वक्त के साथ बातचीत का अंदाज हमेशा बदलता रहता है या फिर यूं कहें कि बदलती पीढ़ी भी वक्त के साथ भाषा, बोलचाल समेत हर चीज में धीरे धीरे बदलाव लाती है. ऐसा ही कुछ जेन जी भी कह रहे हैं. जेन जी की बातचीत का अंदाज समय के साथ लगातार बदल रहा है. रोजमर्रा की बातचीत में नए शब्द और बोलने के नए तरीके जुड़ते रहते हैं. दिलचस्प बात ये है कि जो शब्द आज युवाओं के बीच खूब इस्तेमाल हो रहा है, वो कुछ वक्त बाद ही पुराना लगने लगता है. आखिर जेन जी की भाषा इतनी तेजी से क्यों बदलती है और आज का चलन कल पुराना कैसे हो जाता है?
अगर कुछ साल पहले किसी ने कहा होता कि किसी की तारीफ के लिए ‘रिज’ या ‘ऑरा’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाएंगे, तो शायद बहुत से लोग इसका मतलब ही नहीं समझ पाते और इस्तेमाल वो भी अपनी रोजमर्रा की भाषा में शायद ही कर पाते. लेकिन आज ऐसे शब्द जेन जी की ऑनलाइन और रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन चुके हैं. दिलचस्प बात ये है कि जो बोलचाल का शब्द आज चलन में है, वो कुछ वक्त बाद ही पुराना भी लगने लगता है और ऐसा लगता है कि ये शब्द कितने वक्त से सुनते आ रहे है या कितना पुराना है. आखिर जेन जी की भाषा इतनी तेजी से क्यों बदलती है?
इंटरनेट ने भाषा की रफ्तार बढ़ा दी
जेन जी की भाषा में बदलाव की सबसे बड़ी वजह इंटरनेट और सोशल मीडिया को माना जा सकता है. पहले कोई नया बोलचाल का शब्द दोस्तों के ग्रुप, स्कूल, कॉलेज या किसी खास इलाके तक सीमित रह सकता था. लेकिन अब हम हर दूसरा शब्द सोशल मीडिया से सीख रहे है. अब कोई शब्द छोटे वीडियो, मजेदार तस्वीर, वीडियो या चर्चित पोस्ट के जरिए कुछ ही वक्त में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है.
कोई शब्द जितनी तेजी से फैलता है, उतनी ही तेजी से उसका इस्तेमाल भी बढ़ता है. और जब कोई शब्द बहुत ज्यादा इस्तेमाल होने लगता है, तो उसे नया या मजेदार बनाए रखना मुश्किल हो जाता है.
आज का चलन, कल क्रिंज
यही वजह है कि जेन जी के बीच बोलचाल का कोई शब्द लंबे समय तक नहीं टिकता. जब कोई शब्द पहली बार इस्तेमाल होता है, तो वह अलग और मजेदार लगता है. लेकिन जैसे-जैसे कंपनियां, फेमस लोग और हर सोशल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति उसे अपनाने लगता है, उसकी खासियत कम होने लगती है.
इसके बाद वही शब्द कुछ युवाओं को पुराना या बनावटी लगने लगता है. फिर कोई नया शब्द उसकी जगह ले लेता है.
मीम और छोटे वीडियो बनाते हैं नए शब्द
जेन जी की भाषा सिर्फ डिक्शनरी से नहीं बन रही. मजेदार फोटोज, छोटे वीडियो, खेलों से जुड़े ऑनलाइन ग्रुप, पिक्चर और इंटरनेट पर बने अलग-अलग समुदाय भी नए शब्दों और बोलचाल के तरीकों को लोकप्रिय बनाते हैं.
कई बार किसी फिल्म या किसी सीरियल का डायलॉग रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाता है. कभी किसी मजेदार फोटो से कोई शब्द निकलता है और कभी सोशल मीडिया पर कोई छोटा सा मजाक इतना लोकप्रिय हो जाता है कि लोग उसे बातचीत में इस्तेमाल करने लगते हैं.
हर पीढ़ी की अपनी भाषा रही है
हालांकि बोलचाल के शब्दों का बदलना कोई नई बात नहीं है. हर पीढ़ी ने अपने समय में अलग शब्दों और बोलने के तरीकों का इस्तेमाल किया है. फर्क सिर्फ इतना है कि आज इंटरनेट ने इस बदलाव की स्पीड बहुत बढ़ा दी है.
पहले की पीढ़ियों के समय में भी कई नए शब्द लोकप्रिय हुए थे, लेकिन उनके फैलने की गति आज जैसी नहीं थी. जेन जी के लिए भाषा सिर्फ बातचीत का तरीका नहीं, बल्कि इंटरनेट संस्कृति का भी हिस्सा है.
शब्द से ज्यादा तेजी से बदल रहा है उसका मतलब
एक और खास बात ये है कि जेन जी किसी शब्द का इस्तेमाल उसके सीधे अर्थ से अलग तरीके से भी कर सकती है. किसी शब्द का मतलब उसके कॉन्टेक्स्ट, बोलने के अंदाज और स्थिति के हिसाब से बदल सकता है. हर बार एक शब्द को उसके एग्जेक्ट मीनिंग में जेन जी इस्तेमाल नहीं करते.
यानी जेन जी की भाषा सिर्फ नए शब्द बनाने की कहानी नहीं है. ये इंटरनेट संस्कृति, मीम, एंटरटेनमेंट और दोस्तों के बीच बदलती बातचीत का नतीजा है.
आज जो बोलचाल का शब्द आपको नया और अजीब लग रहा है, हो सकता है कुछ महीनों बाद वही पुराना लगे और उसकी जगह कोई नया शब्द आ चुका हो. शायद यही जेन जी की भाषा की सबसे खास बात है-ये एक जगह टिकती नहीं, लगातार बदलती रहती है.