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प्रॉपर्टी या शेयर? जानें Gen Z कैसे बना रहे हैं अपना निवेश पोर्टफोलियो

युवा निवेशकों के लिए रियल एस्टेट अब जरूरी नहीं कि पूरे निवेश पोर्टफोलियो का केंद्र हो, बल्कि यह कई एसेट क्लास में से एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.

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Gen Z निवेशकों की बदली पसंद (Photo-ITG)
Gen Z निवेशकों की बदली पसंद (Photo-ITG)

Gen Z के निवेशकों के पास पिछली पीढ़ियों की तुलना में निवेश के कहीं ज्यादा विकल्प मौजूद हैं. शेयर, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट के साथ अब REITs, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म भी उनकी पहुंच में हैं. निवेश के इन बढ़ते विकल्पों ने संपत्ति बनाने में रियल एस्टेट की पारंपरिक भूमिका को भी बदल दिया है. युवा निवेशक अब प्रॉपर्टी की तुलना दूसरे निवेश विकल्पों से रिटर्न, लिक्विडिटी और लचीलेपन जैसे पैमानों पर कर रहे हैं.

BOP.in के को-फाउंडर गौरव मावी के मुताबिक, डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट की भूमिका बनी रह सकती है, लेकिन युवा निवेशक प्रॉपर्टी को पहले की पीढ़ियों से अलग तरीके से देख रहे हैं, उनके लिए घर या प्रॉपर्टी अब जरूरी नहीं कि पहला निवेश हो. इसके बजाय वे इसे दूसरे एसेट क्लास के साथ रखकर उसके फायदे और सीमाओं का आकलन कर रहे हैं.

रियल एस्टेट की मांग अब भी मजबूत

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब भारत के रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी बाजार में मांग बनी हुई है. नाइट फ्रैंक के अनुमान के मुताबिक, 2025 में भारत के आठ प्रमुख रेजिडेंशियल बाजारों में 3.48 लाख से ज्यादा घरों की बिक्री हुई. इसी दौरान प्रीमियम हाउसिंग की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ी, जो महंगी संपत्तियों की मांग बने रहने का संकेत देती है.

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गौरव मावी द्वारा बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के कई माइक्रो मार्केट में सालाना आधार पर प्रॉपर्टी की कीमतों में करीब 10 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई. क्षेत्र में तेजी से हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास भी रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रहा है.

युवा निवेशकों के लिए लिक्विडिटी अहम

Gen Z निवेशकों के लिए लिक्विडिटी एक महत्वपूर्ण पहलू बनकर उभरी है, करियर में बदलाव, उद्यमिता और नौकरी या व्यवसाय के कारण बार-बार शहर बदलने की जरूरत युवा निवेशकों को अपने शुरुआती करियर में बड़ी रकम को फिजिकल प्रॉपर्टी में लॉक करने से पहले सोचने पर मजबूर कर सकती है.

रियल एस्टेट में निवेश के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है और इसे तुरंत नकदी में बदलना भी आसान नहीं होता, इसके मुकाबले शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय उत्पादों में निवेश और निकासी अपेक्षाकृत आसान हो सकती है.

Fractional Ownership और SM REIT से बदला विकल्प

Fractional Ownership और लिस्टेड रियल एस्टेट प्रोडक्ट्स के विस्तार ने निवेशकों के लिए रियल एस्टेट में निवेश के नए रास्ते खोले हैं. SEBI ने मार्च 2024 में SM REIT का फ्रेमवर्क पेश किया था, इसके जरिए निवेशक पूरी प्रॉपर्टी खरीदे बिना रियल एस्टेट में निवेश कर सकते हैं.

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गौरव मावी ने ICRA के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में Fractional Ownership प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 5,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां मैनेज की जा रही हैं, वहीं, अनुमानित 67,000 करोड़ से 71,000 करोड़ रुपये की पूरी हो चुकी ऑफिस प्रॉपर्टीज को SM REIT के जरिए मोनेटाइज किया जा सकता है.

प्रॉपर्टी में निवेश के अपने फायदे

फिजिकल प्रॉपर्टी में निवेश की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जो वित्तीय संपत्तियों में सीधे तौर पर नहीं मिलतीं, इनमें किराये से होने वाली आय, किसी वास्तविक संपत्ति का मालिकाना हक और लोन के जरिए बड़ी संपत्ति में निवेश करने की क्षमता शामिल है.
हालांकि, इसके साथ ट्रांजैक्शन कॉस्ट, रखरखाव का खर्च, कर्ज से जुड़ा जोखिम और कम लिक्विडिटी जैसी चुनौतियां भी होती हैं. इसलिए युवा निवेशकों के लिए केवल संभावित रिटर्न ही नहीं, बल्कि निवेश से जुड़े खर्च और जोखिम को भी ध्यान में रखना जरूरी हो जाता है.

एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट के आसपास बढ़ रही गतिविधियां

इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास भी प्रॉपर्टी निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रहा है. द्वारका एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास रेजिडेंशियल और कमर्शियल गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं.

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अब प्रॉपर्टी बनाम शेयर नहीं, पोर्टफोलियो पर जोर

Gen Z निवेशकों के बीच उभरता रुझान रियल एस्टेट और वित्तीय संपत्तियों में से किसी एक को चुनने के बजाय अलग-अलग एसेट क्लास को मिलाकर पोर्टफोलियो तैयार करने का है. रियल एस्टेट इस पोर्टफोलियो का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका महत्व निवेशक की आय, निवेश की अवधि, लिक्विडिटी की जरूरत, जोखिम लेने की क्षमता और प्रॉपर्टी की गुणवत्ता व लोकेशन जैसे कारकों पर निर्भर करता है.

कुल मिलाकर, वेल्थ क्रिएशन का तरीका अब पोर्टफोलियो आधारित होता जा रहा है, फिजिकल रियल एस्टेट, लिस्टेड REITs, इक्विटी और अन्य वित्तीय साधन अलग-अलग निवेश उद्देश्यों को पूरा कर सकते हैं. 

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