, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं. साथ ही, इस समस्या से डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है.

क्यों जरूरी माना जा रहा है यह बदलाव?
एक्सपर्टस का कहना है कि लंबे समय तक PCOS को सिर्फ महिलाओं की पीरियड्स से जुड़ी समस्या समझा गया. इससे कई महिलाओं में बीमारी की सही समय पर पहचान और इलाज नहीं हो पाया. नया नाम लोगों को यह समझाने में मदद करेगा कि यह सिर्फ ओवरी की नहीं, बल्कि पूरे शरीर से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम है. इस नाम को बदलने की प्रोसेस में लगभग 14 साल लगे और इसमें दुनियाभर के डॉक्टरों, रिसर्चर्स और हजारों महिलाओं की राय शामिल की गई. एक्सपर्टस को उम्मीद है कि नए नाम से इस बीमारी को लेकर जागरुकता बढ़ेगी और महिलाओं को बेहतर इलाज मिल सकेगा.

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