एक दौर था जब लोग रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर शहर जाते थे, लेकिन उत्तर प्रदेश के ग्रामीण लोग गांव में ही रहकर कमाई कर रहे हैं. खेती के साथ साथ पशुपालन से लोगों का इनकम बढ़ रहा है. राज्य की दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि साल 2024-25 में भारत में लगभग 248 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ जो सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, इसमें उत्तर प्रदेश में ही 38.8 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन हुआ. वहीं, डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण, रोजगार सृजन एवं किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम है.
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नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत अलग-अलग योजनाओं से कुल 17,994 लाभार्थियों को फायदा हुऔ और 4,951 दूध सहकारी समितियों के गठन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2.25 लाख रोजगार मिले हैं. इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश में 2100 नव चयनित मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-सवंर्धन योजना, 1500 से अधिक मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना तथा 450 से अधिक नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थियों को चयन पत्र दिया गया.
राज्य में पशुपालन, सुदृढ़ डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर और दुग्ध उत्पादकों की सक्रियता के बल पर डेयरी सेक्टर नई ऊंचाइयों को छू रहा है. दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. के अनुसार, प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 829 एमओयू (MoU) किए गए हैं.
'यूपी डेयरी नीति-2022' के आने से राज्य में दूध कारोबार को बड़ा फायदा मिला है. इस योजना के तहत राज्य में दूध को स्टोर करने और प्रोसेस करने की क्षमता में हर दिन 39 लाख लीटर का इजाफा हुआ है. इसके साथ ही, इस क्षेत्र में करीब 10,000 लोगों को नया रोजगार मिला है.
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